ईरानी सेना ने इज़राइली हवाई सहायता केंद्रों और मोसाद के महत्त्वपूर्ण उपकरणों पर हमला किया
हार नहीं मान रहा ईरान
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तेहरान/दक्षिण भारत। ईरानी सेना ने एक बयान में घोषणा की है कि उसने इजराइली शासन के हवाई सहायता केंद्रों, ड्रोन उत्पादन उद्योगों और मोसाद के आवश्यक उपकरणों पर ड्रोन हमले किए हैं।
एक बयान में, ईरान की सेना ने कहा कि उसने राफेल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़ के सैन्य और हथियार प्रौद्योगिकी विकास केंद्रों पर तथा बेन गुरियन एयर बेस पर इज़राइली शासन के लड़ाकू विमानों के उड़ान और सहायता सुविधाओं पर ड्रोन हमले किए।ईरानी सेना ने बताया कि इज़राइली शासन पर किए गए इन ड्रोन हमलों में, एफ-15 और एफ-16 लड़ाकू विमानों के रखरखाव केंद्रों को और साथ ही 'इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़' को निशाना बनाया गया। आईएआई, हेरोन और हेरोप जैसे उन्नत ड्रोनों के विकास केंद्र और उपकरण प्रदाता के रूप में कार्य करता है। इसके अलावा, यह हॉरिजन सीरीज के टोही उपग्रहों और मोसाद तथा शबक के लिए आवश्यक उपकरणों की आपूर्ति भी करता है।
बयान में बताया गया कि राफेल के हथियार उद्योगों को भी सेना के ड्रोन हमलों का निशाना बनाया गया। ये उद्योग इज़राइली शासन के लिए महंगी हवाई रक्षा तकनीकें — जैसे कि 'आयरन डोम', 'डेविड्स स्लिंग', और दुश्मन के विमानों के लिए इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियां व अवरोधक — विकसित करने के लिए ज़िम्मेदार हैं।
बेन गुरियन एयर बेस और राफेल इंस्टीट्यूट के भीतर अलग-अलग जगहों पर मौजूद लक्ष्यों की विविधता, और सैकड़ों महत्त्वपूर्ण तथा आसानी से पहुंच योग्य लक्ष्यों ने बार-बार ड्रोन हमले होने की आशंका पैदा कर दी है। ईरानी सेना ने कहा कि ये हमले तब तक जारी रहेंगे, जब तक इन बेस की आक्रामक गतिविधियां पूरी तरह से बंद नहीं हो जातीं।
बयान में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि दुश्मन के रणनीतिक ठिकानों, सुविधाओं और उपकरणों को गंभीर नुकसान पहुंचने के बावजूद, इज़राइली शासन ने व्यापक सेंसरशिप के ज़रिए ईरान के सशस्त्र बलों द्वारा पहुंचाए गए नुकसान की व्यापकता को सामने आने से रोक दिया है।


