महिलाओं को मौका मिले तो बदल सकती हैं देश का परिदृश्य : राधामोहन

महिलाओं को मौका मिले तो बदल सकती हैं देश का परिदृश्य : राधामोहन

नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने आज कहा कि अगर महिलाओं को मौका दिया जाए तो वे देश का आर्थिक एवं सामाजिक परिदृश्य बदल करती है। सिंह ने यहां ’’महिला किसान दिवस’’ के अवसर पर आयोजित एक समारोह का उद्घाटन करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार की विभिन्न नीतियों जैसे जैविक खेती, स्वरोजगार योजना, भारतीय कौशल विकासयोजना, इत्यादि में महिलाओं को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि यदि महिलाओं को अच्छा अवसर तथा सुविधा मिले तो वे देश की कृषि को दूसरी हरित क्रांति की ओर ले जाने के साथ-साथ देश के विकास का परिदृश्य भी बदल सकती है।उन्होंने कहा कि विभिन्न प्रमुख योजनाओं और कार्यक्रमों तथा विकास संबंधी गतिविधियों के अंतर्गत महिलाओं के लिए कम से कम ३० प्रतिशत धनराशि का आवंटन सुनिश्चित किया गया है। इस अवसर पर कृषि राज्य मंत्री कृष्णा राज भी मौजूद थी। जलवायु परिवर्तन से निपटने, प्राकृतिक संसाधनों का क्षरण रोकने तथा उनका प्रबंधन करने में महिलाओं के योगदान का उल्लेख करते हुए सिंह ने कहा कि महिलाएं कृषि में बहुआयामी भूमिकाएं निभाती हैं। वे बुआई से लेकर रोपण, निराई, सिंचाई, उर्वरक डालना, पौध संरक्षण, कटाई, भंडारण आदि सभी प्रकियाओं से जु़डी हुई हैं। इसके अलावा कृषि से संबंधित अन्य कामों जैसे, मशीन प्रबंधन, चारा संग्रहण, दुग्ध और कृषि से जुडी सहायक गतिविधियों मधुमक्खी पालन, मशरुम उत्पादन, सूकर पालन, बकरी पालन, मुर्गी पालन में भी पूरी तरह सक्रिय रहती हैं।सिंह ने कहा कि विश्व खाद्य एवं कृषि संगठन के अनुसार भारतीय कृषि में महिलाओं का योगदान करीब ३२ प्रतिशत है। पहाडी तथा उत्तर-पूर्वी क्षेत्र तथा केरल में महिलाओं का योगदान कृषि तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पुरुषों से ज्यादा है। उन्होंने कहा कहा कि देश में ४८ प्रतिशत कृषि से संबंधित रोजगार में महिलाएं हैं जबकि करीब ७.५ करोड महिलाएं दुग्ध उत्पादन तथा पशुधन व्यवसाय से जु़डी गतिविधियों में साथ केंद्रीय भूमिका निभाती हैं।उन्होेंने कहा कि सरकार ने महिलाओं की क्षमताओं को पहचाना है। महिला किसानों के पोषण ओर जीविकोपार्जन के लिए शोध परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। जिनमें आदिवासी महिलाओं पर बहुत ध्यान दिया गया है। उनको पत्तों वाली एवं फलीदार सब्जियों के बीज की उपलब्धता, श्रम कम करने वाले कृषि यंत्रों की उपलब्धता तथा डेयरी, मशरूम, शहद उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है जिससे उन्हें रोजगार मिलने में आसानी होगी।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार महिला स्वयं सहायता समूह का निर्माण करने में मदद करती है।

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