महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद के मद्देनज़र बेलगावी जिले में सुरक्षा कड़ी की गई

यह देखते हुए उपाय करने का फैसला किया है कि कोई अप्रिय घटना न हो

महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद के मद्देनज़र बेलगावी जिले में सुरक्षा कड़ी की गई

सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के उद्देश्य से कर्नाटक और महाराष्ट्र पुलिस ने निप्पनी में बैठक की थी

बेलगावी/दक्षिण भारत। पुलिस ने कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच दशकों पुराने सीमा विवाद के केंद्र बेलगावी जिले में सुरक्षा कड़ी कर दी है, क्योंकि इससे संबंधित मामला उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के​ लिए आ रहा है।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने शहर सहित बेलगावी जिले में 21 चेकपोस्ट स्थापित किए हैं और अतिरिक्त कर्नाटक राज्य रिजर्व पुलिस (केएसआरपी) बल भी तैनात किए गए हैं।

एडीजीपी (कानून व्यवस्था) आलोक कुमार ने कहा, हमने यह देखते हुए उपाय करने का फैसला किया है कि कोई अप्रिय घटना न हो। उच्चतम न्यायालय में मामला आने के साथ और यह भी देखने के लिए कि पिछले सप्ताह हुईं घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

यह फैसला सीमा विवाद को लेकर कुछ घटनाओं, जैसे बसों और वाहनों को नुकसान पहुंचाने या दोनों तरफ काला करने के मद्देनजर लिया गया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के उद्देश्य से कर्नाटक और महाराष्ट्र पुलिस ने मंगलवार को निप्पनी में बैठक की थी। बैठक में उन्होंने शांति और सद्भाव को भंग करने और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का फैसला किया।

पुलिस ने यह भी कहा कि वे महाराष्ट्र के मंत्रियों चंद्रकांत पाटिल और शंभुराज देसाई के 3 दिसंबर को बेलगावी में महाराष्ट्र एकीकरण समिति (एमईएस) के पदाधिकारियों से मिलने की संभावित यात्रा के मद्देनजर सभी एहतियाती उपाय कर रहे हैं। 

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, राज्य पुलिस महाराष्ट्र के नेताओं की किसी भी निजी यात्रा को नहीं रोकेगी, लेकिन अगर शांति भंग करने का कोई प्रयास किया जाता है तो कार्रवाई की जाएगी।

अदालती मामले, महाराष्ट्र के मंत्रियों के संभावित दौरे और 19 दिसंबर से बेलगावी में आगामी विधानसभा सत्र के मद्देनजर सभी एहतियाती उपाय किए गए हैं और किए जाते रहेंगे।

बता दें कि भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के बाद सीमा विवाद 1960 के दशक का है।

महाराष्ट्र ने बेलगावी पर दावा किया, जो पूर्व बॉम्बे प्रेसीडेंसी का हिस्सा था, क्योंकि इसमें मराठी भाषी आबादी का एक बड़ा हिस्सा है। इसने कई मराठी भाषी गांवों पर भी दावा किया, जो वर्तमान में कर्नाटक का हिस्सा हैं।

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