जीएसटी स्लैब में राहत

जीएसटी स्लैब में राहत

केन्द्र सरकार ने जनता को ब़डी राहत देते हुए फ्रिज, टीवी, वाशिंग मशीन समेत सौ उत्पादों पर जीएसटी की दरें घटा दी हैं। सेनेट्री नैपकिन को भी जीएसटी के दायरे से बाहर कर दिया गया है। एक साल से सेनेट्री पैड को कर मुक्त करने की मांग की जा रही थी। जीएसटी कौंसिल की २८वीं बैठक के दौरान जीएसटी की दरें घटाने का फैसला लिया गया। वित्त मंत्री पीयूष गोयल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पहले ३०-४० वस्तुओं को सस्ता करने का विचार था लेकिन अचानक सौ से अधिक वस्तुओं को सस्ता बनाने का मानस बना लिया गया। वित्त मंत्री ने एक सवाल के जवाब में कहा कि वस्तुओं को सस्ता करने से सरकार पर अधिक बोझ नहीं प़डेगा, क्योंकि सस्ते होने से इन उत्पादों की खरीद ब़ढेगी तो घाटे की स्वत: भरपाई हो जाएगी। कौंसिल ने दरें घटाने के साथ-साथ जीएसटी रिटर्न भरने की प्रक्रिया को और आसान बनाने की भी मंजूरी दी। अब कारोबारियों को सिर्फ एक पेज की रिटर्न भरना होगी और एक महीने में तीन की जगह एक ही रिटर्न दाखिल करनी होगी। जीएसटी १ जुलाई २०१७ को जब लागू की गई थी तब से कारोबारी इस कर प्रणाली से काफी नाराज थे। उनके सामने रिटर्न की प्रक्रिया से ब़डी दुविधा उत्पन्न हो गई थी। अब सरकार ने उनकी सुध ली है। अब वह सुधार की तरफ कदम ब़ढाती दिख रही है। वैसे जीएसटी परिषद ने समय-समय पर बैठकें कर इस कर-प्रणाली में कई बदलाव किए हैं और वर्तमान बदलाव भी उसी की अगली क़डी है। इसमें आम आदमी के उपयोग में आने वाले, छोटे स्तरों पर निर्मित और दस्तकारी के छोटे सामानों को प्राथमिकता दी गई है। उदाहरण के लिए सेनेट्री पैड को जीएसटी से पूरी छूट मिली है, जिस पर अब तक १२ प्रतिशत तक कर लगता रहा है। अब राखी को भी जीएसटी से बाहर रखा गया है। जिन उत्पादों पर जीएसटी की दर कम की गई है, उनमें जूते-चप्पल, छोटी टीवी, पानी गर्म करने वाला हीटर, बिजली से चलने वाली आयरन, मशीन, रफ्रिजरेटर, बाल सुखाने वाले उपकरण, वैक्यूम क्लीनर, खाद्य उपकरण, निर्माण क्षेत्र के काम आने वाला कोटा स्टोन, सैंड स्टोन और इसी तरह के अन्य पत्थर आदि शामिल हैं।इथेनॉल पर कर को ५ प्रतिशत कर देने से लोग इसे डीजल-पेट्रोल में मिलाने को उत्साहित हो सकते हैं, क्योंकि आगे चलकर सरकार भी इथेनॉल का इस्तेमाल करने वाली है। जीएसटी करों की दर और उसके रिटर्न की समस्याएं मोदी सरकार के लिए राजनीतिक रूप से घाटे का सौदा साबित होती जा रही थी। पिछले कुछ राज्यों के चुनावों, उप चुनावों के नतीजे इसी वजह से भाजपा के लिए अनुकूल साबित नहीं हुए। अब इसी साल के अंत में कुछ महत्वपूर्ण राज्यों के विधानसभा चुनाव होने हैं। ये सभी राज्य भाजपा शासित हैं। संभवत: इन्हीं चुनावों के मद्देनजर सरकार ने जीएसटी करों को सस्ता करने और कारोबारियों की नाराजगी दूर करने का प्रयास किया है।

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