राजनीती के तरीके

राजनीती के तरीके

पिछले ३ दिनों से मध्य प्रदेश में किसानों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया है ऐसे में कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने मंदसौर जाकर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की कोशिश की जिसके बाद पुलिस की कार्यवाही में बाधा डालने के लिए राहुल को हिरासत में ले लिया गया। ऐसी ही घटना कुछ दिनों पहले सहारनपुर में भी हुई थी जहाँ पर भी वे प्रशासन द्वारा लगाई गयी रोक के बावजूद मौके पर पहुंचने के लिए काफी उत्सुक ऩजर आ रहे थे। मंदसौर में जिस तरह से राहुल गाँधी ने गा़डी से उतरकर पुलिस अधिकारी से हाथापाई की थी उससे उनकी नादानी का परिचय मिलता है। वे कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेता है और उन्हें ऐसे मामलों में संयम बरतना चाहिए। राहुल ने अतीत में भी कई बार तनाव ग्रस्त इलाकों में पहुँचकर प्रशासन को ललकारा है। देश के अधिकांश नेता किसी भी घटना का राजनैतिक फायदा उठाने की मंशा रखते हैं परंतु हिंसा या तनावग्रस्त क्षेत्रों में प्रशासन द्वारा मना किए जाने के बावजूद भी घटनास्थल पर पहुंचने के लिए उत्सुक नेताओं में सभी दलों के अनेक अग्रणी नेता ऐसा ही करते हैं। नेता अपने विपक्षी दल को निशाना बनाने के लिए ही ऐसी घटनाओं का फायदा उठाते हैं। पीि़डतों को समर्थन देने के लिए जब भी कोई नेता तनावग्रस्त क्षेत्र में पहुँचता है तो पीि़डतों को न्याय दिलाने से ज्यादा अपने दौरे को अधिक से अधिक प्रचार दिलाने की कोशिश जरुर करता है। स्थानीय नेताओं को अपने क्षेत्र की जनता के नफा नुकसान का ध्यान रखना चाहिए और साथ ही पार्टी के शीर्ष नेताओं तक क्षेत्र की जनता की आवा़ज पहुंचनी चाहिए। जिस तरह से मंदसौर में हिंसा फैली है उससे सा़फ है कि राज्य के नेताओं सहित भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय सदस्यों को भी इस समस्या की गंभीरता का ज्ञात नहीं था। ऐसे में जिस तरह से राज्य सरकार ने लापरवाही दिखाई है और घटना उग्र हो गई उससे पता चलता है कि क्षेत्रीय नेता भी अपने क्षेत्रों की समस्याओं को भांप न सके। विपक्ष को अपनी राजनीति करने का भरपूर मौका मिला। भाजपा ने विपक्ष पर तनाव ब़ढाने के आरोप तो लगाए परंतु ऐसा करके वह अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकती है। पिछले कुछ अरसे से विपक्षी दलों के समक्ष ठोस मुद्दे की कमी की वजह से वे ऐसे अवसर तलाशते हैं जिससे भाजपा और उसके नेताओं को कटघरे में ख़डा किया जा सके। भाजपा शासित प्रदेशों में किसी भी मामले को राजनैतिक मुद्दा बनाने के लिए विपक्षी दल उत्सुक रहते हैं। ऐसे में भाजपा को भी यह ध्यान रखना चाहिए कि क्षेत्र में किसी भी समस्या को इतना नहीं ब़ढने दिया जाए की बाद में उसे संभालने में परेशानी हो। साथ ही देश के सभी नेताओं को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी घटना या हिंसा के पीि़डतों को राहत दिए जाने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। राजनेताओं को राजनीति करने के तरीके बखूबी आते हैं और उन्हें यह भी पता है कि ऐसे हिंसक आंदोलनों को तूल देने के बदले उनके पास विकास और प्रशासन की लापरवाही के अनेक मुद्दे हैं जिनके ईद-गिर्द वे अपनी राजनीति कर सकते हैं। ऐसे में संवेदनशील मामलों को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने से राजनेताओं को बचना चाहिए। सकारात्मक राजनीति का सहारा लेने से राजनीति का स्तर भी ब़ढता है और साथ ही देश को भी मजबूती मिलती है।

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