परमाणु ऊर्जा, स्वदेशी तकनीक, भगवान बुद्ध के संदेश ... 'मन की बात' में यह बोले प्रधानमंत्री

परमाणु वैज्ञानिकों के योगदान को सराहा

परमाणु ऊर्जा, स्वदेशी तकनीक, भगवान बुद्ध के संदेश ... 'मन की बात' में यह बोले प्रधानमंत्री

Photo: @BJP4India X account

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 'मन की बात' कार्यक्रम में देशवासियों के साथ अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मुझे मार्च 2024 का वह समय याद है, जब मैं कलपक्कम में रिएक्टर की कोर लोडिंग का साक्षी बना था। मैं उन सभी को बधाई देता हूं, जिन्होंने भारत के परमाणु कार्यक्रम में अपना अमूल्य योगदान दिया है। देशवासियों का जीवन बेहतर और आसान बनाने के लिए उनका यह प्रयास बहुत ही सराहनीय है।

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प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे परमाणु वैज्ञानिकों ने एक बड़ी उपलब्धि से भारत का गौरव बढ़ाया है। तमिलनाडु के कलपक्कम में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकलिटी हासिल कर ली है। भारत की परमाणु ऊर्जा यात्रा में यह एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है और बड़ी बात यह भी कि परमाणु रिएक्टर पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से निर्मित है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने हाल ही में पवन ऊर्जा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अब भारत की पवन ऊर्जा उत्पादन क्षमता 56 गीगावाट से अधिक हो चुकी है। पिछले एक साल में ही करीब 6 गीगावाट नई क्षमता जुड़ी है। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के विकास के लिए सौर और पवन ऊर्जा जरूरी हैं। यह सिर्फ पर्यावरण की बात नहीं है। यह हमारे भविष्य की सुरक्षा है। इसमें हम सबकी भूमिका है। हमें बिजली बचानी है, हमें स्वच्छ ऊर्जा, स्वच्छ ऊर्जा अपनानी है। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान गौतम बुद्ध का जीवन संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने हमें सिखाया कि शांति हमारे भीतर से शुरू होती है। उन्होंने बताया कि स्वयं पर विजय सबसे बड़ी विजय होती है। आज दुनिया जिस तरह के तनावों और संघर्षों से गुजर रही है। ऐसे समय में बुद्ध के विचार और भी अहम हो गए हैं। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि दक्षिण अमेरिका के चिली में एक संस्था भगवान बुद्ध के विचारों को आगे बढ़ा रही है। लद्दाख में जन्मे द्रुबपोन ओत्ज़र रिनपोछे के मार्गदर्शन में काम हो रहा है। यह संस्था ध्यान और करुणा को लोगों के जीवन से जोड़ रही है। कोचीगुआज घाटी में बना स्तूप लोगों को शांति का अनुभव कराता है। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि बरसात खत्म होते ही कच्छ के रण की धरती जीवंत हो जाती है। हर साल लाखों फ्लेमिंगो यहां आते हैं। पूरा इलाका गुलाबी रंग से रंग जाता है, इसलिए इसे 'फ्लेमिंगो सिटी' कहा जाता है। ये पक्षी यहीं घोसलें बनाते हैं और अपने बच्चों को बड़ा करते हैं। कच्छ के लोग इन्हें 'लाखाजी के बाराती' कहते हैं। अब लाखाजी के ये बाराती कच्छ में पर्यावरण संरक्षण के बड़े सुंदर प्रतीक बन गए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि साल 2017 में कानून में बदलाव करके हमने बांस को पेड़ की श्रेणी से बाहर किया, जिसके नतीजे सबके सामने हैं। आज पूरे पूर्वोत्तर में बांस सेक्टर फल-फूल रहा है। लोग लगातार इनोवेशन करके इसमें वैल्यू एडिशन कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ दिन पहले ही भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार ने एक विशेष पोर्टल पर एक अनोखा डेटाबेस साझा किया है। इस संस्था ने 20 करोड़ से भी ज्यादा अमूल्य दस्तावेजों को डिजिटाइज कर सार्वजनिक किया है। इनमें से कुछ तो बहुत ही दिलचस्प हैं। 7वीं शताब्दी की गिलगित पांडुलिपियां भोजपत्र पर लिखी हुई हैं। यहां आपको 8वीं शताब्दी का एक रोचक ग्रंथ श्री भुवालय भी देखने को मिलेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस महीने की शुरुआत में फ्रांस के बौर्डिओक्स में यूरोपीय बालिका गणित ओलंपियाड का आयोजन हुआ था। गणित में गहरी रुचि रखने वाली स्कूली छात्राओं के लिए यह एक बड़ी प्रतियोगिता थी। यह दुनिया की सबसे सम्मानित प्रतियोगिताओं में से एक है। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे देश में इस समय एक बहुत अहम जनगणना का अभियान चल रहा है। यह दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना है। जनगणना 2027 को डिजिटल बनाया गया है। सारी जानकारी सीधे डिजिटल माध्यम में दर्ज हो रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ दिन पहले मैंने ट्वीट के माध्यम से एक जानकारी साझा की थी। ब्राजील में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय चीज़ प्रतियोगिता में भारतीय चीज़ के दो ब्रांड्स को प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले हैं। इस उपलब्धि की चर्चा सोशल मीडिया पर भी खूब हुई। कई लोगों ने मुझसे कहा कि भारत में चीज़ की जो विविधता है, उस पर भी बात होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ ही दिन बाद 9 मई को 'पोच्चीशे बोइशाख' के अवसर पर हम गुरुदेव टैगोर की जयंती मनाएंगे। गुरुदेव बहु-आयामी व्यक्तित्व के धनी थे। वे एक महान लेखक और विचारक तो थे ही, उन्होंने कई प्रसिद्ध संस्थानों को भी आकार दिया।

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