बंगाल में मतगणना: तृणकां को उच्चतम न्यायालय से लगा झटका, क्या बोली भाजपा?
4 मई को होगी मतगणना
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कोलकाता/दक्षिण भारत। भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित मालवीय ने शनिवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में वोटों की गिनती के लिए केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तैनाती पर चुनाव आयोग के आदेश में दखल देने से उच्चतम न्यायालय का इनकार, चुनावी प्रक्रिया पर शक पैदा करने की कोशिशों के खिलाफ एक 'साफ़ संदेश' है।
उच्चतम न्यायालय ने शनिवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में वोटों की गिनती के लिए केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तैनाती से जुड़े चुनाव आयोग के एक सर्कुलर के खिलाफ तृणकां की याचिका को कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा खारिज किए जाने को चुनौती देने वाली तृणकां की अर्जी पर अब और किसी आदेश की ज़रूरत नहीं है।भाजपा नेता ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, 'एक और कानूनी झटके में, उच्चतम न्यायालय ने दखल देने से इन्कार कर दिया है। तृणमूल कांग्रेस ने राज्य सरकार के कर्मचारियों को वोटों की गिनती की निगरानी की ड्यूटी से बाहर रखे जाने को चुनौती देते हुए न्यायालय का रुख किया था और तत्काल सुनवाई की मांग की थी।'
उन्होंने कहा, 'इस याचिका को स्वीकार करने से इन्कार एक साफ़ संदेश देता है- गिनती की प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित करने या उस पर संदेह पैदा करने की कोशिशों को आसानी से मान्यता नहीं मिलेगी। एक और दिन, ममता बनर्जी के लिए एक और न्यायिक झटका।'
मालवीय की टिप्पणियों पर तृणकां की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की एक विशेष पीठ ने कहा कि चुनाव आयोग मतगणना कर्मियों का चयन कर सकता है और उसके 13 अप्रैल के सर्कुलर को गलत नहीं कहा जा सकता।
चुनाव आयोग ने कहा कि सर्कुलर में यह बात बिल्कुल साफ़ है कि इसमें केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों का मिला-जुला रूप होगा और तृणमूल कांग्रेस की किसी भी गड़बड़ी की आशंका बेबुनियाद है।
आयोग ने न्यायालय को आश्वासन दिया कि सर्कुलर को पूरी तरह से लागू किया जाएगा।


