'संयम ही जीवन का सार, यही आंतरिक सुख का मार्ग'

रायपुर में 3 मुमुक्षुओं का भव्य दीक्षा महोत्सव हुआ

'संयम ही जीवन का सार, यही आंतरिक सुख का मार्ग'

इस दीक्षा समारोह में करीब दस हजार से ज्यादा श्रद्धालु पूरे देश से जुड़े थे

रायपुर/दक्षिण भारत। खरतरगच्छीय मोहनलालजी म.सा. समुदाय से विनयकुशल गणिजी, विराग मुनिजी म.सा. आदि ठाणा की निश्रा में तीन दीक्षार्थियों का भव्य दीक्षा महोत्सव रायपुर में हुआ। इस अवसर पर बेंगलूरु से अनेक श्रद्धालु रायपुर उपस्थित थे।

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संघ के ललित डाकलिया ने कहा कि जैन एकता की मिसाल इस ऐतिहासिक दीक्षा महोत्सव में उपाध्याय प्रवर महेन्द्रसागरजी म.सा., उपाध्याय युवा मनीषी मनीषसागरजी आदि समस्त ठाणा, तपागच्छ के भुवनभानूश्री समुदाय के मुनि भगवंत एवं साध्वीजी, स्थानकवासी संप्रदाय व तेरापंथ समुदाय के गुरुभगवंत तथा साध्वीजी भगवंत, साध्वी समुदाय में भी गणाधीश्वर विनयकुशल गणिजी म.सा. के समुदाय की साध्वीजी विरतियशाश्री आदि ठाणा, मनोहरश्रीजी म.सा. की सुशिष्याएं सभी दीक्षा विधि के दौरान सुधर्मा स्वामी के पाट पर एकसाथ विराजमान थे।

ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के तत्वावधान में और राजेश बुरड़ परिवार द्वारा प्रायोजित इस दीक्षा समारोह में करीब दस हजार से ज्यादा श्रद्धालु पूरे देश से जुड़े थे। कार्यक्रम में तीनों दीक्षार्थियों का तिलक, माला और स्मृति चिह्न से अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद् के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष ललित डाकलिया के साथ रायपुर शाखा के अध्यक्ष मेघराज कांकरिया, मंत्री सचिन पारख ने अभिनंदन किया और उनके उज्ज्वल जीवन की कामनाएं की।

केन्द्रीय समिति की ओर से राष्ट्रीय चेयरमैन सुरेश भंसाली, अध्यक्ष सुरेश लूनिया, उपाध्यक्ष प्रदीप श्रीश्रीमाल, महामंत्री रमेश लुंकड़ ने शुभकामनाएं प्रेषित कीं। खरतर गच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिन मणिप्रभ सूरीश्वरजी महाराज ने पिछले साल विराग मुनिजी को 171 उपवास की सुदीर्घ उग्र तपस्या करने पर 'तप चक्रवर्ती' की उपाधि प्रदान की थी। उन्हें आगामी 7 फरवरी को 'गणिपद' से विभूषित किया जाएगा।

नूतन दीक्षितों को गोचरी वापरने के लिए पात्रा बोहराने का लाभ पिता गौतमचंद, उत्तमचंद, गुमानमल, दीपक कुमार एवं समस्त डाकलिया परिवार की ओर से लिया गया। इसमें राकेश डाकलिया भी मौजूद थे। इस अवसर पर विनय कुशल मुनिजी ने कहा कि हम परमात्मा महावीर के शासन में जीने वालों को ऐसे समय को निहारना चाहिए, तभी शुभ भाव बनते हैं। संयम ही जीवन का सार है, यही आंतरिक सुख का मार्ग है। इस महोत्सव मे छत्तीसगढ़ के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और कई नेता समय निकालकर गुरुभगवंतों के दर्शन-वंदन और आशीर्वाद लेने के लिए पधारे और उन्होंने मुमुक्षुओं को आशीर्वाद दिया तथा उनके उज्ज्वल जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर विनय कुशलमुनिजी म.सा. आदि ठाणा का 2025 का चातुर्मास राजनांदगांव (छ.ग.) में घोषित किया गया।

रायपुर दादावाडी में दीक्षा महोत्सव में मुमुक्षु अरिहंत बुरड़ का नूतन नाम श्री सुहस्तिभद्र मुनि महाराज, मुमुक्षु नीलेश मेहता का नूतन नाम श्री सोमभद्र मुनि महाराज और मुमुक्षु निकिता कटारिया का नूतन नाम साध्वी श्री अरिष्टलब्धि श्रीजी म.सा. घोषित किया गया। इस अवसर पर बुरड़ परिवार की ओर से आयोजित उपधान तप की मोक्षमाला आराधकों को गुरुदेव की ओर से पहनाई गई।

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