बदलाव के 12 साल, आगे कई चुनौतियां

इन 12 सालों में देश ने कई चुनौतियों का दृढ़ता से सामना किया

बदलाव के 12 साल, आगे कई चुनौतियां

अभी कई चुनौतियां बाकी हैं

साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी ने देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, तब कई बुद्धिजीवियों ने कहा था कि 'ये भी पांच साल दिल्ली में गुजार कर गुजरात चले जाएंगे।' अब 12 साल बाद वे 'भविष्यवाणियां' अत्यंत हास्यास्पद लगती हैं। मोदी के नेतृत्व में राजग ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की। इसकी कल्पना तो विपक्ष ने भी नहीं की होगी। इन 12 सालों में देश ने कई चुनौतियों का दृढ़ता से सामना किया और कई उपलब्धियां हासिल कीं। याद करें, साल 2014 में इंटरनेट की क्या स्थिति थी? आज हर घर में इंटरनेट पहुंच गया है। तब लोग बिजली-पानी के बिल जमा कराने, ट्रेन, बस और सिनेमा के टिकट खरीदने के लिए घंटों कतारों में खड़े रहते थे। इंटरनेट सुलभ और सस्ता होने, डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिलने से वे सारी दिक्कतें दूर हो गईं। पहले, पाकिस्तानी आतंकवादी बेखौफ होकर हमले करते थे। वे पीओके से लेकर पूरे पाकिस्तान में जनसभाएं कर भारत के खिलाफ जहर उगलते थे। पाकिस्तानी फौज उनकी हमदर्द बनकर साए की तरह साथ रहती थी। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद बहुत बड़ी संख्या में आतंकवादी मारे गए। कश्मीर घाटी में कई खूंखार आतंकवादियों का सफाया कर दिया गया। यही नहीं, सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और 'ऑपरेशन सिंदूर' में उन आतंकवादियों को भी परलोक भेजने का इंतजाम कर दिया गया, जो आईएसआई और पाकिस्तानी फौज की निगरानी में खुद को सुरक्षित समझते थे। इससे अन्य आतंकवादियों में यह संदेश चला गया कि अगर भारत में कोई वारदात करेंगे तो दुनिया की कोई ताकत आपको ज्यादा दिनों तक सुरक्षित नहीं रख पाएगी। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने कोरोना महामारी पर विजय प्राप्त की। उस दौरान लॉकडाउन जैसे कड़े फैसले लिए गए। अगर नहीं लिए जाते तो करोड़ों लोगों का जीवन घोर संकट में पड़ सकता था।

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भारत में इस अवधि में करोड़ों ऐसे लोगों के खाते खुले, जिन्होंने कभी बैंक शाखा तक नहीं देखी थी। करोड़ों घरों में शौचालयों का निर्माण हुआ। इससे महिलाओं को बहुत सुविधा हुई। हालांकि अभी कई चुनौतियां बाकी हैं। पश्चिम एशिया में संघर्ष की स्थिति के बाद भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना होगा। इसमें काफी प्रगति हुई है, लेकिन हमारी जरूरतों के सामने यह अपर्याप्त है। देश को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के विकल्पों पर काम करना होगा। देशवासियों को डिजिटलीकरण का पूरा फायदा मिलना चाहिए। आज भी कई जगह लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ये चक्कर अब खत्म होने चाहिएं। हर सुविधा ऑनलाइन मिलनी चाहिए। सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार खत्म होना चाहिए। यह हमारे देश की प्रगति में बहुत बड़ी रुकावट है। कई दफ्तर तो ऐसे हैं, जहां भ्रष्टाचार को शिष्टाचार समझा जाने लगा है। रिश्वतखोरी का आलम यह है कि कई अधिकारी लाखों से नीचे तो बात ही नहीं करते। उनकी जेबें भरने के लिए आम आदमी चाहे अपना घर बेचे या चीजें गिरवी रखे। उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। भ्रष्ट कर्मचारियों की मनमानी बहुत बढ़ गई है। आम आदमी उनके सामने खुद को असहाय महसूस करता है। प्रधानमंत्री मोदी इस ओर जरूर ध्यान दें। देश को बांग्लादेशी घुसपैठियों से मुक्ति मिलनी चाहिए। अब पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार है। असम में भी भाजपा ने सत्ता में वापसी की है। केंद्र में पहले से ही राजग की सरकार है। घुसपैठियों को खदेड़ने में कहीं कोई अड़चन नहीं है। उन्हें पकड़ा जाए और बांग्लादेश भेजा जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि वे किसी अन्य राज्य में न चले जाएं, जहां वोटबैंक के नाम पर कोई पार्टी उनकी हितैषी बनकर तैयार मिले। डॉलर के मुकाबले रुपए का ज्यादा कमजोर होना अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। स्वदेशी को बढ़ावा देने के साथ तुरंत ऐसे उपाय किए जाएं, जो अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएं। इस मुहिम को राष्ट्रीय आंदोलन की तरह आगे बढ़ाएं।

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