तुष्टिकरण नहीं, सशक्तीकरण

तुष्टिकरण नहीं, सशक्तीकरण

नरेन्द्र मोदी सरकार ने इस वर्ष से हज यात्रा पर जाने वाले मुस्लिम जनों को दी जाने वाली सब्सिडी को खत्म कर दिया है। हालांकि इस फैसले पर कुछ राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है और कुछ आगे भी हो सकती है, लेकिन ऐसा करना यानी व्यर्थ की बयानबाजी करना उचित नहीं माना जा सकता। यह सहायता खत्म करने का फैसला २०१२ में सुप्रीम कोर्ट ने दिया था। अगर कोई भेदभाव की आशंका भी करे तो यह भी तर्क दिया जा सकता है कि दो जजों की पीठ में एक हिन्दू थे तो दूसरे जज मुसलमान थे। दोनों जजों ने कुरान शरीफ, इस्लामी ग्रंथों व रिवाजों के अध्ययन के आधार पर माना कि हज यात्रा किसी की मदद से करना इस्लाम के खिलाफ है। फैसले के समय देश में यूपीए की सरकार थी और सरकार को दस साल यानी २०२२ तक इसे खत्म करना था, लेकिन मोदी सरकार ने निर्धारित अवधि से चार साल पहले ही सहायता को खत्म कर दिया। इसे लेकर सवाल उठाया जा सकता है कि कहीं यह फैसला सियासी लाभ के लिए तो नहीं किया गया है? क्योंकि आने वाले दिनों में कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस सवाल के कुछ भी मायने हो सकते हैं, लेकिन हज सहायता पर खर्च होने वाले लगभग सात सौ करो़ड रुपये अब मुस्लिम बच्चों की शिक्षा पर खर्च होंगे, ऐसा आश्वासन अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने दिया है। यदि सरकार ऐसा वाकई करती है तो यह काफी सराहनीय कदम होगा। इससे मुस्लिम बच्चों को निश्चित ही आगे ब़ढने का अवसर मिलेगा। नकवी ने यह भी स्पष्ट किया है कि वैसे भी हज की सरकारी सहायता का ज्यादातर फायदा हाजियों की बजाय हवाई कंपनियों व दलालों को मिल रहा था। अरब की एयर लाइंस भी इसका फायदा ले रही थीं। वहीं, हज सब्सिडी के नाम पर मुस्लिमों को वोट बैंक बनाकर न तो उनके उर्दू माध्यम स्कूलों, मदरसों और उर्दू का कोई काम हुआ, न उन्हें मुख्यधारा में रखा गया और न ही रोजगार दिया गया। अब हज सब्सिडी की रकम का उपयोग शिक्षा के क्षेत्र में होगा तो बच्चों व बच्चियों को उसका लाभ मिलेगा। कुल मिलाकर सब्सिडी खत्म करने का फैसला स्वागत योग्य है। पहले हज यात्रा पानी के जहाज से भी होती थी, जो सोलह सौ रुपये तक में हो जाती थी, लेकिन एक समुद्री हादसे के बाद इस यात्रा को बंद कर दिया गया था। इस यात्रा में १५-२० दिन का समय भी लग जाता था लेकिन, अब सरकार ने पानी के जहाज की यात्रा को फिर से शुरू करने की व्यवस्था कर दी है जो कि न केवल सस्ती होगी बल्कि सुरक्षित होगी और २-३ दिन में पूरी हो जाएगी। सरकार ने महिला हज यात्रियों को पुरुषों के साथ यात्रा पर जाने की पाबंदी को भी समाप्त कर दिया है। अब ४५ वर्ष से ऊपर की महिला को तीन-चार के समूह में यात्रा पर जाने की छूट होगी। यह कदम भी स्वागत योग्य है। सरकार के फैसलों से स्पष्ट होता है कि वह तुष्टिकरण की पक्षधर नहीं है, बल्कि उसका जोर सशक्तिकरण की तरफ है।

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