मोदी ने साधा कांग्रेस पर निशाना- निराशा में डूबे कुछ लोग देश की प्रगति स्वीकार नहीं कर पा रहे

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब दिया

मोदी ने साधा कांग्रेस पर निशाना- निराशा में डूबे कुछ लोग देश की प्रगति स्वीकार नहीं कर पा रहे

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2004 से 2014 आजादी के इतिहास में घोटाले का दशक रहा

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कांग्रेस पर खूब निशाना भी साधा। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस बार मैं धन्यवाद के साथ-साथ राष्ट्रपतिजी का अभिनंदन भी करना चाहता हूं। गणतंत्र के मुखिया के रूप में उनकी उपस्थिति ऐतिहासिक तो है ही, देश की कोटि-कोटि बेटियों के लिए यह बहुत बड़ा प्रेरणा का अवसर भी है।

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प्रधानमंत्री ने कहा कि यहां चर्चा में हर किसी ने अपने-अपने आकड़े और तर्क दिए। अपनी रुचि, प्रवृत्ति और प्रकृति के अनुसार अपनी बातें रखीं और जब इन बातों को समझने का प्रयास करते हैं तो यह भी ध्यान में आता है कि किसकी कितनी क्षमता, योग्यता और इरादा है। देश इन सभी का मूल्यांकन करता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ लोगों के भाषण के बाद पूरा ईकोसिस्टम, समर्थक ... उछल रहे थे। और खुश होकर कहने लगे, यह हुई न बात! शायद नींद भी अच्छी आई होगी, शायद आज उठ भी नहीं पाए होंगे। ऐसे लोगों के लिए कहा गया है ... अच्छे ढंग से कहा गया है ...

ये कह-कह कर हम दिल को बहला रहे हैं,
वो अब चल चुके हैं, वो अब आ रहे है ...

जनजातीय समुदाय के प्रति नफरत भी दिखाई दी है और हमारे जनजातीय समाज के प्रति उनकी सोच क्या है, लेकिन जब इस प्रकार की बातें टीवी के सामने कही गईं तो भीतर पड़ा हुआ जो नफरत का भाव था, वो सच बाहर आ ही गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति का भाषण हो रहा था तो कुछ लोग कन्नी भी काट गए। एक बड़े नेता महामहिम राष्ट्रपति का अपमान भी कर चुके हैं। राष्ट्रपति ने अपने भाषण में कहा था, जो भारत अपनी अधिकांश समस्याओं के लिए दूसरों पर निर्भर था, वो आज दुनिया की समस्याओं के समाधान का माध्यम बन रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब राष्ट्रपति के भाषण पर चर्चा सुन रहा था, तो मुझे लगा कि बहुत—सी बातों को मौन रहकर स्वीकार किया गया है। यानी, राष्ट्रपति के भाषण के प्रति किसी को ऐतराज नहीं है।

राष्ट्रपति ने यह भी कहा था कि देश की एक बड़ी आबादी ने जिन सुविधाओं के लिए दशकों तक इंतजार किया, वे इन वर्षों में उसे मिलीं। देश सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार की समस्याओं से मुक्ति चाहता था, वो मुक्ति उसे अब मिल रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सदन में हंसी-मजाक, टीका-टिप्पणी, नोंक-झोंक होती रहती है, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आज राष्ट्र के रूप में गौरवपूर्ण अवसर हमारे सामने खड़े हैं। गौरव के क्षण हम जी रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 100 साल में आई हुई यह भयंकर महामारी, दूसरी तरफ युद्ध की स्थिति, बंटा हुआ विश्व ... इस स्थिति में भी, संकट के माहौल में, देश जिस प्रकार से संभला है, इससे पूरा देश आत्मविश्वास और गौरव से भर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के तमाम देशों व हमारे पड़ोस में जिस तरह के हालात हैं, ऐसे समय में कौन हिंदुस्तानी गौरव नहीं करेगा कि उनका देश दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था है! आज पूरे विश्व में भारत को लेकर सकारात्मकता है।

