डीपफेक वीडियो

रश्मिका मंदाना का ‘डीपफेक वीडियो’ क्लिप उन बड़े साइबर अपराधों की एक आहट भी है, जिनकी लोगों को बहुत कम जानकारी है

डीपफेक वीडियो

सरकारों को इनसे निपटने के लिए कानून बनाने होंगे, ताकि जो लोग ऐसे कृत्यों में लिप्त पाए जाएं, उन्हें कड़ा संदेश मिले

अभिनेत्री रश्मिका मंदाना का 'डीपफेक वीडियो' कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जुड़े भावी खतरों की एक छोटी-सी झलक है। जिस किसी ने भी यह वीडियो पहली बार देखा, उसके लिए असली-नकली में अंतर कर पाना बड़ा मुश्किल था। ब्रिटिश-भारतीय सोशल मीडिया सेलेब्रिटी के चेहरे को हटाकर रश्मिका मंदाना का ‘डीपफेक वीडियो’ क्लिप उन बड़े साइबर अपराधों की एक आहट भी है, जिनकी लोगों को बहुत कम जानकारी है। सरकारों को इनसे निपटने के लिए कानून बनाने होंगे, ताकि जो लोग ऐसे कृत्यों में लिप्त पाए जाएं, उन्हें कड़ा संदेश मिले।

वर्तमान में फेक न्यूज, मोबाइल फोन हैकिंग और बैंक खातों से रुपए उड़ाने जैसे अपराध बेलगाम होते जा रहे हैं। ऐसा कोई दिन नहीं जाता, जब साइबर अपराधी इन तरीकों से लोगों को चूना नहीं लगाते। अब 'डीपफेक वीडियो' एक नया सिरदर्द है। पुराने साइबर अपराधों के तौर-तरीकों को देखें तो व्यक्ति थोड़ी-सी सूझबूझ से उनकी हकीकत का पता लगा सकता है, लेकिन 'डीपफेक वीडियो' के मामले में तो विशेषज्ञ भी हैरान हैं।

रश्मिका मंदाना के नाम से जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, उसे शुरुआत में बहुत ध्यान से देखें तो पता चलता है कि यह फर्जी है। महज कुछ सेकंड में चेहरा 'बदल' जाता है, लेकिन यह बदलाव आसानी से नजर नहीं आता। अभिनेत्री का 'चेहरा' लगाने के बाद भी चेहरे के हावभाव ऐसे नहीं लगते, जिससे किसी को जरा भी शक हो। यह वीडियो खतरे की घंटी है, क्योंकि अपराधी तत्त्व इसमें इस्तेमाल की गई तकनीक से अपराधों को नए स्तर और ज्यादा तीव्रता तक पहुंचा सकते हैं। किसी की छवि खराब करने, आर्थिक अपराधों को अंजाम देने, ब्लैकमेल करने, चुनावों को प्रभावित करने जैसे अपराध समाज और देश को बहुत नुकसान पहुंचा सकते हैं।

अभी हर हफ्ते ऐसी खबरें पढ़ने को मिल जाती हैं, जिनसे पता चलता है कि शरारती तत्त्वों ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट कर सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। 'डीपफेक वीडियो' ऐसे तत्त्वों को नई ताकत दे सकता है, जो बंदर के हाथ में माचिस जैसी स्थिति होगी। इस तकनीक का बेलगाम इस्तेमाल शेयर बाजार में भूचाल ला सकता है।

याद करें, पिछले साल नवंबर में जब एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किसी शरारती तत्त्व ने ब्लू टिक लेकर यह 'जानकारी' पोस्ट कर दी थी कि मशहूर फार्मा कंपनी इंसुलिन मुफ्त उपलब्ध कराएगी। इसके बाद उस कंपनी के शेयर धड़ाम हो गए, जिससे उसे कई बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था। इस साल अमेरिका में कुछ जाने-माने बैंक दिवालिया हो गए। उनके बारे में सोशल मीडिया पर पहले यह अफवाह फैली कि वे खाता धारकों की राशि लौटाने में सक्षम नहीं हैं। उसके बाद बैंक शाखा की ओर लोगों का हुजूम उमड़ा और खजाना खाली हो गया!

'डीपफेक वीडियो' से अपराधी तत्त्व तो बैंकिंग प्रणाली को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर ही सकते हैं, वहीं शत्रु देशों की एजेंसियां हमारी अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा कर सकती हैं।

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई, जो भारत में जासूसी, आतंकवाद और नकली नोटों के प्रसार जैसे कृत्यों में शामिल रहती है, उसके द्वारा 'डीपफेक' का बड़े ही शातिराना ढंग से इस्तेमाल किए जाने की आशंका है। हाल में 'हनीट्रैप' के मामले बहुत सामने आए हैं, जिनमें महिलाओं के नाम से फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट और आपत्तिजनक वीडियो का इस्तेमाल करना पाया गया था। 'डीपफेक' से 'हनीट्रैप' के मामले बढ़ सकते हैं। इससे देश के सुरक्षा तंत्र के लिए नए खतरे पैदा हो सकते हैं। इसके मद्देनजर कड़े कानूनी प्रावधानों के साथ ही सोशल मीडिया कंपनियों को भी स्पष्ट निर्देश देने होंगे। सरकारों को इस विषय में गंभीरता से विचार कर कदम उठाने होंगे।

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