'परिवार के लिए सहनशीलता बहुत जरूरी, ताकि खुशी बनी रहे'

'अध्यात्म के रंग, परिवार के संग' कार्यशाला हुई

'परिवार के लिए सहनशीलता बहुत जरूरी, ताकि खुशी बनी रहे'

साध्वी भव्य यशाजी ने गीतिका प्रस्तुत की

बेंगलूरु/दक्षिण भारत। आचार्य महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी उदित यशाजी ठाणा-4 के पावन सान्निध्य में तेयुप राजाजीनगर द्वारा 'अध्यात्म के रंग, परिवार के संग' कार्यशाला तेरापंथ भवन में आयोजित की गई।

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साध्वीश्री द्वारा पंचपरमेष्ठी नमस्कार महामंत्र के सामूहिक उच्चारण से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। साध्वी भव्य यशाजी ने गीतिका प्रस्तुत की। उन्होंने कथा के माध्यम से बताया कि परिवार के लिए सहनशीलता का होना बहुत जरूरी है, ताकि खुशी बनी रहे। उन्होंने बताया कि कैसे 'एबीसीडी' की थ्योरी जीवन में एंटर और एग्जिट करके उसे खुशहाल बनाया जा सकता है।

साध्वी उदित यशाजी ने आचार्य तुलसी द्वारा लिखित पंचसूत्रम ग्रंथ का उल्लेख करते हुए बताया कि अनुशासन सूत्र, व्यवस्था सूत्र, आज्ञा सूत्र आदि से परिवार स्वर्ग से सुंदर बन सकता है। हर परिवार को अपना संविधान और हाजिरी पत्र बनाना जरूरी है। इससे परिवार के हर सदस्य की मौलिक मर्यादा तय होती है और आध्यात्मिक गुणों के विकास एवं खुशहाल परिवार का सपना साकार होता है। जिज्ञासा समाधान सत्र में साध्वीश्री ने श्रावकों के प्रश्नों के उत्तर दिए।

इस कार्यशाला में साध्वी भव्य यशाजी की संसार पक्षीय माताजी का तेरापंथ महिला मंडल द्वारा जैन पट्ट से अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर काफी संख्या में श्रावक-श्राविका मौजूद थे। मंच संचालन सतीश पोरवाड़ ने किया। कमलेश चौरड़िया ने आभार जताया।

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