यह देश के लिए गर्व की बात है, 140 करोड़ देशवासियों को गर्व हो रहा है, लेकिन मुझे लगता है कि शायद इससे भी कुछ लोगों को दुख हो रहा है। वे लोग आत्म निरीक्षण करें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया की हर विश्वसनीय संस्था, हर विशेषज्ञ, जो भविष्य का अच्छे से अनुमान भी लगा सकते हैं, उन सबको आज भारत को लेकर बहुत आशा और काफी हद तक उमंग है। इसका कारण है कि भारत में अस्थिरता नहीं है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि महामारी के दौर में हमने 150 से ज्यादा देशों को संकट के समय दवाई और वैक्सीन पहुंचाई। यही कारण है कि आज कई देश वैश्विक मंचों पर खुले मन से, भारत का धन्यवाद देते हैं, भारत का गौरवगान करते हैं।

कोरोनाकाल में बहुत से देश अपने नागरिकों की आर्थिक मदद करना चाहते थे, लेकिन असमर्थ थे। यह भारत है, यहां फ्रैक्शन ऑफ सेकंड में लाखों-करोड़ों रुपए देशवासियों के खातों में जमा कर रहा था। एक समय देश छोटी-छोटी तकनीक के लिए तरसता था। आज देश तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में नई संभावनाएं हैं। कोरोनाकाल ने पूरी दुनिया की आपूर्ति चेन को हिलाकर रख दिया। आज भारत उस कमी को पूरा करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है। कई लोगों को यह बात समझने में काफी देर हो जाएगी। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर रहा है। दुनिया भारत की इस समृद्धि में अपनी समृद्धि देख रही है। निराशा में डूबे हुए कुछ लोग इस देश की प्रगति को स्वीकार ही नहीं कर पा रहे हैं। पिछले 9 वर्ष में भारत में 90 हजार स्टार्टअप्स आए हैं। हम दुनिया में इस मामले में तीसरे नंबर पर पहुंच गए हैं। हमारा स्टार्टअप ईकोसिस्टम देश के टियर-टू, टियर थ्री शहरों में पहुंचा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्पोर्ट्स में कभी हमारी कोई पूछ नहीं थी, आज हर स्तर पर भारत के खिलाड़ी अपना सामर्थ्य दिखा रहे हैं। आज मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में भारत दूसरा बड़ा देश बन गया है। आज डोमेस्टिक एयर ट्रैफिक में हम विश्व में तीसरे नंबर पर हैं। आज एनर्जी उपभोग में भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर है। अक्षय ऊर्जा क्षमता में चौथे नंबर पर पहुंचे हैं।

प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों के समय भी ये घोटालों में फंसे रहे। इन्होंने मौके को मुसीबत में पलट दिया। उन 10 सालों में भारत की आवाज वैश्विक मंचों पर इतनी कमजोर थी कि दुनिया सुनने को तैयार नहीं थी। संप्रग की पहचान यह थी कि इन्होंने हर मौके को मुसीबत में पलट दिया। तकनीक के समय ये 2जी घोटाले में फंसे रहे और सिविल न्यूक्लियर डील के समय ये 'कैश फॉर वोट' में फंसे रहे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2004 से 2014 आजादी के इतिहास में घोटाले का दशक रहा। दस साल भारत के हर कोने में आतंकवादी हमलों का सिलसिला चलता रहा। हर नागरिक असुरक्षित था। दस साल में कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर तक देश हिंसा का शिकार था। 

इनके पास आतंकवाद पर सीना तानकर हमले करने का सामर्थ नहीं था और 10 साल तक मेरे देश के लोगों का खून बहता रहा। साल 2014 से पहले के दशक को लोस्ट डिकेड के नाम से जाना जाएगा और 2030 का दशक अब इंडियन डिकेड के नाम से जाना जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में हर स्तर, हर क्षेत्र में, हर सोच में आशा ही आशा नजर आ रही है। सपने और संकल्प लेकर चलने वाला देश है। लेकिन कुछ लोग ऐसे निराशा में डूबे हुए हैं कि क्या कहें...।

काका हाथरसी ने कहा था-

आगा-पीछा देख कर, क्यों होते गमगीन
जैसी जिसकी भावना वैसा दिखे सीन।

इन्होंने 9 साल आलोचना करने की जगह आरोप में गंवा दिए। चुनाव हार जाओ तो ईवीएम को गाली, चुनाव आयोग को गाली ... कोर्ट में फैसला पक्ष में नहीं आया तो सुप्रीम कोर्ट की आलोचना, भ्रष्टाचार की जांच हो रही हो तो जांच एजेंसियों को गाली, सेना अपना पराक्रम दिखाए तो सेना को गाली ... सेना पर आरोप।

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