सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल के कारण नागरिक सेवाएं प्रभावित

सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल के कारण नागरिक सेवाएं प्रभावित

चेन्नई। राज्य के सरकारी शिक्षकों और कर्मचारियों के २१ संघों द्वारा ज्वाइंट एक्शन कमेटी ऑफ तमिलनाडु टीचर्स ऑर्गेनाइजेशन-गर्वमेंट इम्पलाइज ऑर्गेनाइजेशन (जैक्टो-जीईओ) के बैनर तले गुरुवार से अनिश्चितकालीन ह़डताल शुरु कर दी गई। कर्मचारी महासंघ की ओर से काफी लंबे समय से पुरानी पेंशन योजना को लागू करने और वेतन के ढांचे का पुर्ननिरीक्षण करने सहित कई अन्य मांगे की जा रही हैं। महासंघ ने कहा था कि अगर उसकी मांगों को ६ सितम्बर तक पूरा नहीं किया जाता है तो वह ७ सितम्बर से अनिश्चितकालीन ह़डताल शुरु करेगा। ह़डताल का समर्थन कर रहे सरकारी कर्मचारियों के २१ संघों का कहना है कि उनके प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री ईडाप्पाडी के. पलानीस्वामी से अपनी मांगों के संबंध में बातचीत की थी लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा सरकारी कर्मचारियों की मांगों पर कोई निश्चित जवाब नहीं देने के कारण उन्हें अनिश्चितकालीन ह़डताल करने के लिए बाध्य होना प़ड रहा है।द्बब्य्फ्ैंच्चय् ·र्ष्ठैं ःद्भय्ख्रय्त्रद्य फ्ैंच्चय् द्मब्र्‍्र ·र्ैंद्य द्यब्ष्ठ ब्ठ्ठणक्कत्रय्ध् ·र्ैंय् फ्द्बत्र्श्चद्महालांकि जैक्टो-जीईओ में राज्य के सरकारी कर्मचारियों के ७९ संघ शामिल हैं लेकिन इनमें से मात्र २१ संघ ही इस अनिश्चितकालीन ह़डताल का समर्थन कर रहे हैं। ज्यादातर संघों ने बुधवार को मुख्यमंत्री पलानीस्वामी के साथ इस मुद्दे पर हुई बातचीत और कर्मचारियों की मांगों के संबंध में जल्द ही घोषणा करने का आश्वासन दिए जाने के बाद अपनी अनिश्चितकालीन ह़डताल स्थगित करने का निर्णय लिया है। गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में ह़डताल कर रहे जैक्टो-जीईओ के संयोजकों ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता ने चुनाव के दौरान वादा किया था कि सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू की जाएगी और इस आधार पर राज्य सरकार को नई सहयोगी पेंशन योजना (सीपीएस) को तत्काल निरस्त करना चाहिए लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री पलानीस्वामी ने वेतन पुर्ननिरीक्षण के संबंध में भी कोई आश्वासन नहीं दिया है।·र्ैंंश्च डत्र्य्द्मह्र झ्द्य प्रय्रुर्ङैं ब्रुंश्च ब्ठ्ठणक्कत्रय्ध्हालांकि संगठन के सभी संघों में इस अनिश्चितकालीन ह़डताल को लेकर सहमति नहीं है लेकिन इसके बावजूद २१ संघों द्वारा समर्थन करने के कारण राज्य में गुरुवार को नागरिक सुविधाएं व्यापक तौर पर प्रभावित हुई। राज्य भर में सरकारी कर्मचारियों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अरक्कोणम, अरनी, ईरोड, सेलम, तिरुवनमलै, तिरुनेलवेली, तिरुत्तनी और चेन्नई में सरकारी कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन ह़डताल के पहले दिन गुरुवार को रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। इस ह़डताल के कारण सरकारी स्कूल और कॉलेज सर्वाधिक प्रभावित हुए। इसके साथ ही कई अन्य सरकारी विभागों में कामकाज प्रभावित हुआ। कई स्थानों पर तहसीलदार कार्यालय में गए लोगों को सरकारी कर्मचारियों के ह़डताल पर जाने के कारण मायूस होकर खाली हाथ लौटना प़डा।·र्रुैंच्ण फ्ैंच्चय्ह्र द्मष्ठ र्ींू ृ€ट्टरूद्धद्य त्र·र्ैं ट्टय्ध्र्‍ ब्ठ्ठणक्कत्रय्ध्गुरुवार को शुरु हुई इस ह़डताल का समर्थन नहीं करने वाले संघ के संयोजकों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने बुधवार को बातचीत के दौरान यह आश्वासन दिया था कि सरकार ३० सितम्बर तक कर्मचारियों के लिए अंतिम राहत की घोषणा करेगी। उन्होंने कहा था कि सरकारी कर्मचारियों के वेतन वृद्धि के बारे में सुझाव देने और सिफारिश करने के लिए एक कमेटी गठित की गई है। इस कमेटी की रिपोर्ट आने के तुरंत बाद सरकार इस दिशा में कार्य करेगी।मुख्यमंत्री के इसी आश्वासन पर जैक्टो-जीईओ में शामिल अधिकतर संघों ने गुरुवार को शुरु हुई इस अनिश्चितकालीन ह़डताल में शामिल नहीं होने और प्रस्तावित अनिश्चितकालीन ह़डताल १५ अक्टूबर तक स्थगित करने का निर्णय लिया।र्ङ्गय् ़द्भय्द्भय्ध्द्भ द्बष्ठ्र द्नर्‍ ख्रय्द्भद्य ब्ह् घ्रु·र्ैंर्‍ ब्स् द्भय्यघ्·र्ैंय्उल्लेखनीय है कि मंगलवार को मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ के समक्ष एक याचिका दायर कर महासंघ के सदस्य संघों को इस अनिश्चितकालीन ह़डताल में शामिल नहीं होने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। हालांकि महासंघ के प्रतिनिधिमंडल के साथ मुख्यमंत्री की बुधवार को होने वाली बातचीत के मद्देनजर उच्च न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई गुुुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी थी। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री पलानीसामी ने बुधवार को कर्मचारी महांसघ के सदस्यों के साथ बातचीत करने के बाद एक बयान जारी कर सभी सरकारी कर्मचारियों से अपील की थी कि वह ७ सितम्बर से प्रस्तावित अपनी ह़डताल वापस ले लें।

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