आत्मनिर्भरता का व्यापक संदेश
भारत के पास ऊर्जा के अनेक स्रोत हैं
देश भविष्य में नए कीर्तिमान बनाकर दुनिया को अचंभित कर सकता है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम की 133वीं कड़ी में भारत की शक्ति एवं सामर्थ्य का उल्लेख कर आत्मनिर्भरता का संदेश दिया है। देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पहले, वैज्ञानिक दृष्टि से आत्मनिर्भर बनाना होगा। यह सुखद है कि भारत के वैज्ञानिकों ने सिविल परमाणु कार्यक्रम में बहुत उन्नति की है। इसका लाभ हर क्षेत्र को मिल रहा है। तमिलनाडु के कलपक्कम में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर द्वारा क्रिटिकलिटी हासिल किए जाने की घटना देश की बहुत बड़ी उपलब्धि है। यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है, क्योंकि परमाणु रिएक्टर को बनाने में स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। पूर्व में जब भारत ने अपना परमाणु कार्यक्रम शुरू किया था, तब पश्चिमी देश इसे संदेह की दृष्टि से देखते थे। उन्होंने देश पर कई प्रतिबंध लगाकर शांतिपूर्ण कार्यक्रम के रास्ते में बाधा पैदा करने की कोशिश की थी। आज भारत अपने वैज्ञानिकों के ज्ञान और दृढ़ निश्चय के बल पर उस मुकाम तक पहुंच गया है, जहां परमाणु संयंत्र ऊर्जा के उत्पादन के साथ भविष्य के लिए नया ईंधन खुद ही तैयार कर लेगा। भारत के पास ऊर्जा के अनेक स्रोत हैं। उनका विवेकपूर्वक इस्तेमाल करने की जरूरत है। पवन ऊर्जा के क्षेत्र में बढ़ते कदम इस बात के साक्षी हैं कि देश भविष्य में नए कीर्तिमान बनाकर दुनिया को अचंभित कर सकता है। देश की पवन ऊर्जा उत्पादन क्षमता 56 गीगावाट का आंकड़ा पार कर चुकी है। हमें और आगे बढ़ना है। गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, राजस्थान समेत कई राज्य इस क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। जिन इलाकों में पवन ऊर्जा उत्पादन की अच्छी संभावनाएं हैं, उन्हें चिह्नित कर इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
बांस को पेड़ की श्रेणी से बाहर किए जाने के सुखद परिणाम दिखाई देने लगे हैं। उत्तर-पूर्व के राज्यों में बांस बहुत उगता है। साल 2017 में कानून में बदलाव किए जाने के बाद वहां बांस आधारित उद्योग-धंधों को काफी बढ़ावा मिला है। यह एक अद्भुत पौधा है, जिसमें अपार संभावनाएं छिपी हैं। इससे कुर्सी, मेज, बेड, सोफा, अलमारी, सजावटी सामान, टोकरी, ट्रे, डिब्बे, फूलदान, बांसुरी समेत दर्जनों चीजें बनाई जा सकती हैं। यह पौधा पर्यावरण और हमारी सेहत, दोनों के लिए बहुत फायदेमंद है। हाल के वर्षों में बांस की बोतल बहुत लोकप्रिय हुई है। इसके पानी में विभिन्न औषधीय गुणों का समावेश हो जाता है। अगर युवाओं को बांस की बोतल और बर्तन बनाने का प्रशिक्षण दिया जाए तो उनके लिए रोजगार के कई अवसर पैदा हो सकते हैं। पिछले कुछ दशकों में प्लास्टिक की वजह से पर्यावरण के लिए कई चुनौतियां पैदा हो गई हैं। उनके मद्देनजर बांस एक मजबूत विकल्प बन सकता है। भारत के पास खान-पान संबंधी चीजों का अपार भंडार है। यहां दूध से बनने वाली 'चीज़' का स्वाद दुनियाभर में मशहूर हो रहा है। प्रधानमंत्री ने 'मन की बात' में कई किस्म की चीज़ का उल्लेख कर इस बात पर प्रकाश डाला है कि भारत का डेयरी क्षेत्र स्वादिष्ट और गुणवत्तापूर्ण उत्पादों से मालामाल है। जम्मू-कश्मीर की कलारी चीज़ और सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश एवं लद्दाख की छुरपी को हर घर में पहुंचाना चाहिए। भारतीय कंपनियों को इस क्षेत्र में निवेश करना चाहिए। जो विदेशी पर्यटक यहां आएं, उनके सामने उस इलाके में बनने वाली चीज़ पेश करनी चाहिए। इससे काफी प्रचार हो जाएगा और विदेशों में मांग बढ़ेगी। इसके अलावा दूध से बनने वाले कई उत्पाद हैं, जिनका देश-दुनिया में प्रचार होना चाहिए। डेयरी क्षेत्र रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा करने की क्षमता रखता है। हमें इस क्षमता को पहचानने और उसके अनुसार काम करने की जरूरत है।

