एसआरएमआईएसटी ने पीएचडी कार्यक्रम की पेशकश के लिए रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए

एसआरएमआईएसटी ने पीएचडी कार्यक्रम की पेशकश के लिए रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए

इसका प्राथमिक उद्देश्य एसआरएमआईएसटी द्वारा डीएसएससी में संकाय के रूप में तैनात सशस्त्र बलों के अधिकारियों के लिए माइग्रेशन सुविधाएं प्रदान करना है


चेन्नई/दक्षिण भारत। एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एसआरएमआईएसटी), कट्टनकुलथुर ने रक्षा मंत्रालय के एक सशस्त्र बल प्रशिक्षण संस्थान रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज (डीएसएससी), वेलिंगटन के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इसका प्राथमिक उद्देश्य एसआरएमआईएसटी द्वारा डीएसएससी में संकाय के रूप में तैनात सशस्त्र बलों के अधिकारियों के लिए माइग्रेशन सुविधाएं प्रदान करना है ताकि वे रक्षा और रणनीतिक अध्ययन, आपदा प्रबंधन, संचार, अर्थशास्त्र, अंतरराष्ट्रीय संबंध, लॉजिस्टिक्स, साइबर युद्ध, इलेक्ट्रॉनिक्स, हथियार प्रौद्योगिकी और रक्षा बजटिंग जैसे कार्यक्रमों में पीएचडी की ओर अग्रसर हो सकें।

इस अवसर पर डीएसएससी की ओर से कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल एस मोहन मौजूद थे। एसआरएमआईएसटी का प्रतिनिधित्व कुलपति सी मुथामिझचेलवन और रजिस्ट्रार एस पोन्नूसामी ने किया।

ले. जनरल एस मोहन ने कहा, यह अपनी तरह का पहला प्रयास है, क्योंकि डीएसएससी एक निजी कॉलेज के साथ एमओयू कर रहा है। इसके जरिए हम अपने अधिकारियों को एसआरएमआईएसटी में पीएचडी करवाएंगे। हम संस्थान के साथ अधिक शैक्षणिक अवसरों की तलाश कर रहे हैं।

इस एमओयू के बारे में बताते हुए मुथामिझचेलवन ने कहा, हमने एआरटीएआरसी के साथ आउट-बोर्डेड कैडेटों के लिए राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं ताकि अधिकारी कोई भी मास्टर या डॉक्टरेट कार्यक्रम कर सकें। इसके माध्यम से, डीएसएससी के अधिकारी यहां पेश किए जाने वाले मास्टर्स और पीएचडी कार्यक्रम कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि एसआरएमआईएसटी ने भारतीय नौसेना में सेवारत रक्षा कर्मियों के बच्चों के लिए 5 सीटें आरक्षित की हैं। एसआरएमआईएसटी रक्षा व रणनीति अध्ययन और आपदा प्रबंधन में भी प्रोग्राम उपलब्ध कराता है।

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