कोरोना से जंग में बीईएल ने दिखाया बल, तैयार किए 30 हजार आईसीयू वेंटिलेटर

कोरोना से जंग में बीईएल ने दिखाया बल, तैयार किए 30 हजार आईसीयू वेंटिलेटर

कोरोना से जंग में बीईएल ने दिखाया बल, तैयार किए 30 हजार आईसीयू वेंटिलेटर

बीईएल के सीएमडी एमवी गौतम 30,000 वेंटिलेटरों का निर्माण पूरा होने की घोषणा करते हुए। मंच पर (बाएं से) डॉ. उपेंद्र कुमार सिंह, निदेशक, सीएआईआर, विनय कुमार कात्याल, निदेशक (बेंगलूरु कॉम्प्लेक्स), बीईएल, एमवी गौतम, सीएमडी, बीईएल, डॉ. एस वेणुगोपाल, निदेशक, एडीई और मणिमोझी थियोडोर, निदेशक, डीईबीईएल।

बेंगलूरु/दक्षिण भारत। रक्षा मंत्रालय के तहत नवरत्न पीएसयू भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) ने कोरोना महामारी से मुकाबले में देश के प्रयासों को ताकत देते हुए रिकॉर्ड समय में 30,000 आईसीयू वेंटिलेटर्स का निर्माण किया।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने कोरोना मामलों में वृद्धि को देखते हुए, अप्रैल में इन 30,000 आईसीयू वेंटिलेटर के लिए ऑर्डर दिया था, ताकि देश के स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।

बीईएल ने आईसीयू वेंटिलेटर, मॉडल सीवी 200 का निर्माण किया है, जो मैसर्स स्कैनरे टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, मैसूरु के साथ लाइसेंसिंग समझौते पर आधारित है, और डीआरडीओ से डिजाइन समर्थन प्राप्त है।

डीआरडीओ, बीईएल और स्कैनरे के स्वदेशीकरण प्रयासों ने महत्वपूर्ण घटकों की अनुपलब्धता की ओर ध्यान दिया। मिसाल के तौर पर, अत्यधिक जटिल मेडिकल ग्रेड लघु आनुपातिक वाल्व, ऑन / ऑफ सोलनॉइड वाल्व, ऑक्सीजन सेंसर और प्रवाह सेंसर, यह कदम निश्चित रूप से ए​क गेम चेंजर था। भारत अब एक सक्षम और परिपक्व मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम का दावा कर सकता है।

ऑर्डर मिलने के बाद, बीईएल ने अपनी चुस्त उत्पादन प्रणाली क्षमता के आधार पर, दो सप्ताह के भीतर प्रतिदिन 500 से 1,000 वेंटीलेटर का उत्पादन करने के लिए विनिर्माण लाइन की स्थापना की।

इन वेंटिलेटरों का विनिर्माण लॉकडाउन अवधि के दौरान किया गया और बीईएल को आपूर्ति शृंखला व्यवधानों को हल करने के लिए विभिन्न सरकारी एजेंसियों से अपार समर्थन मिला।

चूंकि इन वेंटिलेटरों का निर्माण बीईएल की बेंगलूरु इकाई में केंद्रित था, इसलिए कर्नाटक सरकार ने लॉकडाउन संबंधी विभिन्न मुद्दों को हल करने की दिशा में बीईएल के लिए अतिरिक्त पहल की।

विशेषज्ञ डॉक्टरों और अस्पतालों की समिति से प्राप्त बहुमूल्य प्रतिक्रिया ने कोविड रोगियों की जरूरतों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त तरीकों के साथ वेंटिलेटर को जल्दी से उन्नत करने में बीईएल की मदद की। केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों के बीच निर्बाध समन्वय ने बीईएल के काम में तेजी लाने में मदद की।

बीईएल के सीएमडी एमवी गौतम ने कहा कि डीआरडीओ प्रयोगशालाओं के सहयोग के कारण बीईएल इस महत्वपूर्ण उपलब्धि को हासिल करने में सक्षम हुआ, जिन्होंने विभिन्न सरकारी एजेंसियों से डिजाइन और समर्थन प्रदान करने के लिए मिलकर काम किया।

एडीई के निदेशक डॉ. एस वेणुगोपाल ने कहा कि बीईएल द्वारा साढ़े चार महीनों में 30,000 वेंटिलेटरों का निर्माण एक राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड है। उन्होंने सीएमडी एमवी गौतम के नेतृत्व की सराहना की।

सीएआईआर के निदेशक डॉ. उपेंद्र कुमार सिंह ने कहा, यह सार्वजनिक, निजी और सरकारी एजेंसियों के बीच उत्कृष्ट साझेदारी का एक बहुत अच्छा उदाहरण है, खासकर संकट के समय में। उन्होंने कहा कि सभी ने देश के लिए मिलकर काम किया।

डीईबीईएल की निदेशक मणिमोझी थियोडोर ने विश्वसनीयता और गुणवत्ता मानकों को इंगित किया जिनका पालन मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण में किया जाता है। बीईएल ने इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले प्रत्येक सहभागी को धन्यवाद कहा और इस पहल को मेक इन इंडिया एवं आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

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