क्या है 'नौकरी के बदले जमीन' मामला, जिसमें लालू, राबड़ी और तेजस्वी को मिली जमानत?

विशेष न्यायाधीश ने आरोपियों को उनके खिलाफ जारी समन के अनुपालन में अदालत में पेश होने के बाद यह राहत दी

क्या है 'नौकरी के बदले जमीन' मामला, जिसमें लालू, राबड़ी और तेजस्वी को मिली जमानत?

सीबीआई ने आरोपियों की ओर से पेश हुए वकील मनिंदर सिंह द्वारा दायर आवेदन का विरोध नहीं किया

नई दिल्ली/भाषा। दिल्ली की एक अदालत ने रेलवे में नौकरी के बदले कथित जमीन घोटाला मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे एवं बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को बुधवार को जमानत दे दी।

विशेष न्यायाधीश गीतांजलि गोयल ने आरोपियों को उनके खिलाफ जारी समन के अनुपालन में अदालत में पेश होने के बाद यह राहत दी।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने आरोपियों की ओर से पेश हुए वकील मनिंदर सिंह द्वारा दायर आवेदन का विरोध नहीं किया।

न्यायाधीश ने कहा कि जांच के दौरान आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया था और उन्हें 50-50 हजार रुपए की जमानत राशि जमा करने का निर्देश दिया।

केंद्रीय जांच एजेंसी को आरोप पत्र एवं आरोपियों से संबंधित अन्य दस्तावेजों की प्रतियां जमा करने का भी निर्देश दिया गया।

अदालत ने 22 सितंबर को लालू, राबड़ी, तेजस्वी और अन्य आरोपियों के खिलाफ दायर आरोपपत्र का संज्ञान लेने के बाद उन्हें तलब किया था और कहा था कि साक्ष्य ‘प्रथम दृष्टया’ भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी सहित विभिन्न अपराधों को अंजाम दिए जाने की तरफ इशारा करते हैं।

सीबीआई ने कथित घोटाले के संबंध में तीन जुलाई को आरोप पत्र दायर किया था।

यह जांच एजेंसी द्वारा मामले में दायर किया गया दूसरा आरोप पत्र था। हालांकि, यह पहला आरोप पत्र था, जिसमें तेजस्वी यादव को आरोपी के रूप में नामित किया गया था।

लालू नौकरी के बदले कथित जमीन घोटाला मामले के साथ-साथ चारा घोटाला से जुड़े मामलों में भी जमानत पर बाहर हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, यह मामला 2004 से 2009 तक रेल मंत्री के रूप में लालू प्रसाद के कार्यकाल के दौरान मध्य प्रदेश के जबलपुर में रेलवे के पश्चिम-मध्य क्षेत्र में ग्रुप-डी नियुक्तियों से संबंधित है, जिसके बदले में आवेदकों ने राजद सुप्रीमो के परिजन या सहयोगियों के नाम पर कथित तौ पर भूमि उपहार में दी थी या हस्तांतरित की थी।

जांच एजेंसी ने 18 मई 2022 को लालू, उनकी पत्नी, दो बेटियों और अज्ञात लोक सेवकों व निजी व्यक्तियों सहित 15 अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

सीबीआई ने पिछले साल अक्टूबर में लालू, राबड़ी और अन्य के खिलाफ मामले में पहला आरोप पत्र दायर किया था। यह रेलवे के मुंबई मुख्यालय वाले सेंट्रल जोन में की गई नियुक्तियों से संबंधित था।

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