गोबर-गोमूत्र का उपहास क्यों?

गोबर में लक्ष्मी का वास होता है

गोबर-गोमूत्र का उपहास क्यों?

आयुर्वेद विशेषज्ञ मानते हैं कि गोमूत्र में कई रोगनिवारक गुण होते हैं

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने एक कार्यक्रम में गोमूत्र के बारे में जो टिप्पणी की, उसमें सत्य नहीं, बल्कि उसका उपहास झलकता है। गोबर और गोमूत्र के बारे में अक्सर ऐसी टिप्पणियां सुनने को मिलती हैं, जिनमें इनके लिए घृणा की अभिव्यक्ति होती है। क्या ये इतनी बुरी चीजें हैं? आजादी के बाद पश्चिम के अंधानुकरण को ही विकास समझ लिया गया था। ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की गई कि हमारे पास जो कुछ है, वह कचरा है। असल ज्ञान तो पश्चिम के पास ही है! इसी क्रम में गोबर के बारे में दुष्प्रचार किया गया। जिसे मूर्ख साबित करना होता है, उसके बारे में कहा जाता है, 'तुम्हारे दिमाग में तो ... भरा है।' कुछ कंपनियों के प्रतिनिधियों ने किसानों के बीच जाकर गोबर को पिछड़ेपन का प्रतीक बताया और खेती में रासायनिक खादों एवं कीटनाशकों के उपयोग से होने वाले कथित फायदे बताए। इन पर किसानों ने मोटी रकम खर्च की, आज भी कर रहे हैं। इससे किसानों को कितना फायदा हुआ, यह शोध का विषय हो सकता है। हां, उन कंपनियों को खूब फायदा हुआ। अब इसके दुष्परिणाम भी दिखाई दे रहे हैं। कई रिपोर्टें आ चुकी हैं, जिनमें बताया गया है कि रासायनिक खाद और कीटनाशक हमारी सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो रहे हैं। जहां इनका बहुत ज्यादा उपयोग हो रहा है, वहां कम उम्र में ही लोगों को कैंसर, अल्सर, अपच, डायबिटीज जैसी बीमारियां हो रही हैं। जब तक खेतों में गोबर और गोमूत्र की खाद डाली गई, उपज का स्वाद अच्छा रहा। बहुत लोग इस बात से सहमत होंगे कि पहले गेहूं, चावल, दालों और सब्जियों का जो स्वाद था, उसमें अब बदलाव आ गया है। आप बाज़ार से आलू, मटर जैसी सब्जियां लेकर आएं; साथ ही, अपने घर में कहीं गोबर की खाद से ये सब्जियां उगाकर खाएं। दोनों सब्जियों के स्वाद में अंतर जरूर होगा।

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गोबर में लक्ष्मी का वास होता है। ये शब्द पढ़कर कुछ लोगों को हंसी आ सकती है, लेकिन यह बहुत गहरी बात है। घर में गोबर के लिए गाय का होना जरूरी है। जिस घर में गाय होती है, उसे शुद्ध दूध, दही और घी की प्राप्ति होती है। खेत को शुद्ध एवं सात्विक खाद मिलती है। इससे समृद्धि आती है। गाय उस परिवार के सदस्यों को किसी-न-किसी रूप में व्यस्त रखती है तथा अन्य लोगों के लिए रोजगार के अवसरों का सृजन करती है। गाय के बछड़े बड़े होकर बैल बनते हैं। वे किसान के सच्चे साथी होते हैं। जब एक किसान बैलगाड़ी और हल बनवाता है तो कम-से-कम पांच लोगों को रोजगार मिलता है। जिस घर में गाय और बैल होते हैं, वहां लोगों को सुबह जल्दी उठना होता है। उनकी दिनचर्या प्रकृति के अनुकूल रहती है। उन्हें अलार्म लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। कई बुजुर्ग किसान यह स्वीकार करते हैं कि जब तक गाय और बैल हमारे घरों में थे, इतनी बेरोजगारी नहीं थी, लड़ाई-झगड़े कम होते थे। जिस दिन खूंटा खाली हुआ, लोगों की दिनचर्या बिगड़ गई। अब वे देर रात तक मोबाइल फोन चलाते हैं। सोशल मीडिया पर जरा-सी बात पर झगड़े हो जाते हैं। आक, धतूरा, नीम और एलोवेरा के साथ गोमूत्र मिलाकर बहुत अच्छा कीटनाशक बनाया जा सकता है। यह दुर्भाग्य का विषय है कि जो चीजें प्रकृति ने हमारे देश को भरपूर मात्रा में दी हैं, ज्यादातर लोगों को उनकी खूबियों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। वरिष्ठ राजनेता गोमूत्र के बारे में हल्की टिप्पणी कर रहे हैं। इससे लोगों में क्या संदेश जाएगा? क्या ऐसी टिप्पणी एक विशेष विचारधारा को ताकत नहीं देगी, जो हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति पर हमला करने का मौका ढूंढ़ती रहती है? आयुर्वेद विशेषज्ञ मानते हैं कि गोमूत्र में कई रोगनिवारक गुण होते हैं। उनके पास इसके प्रमाण हैं। किसी व्यक्ति की मर्जी है कि वह इन पर विश्वास करे या न करे, लेकिन जब वह व्यक्ति उच्च शिक्षित हो, वरिष्ठ राजनेता हो और उसके साथ बहुत लोगों की उम्मीदें जुड़ी हों, तो उसे ऐसे विषय पर पर्याप्त अध्ययन करने के बाद ही टिप्पणी करनी चाहिए।

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