राष्ट्रपति पद की गरिमा

राष्ट्रपति पद की गरिमा

देश में अगले राष्ट्रपति के चयन के लिए तैयारियां शुरु हो गयी हैं। इस संदर्भ में एक तरफ वरिष्ठ नेता और हाल ही में भारतीय जनता पार्टी का दामन थामने वाले एसएम कृष्णा का नाम सामने आ रहा है तो वहीं दूसरी और झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू भी इस दौ़ड में ऩजर आ रही हैं। मुर्मू के आदिवासी होने को उनकी उपलब्धि के रूप में दर्शाया जा रहा है। राष्ट्रपति पद के लिए जिस शख्सियत को चुना जाए उसे देश की जनता का सम्मान हासिल होना चाहिए। उसका सार्वजनिक जीवन बेदा़ग होना चाहिए और साथ ही उसकी बुद्धि और कौशल पर कोई भी ऊँगली न उठा सके। राष्ट्रपति पद के लिए राजनैतिक पार्टियों को जाति, क्षेत्र और धर्म के गणित से नहीं बल्कि उम्मीदवार की काबिलियत पर अधिक ध्यान देना चाहिए। देश के पहले राष्ट्रपति के रूप में देश को डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद जैसा दूरदर्शी नेता मिला। राजेंद्र बाबू के बाद इस कार्यालय का पदभर संभाला सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने जो एक विद्वान थे। आज देश भर में राधाकृष्णन का जन्मदिवस शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।राष्ट्रपति पद की गरिमा पर खरे नहीं उतरने का आरोप जिन राष्ट्रपतियों पर लगा है उनमें राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद का नाम सबसे पहले इसलिए आता है क्योंकि उन्होंने देश के इतिहास का कलंक कहे जाने वाले आपातकाल के आदेश पर दस्तखत किए थे। जिसके बाद देश में आपातकाल लागू कर दिया था। उसके बाद अधिकांश राष्ट्रपति कांग्रेस की वजह से से ही चुने गए थे जिनमंे वीवी गिरी, ज्ञानी जैल सिंह, आर. वेंकटरामण, शंकर दयाल शर्मा शामिल थे। इन सभी नेताओं के कार्यकाल के दौरान देश ने राष्ट्रपति के प्रति अतीत में रहे सम्मान को कम होते देखा। फिर जब देश के राष्ट्रपति के रूप में डॉ. एपीजी अब्दुल कलाम ने शपथ ली तो पुनः देश को एक महान राष्ट्रपति मिला। कलाम साहब की महानता का वर्णन कई जगह पर किया जा चुका है। समूचा देश जानता है कि उन्हें मिसाइल मैन के नाम से भी जाना जाता है। कलाम का चयन सत्तारू़ढ भारतीय जनता पार्टी द्वारा किया गया था और उस समय विपक्ष में बैठी कांग्रेस ने भी उनके नामांकन का समर्थन किया था। इसी बीच कांग्रेस सत्ता में आई और फिर प्रतिभा पाटिल को राष्ट्रपति बनाया गया। प्रतिभा सिंह पाटिल ने राष्ट्रपति के रूप में कोई ख़ास पहचान नहीं छो़डी बल्कि उनके कार्यकाल पर कई सवाल भी उठे। उनकी विदेश यात्रों पर खर्च हुई राशि चर्चा में रही। प्रतिभा पाटिल के बाद देश के राष्ट्रपति बने प्रणब मुख़र्जी जो छह दशकों तक सार्वजनिक जीवन में रहे और उनकी उपलब्धियों की सूची काफी लम्बी और उनकी छवि एक वरिष्ठ और ईमानदार नेता की रही थी। प्रणब मुख़र्जी ने राष्ट्रपति पद की गरिमा का सम्मान बरकरार रखा है और वे एक अच्छे राष्ट्रपति साबित हुए हैं। अब उनके बाद जिन लोगों को राजनैतिक दल राष्ट्रपति बनाने के लिए नामांकित करते हैं उनके व्यक्तित्व और साथ ही सार्वजनिक जीवन को परख कर ही उनका चयन किया जाना चाहिए और न की उनके धर्म या उनकी जाति के आधार पर। राष्ट्रपति का पद गरिमामय और पूर्ण जबावदारी का है ऐसे में देश का राष्ट्रपति एक मजबूत नेता होना चाहिए जो किसी आवश्यक घ़डी में देश का नेतृत्व सफलता के साथ कर सके।

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