सांगानेर में भाजपा ने तोड़ा चक्रव्यूह, घनश्याम तिवाड़ी सहित 27 की जमानत जब्त

सांगानेर में भाजपा ने तोड़ा चक्रव्यूह, घनश्याम तिवाड़ी सहित 27 की जमानत जब्त

पुष्पेंद्र भारद्वाज, अशोक लाहोटी और घनश्याम तिवाड़ी

जयपुर। राजस्थान में राजधानी की सांगानेर की सीट पर इस बार मुकाबला बेहद कड़ा और त्रिकोणीय माना जा रहा था। जब चुनाव नतीजे आए तो ये कयास गलत साबित हुए। साल 2013 में यहां से भाजपा के टिकट पर जीते घनश्याम तिवाड़ी ने इस बार बगावत कर खुद की भारत वाहिनी पार्टी बनाई और चुनाव लड़े। घनश्याम तिवाड़ी तीसरे स्थान पर आए हैं और उनकी जमानत जब्त हो गई। सांगानेर में पांच ​साल बाद यह जनादेश राजनीति के धुरंधरों को हैरान कर सकता है।

पिछली बार तिवाड़ी ने सर्वाधिक वोटों के साथ विधानसभा चुनाव जीता था। इस बार पासा ऐसा पलटा कि वे टक्कर में नहीं आए। उन्हें 17,371 वोटों से संतोष करना पड़ा, जो यहां हुए कुल मतदान का सिर्फ 8.35 प्रतिशत है। सांगानेर से भाजपा के अशोक लाहोटी ने 107,947 वोट हासिल किए। दूसरे स्थान पर रहे कांग्रेस के पुष्पेंद्र भारद्वाज को 72,542 वोट मिले। तिवाड़ी और लाहोटी के मुकाबले पुष्पेंद्र का राजनीतिक अनुभव कम था। हालांकि वे क्षेत्र में काफी सक्रिय रहे थे।

सांगानेर में पोस्टल वोट पाने में पुष्पेंद्र अव्वल रहे। उन्हें 625 मतदाताओं ने चुना। जबकि लाहोटी को 400 और तिवाड़ी को 129 वोट मिले। इस विधानसभा क्षेत्र में 2,325 मतदाता ऐसे थे जिन्हें कोई प्रत्याशी पसंद नहीं आया और उन्होंने नोटा का विकल्प चुना। सांगानेर से कुल 29 प्रत्याशी मैदान में थे और उनमें से 27 की जमानत जब्त हो गई। सिर्फ अशोक लाहोटी और पुष्पेंद्र भारद्वाज इससे अलग रहे, बाकी कोई प्रत्याशी अपनी जमानत नहीं बचा पाया।

आखिर सांगानेर की जनता ने तिवाड़ी के बजाय लाहोटी पर भरोसा क्यों किया? क्या जनता ने तिवाड़ी को हराने का मन बन लिया था? सांगानेर सीट के समीकरण कुछ और ही कहानी बयान करते हैं। ब्राह्मण समाज से आने वाले घनश्याम तिवाड़ी छह बार विधायक और दो बार मंत्री रहे हैं। वसुंधरा राजे से अनबन के बाद उन्होंने भाजपा छोड़कर भारत वाहिनी पार्टी बना ली थी। उन्होंने कई मंचों से भाजपा सरकार के खिलाफ खूब बयान दिए। हालांकि इसका उन्हें कोई सियासी फायदा नहीं मिला।

ये चुनाव नतीजे बताते हैं कि अभी सांगानेर में भाजपा की पकड़ मजबूत है। पिछली बार जब तिवाड़ी भारी विजय के साथ विधानसभा पहुंचने में सफल रहे तो उसके पीछे संगठन की अहम भूमिका थी। इस बार उन्हें संगठन का फायदा नहीं मिल पाया और उनकी जमानत तक जब्त हो गई। चुनाव नतीजे आने तक ये कयास लगाए जा रहे थे कि घनश्याम तिवाड़ी इस बार भी काफी तादाद में वोट खींचने में कामयाब होंगे और कांग्रेस-भाजपा के लिए मुकाबला मुश्किल बना देंगे। जब ईवीएम खुली तो मालूम हुआ ​कि जनता ने सभी समीकरण उलट-पलट कर दिए हैं।

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