नीतीश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दिया

नीतीश 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे

नीतीश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दिया

Photo: jduonline FB Page

पटना/दक्षिण भारत/भाषा। राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने यह जानकारी दी है।

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इससे पहले, खबर आई थी कि नीतीश कुमार सोमवार को राज्य विधान परिषद (एमएलसी) की सदस्यता से इस्तीफा देंगे। जनता दल (यूनाइटेड) सूत्रों ने यह जानकारी दी थी।

जद (यू) राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार 16 मार्च को संसद के उच्च सदन के लिए निर्वाचित हुए थे और पार्टी सूत्रों के अनुसार एमएलसी की सदस्यता छोड़ने के लिए निर्धारित 14 दिन की अवधि सोमवार को समाप्त हो रही है।

जद (यू) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने पिछले सप्ताह यहां संवाददाताओं से कहा था, 'संविधान में यह प्रावधान है कि 14 दिन के भीतर इस्तीफा देना चाहिए। उसी के अनुसार चीजें होंगी।'

हालांकि, झा ने इस सवाल को टाल दिया कि 75 वर्षीय जद (यू) प्रमुख मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा कब देने जा रहे हैं।

जद (यू) नेता एवं विधायक अनंत कुमार सिंह ने मीडिया से कहा कि मुख्यमंत्री सोमवार को एमएलसी पद से इस्तीफा सौंपेंगे। सिंह ने रविवार को नीतीश कुमार से मुलाकात की थी।

नितिन नवीन की भावुक अपील

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को बिहार विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने से पहले विधानसभा क्षेत्र की जनता से भावुक अपील की। दो सप्ताह पहले राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए नवीन ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘आज मैं बिहार विधानसभा के बांकीपुर निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित सदस्य पद से इस्तीफा दे रहा हूं।’

उन्होंने लिखा, ‘जनवरी 2006 में पिताजी के आकस्मिक निधन के बाद पार्टी ने मुझे पटना पश्चिम से उपचुनाव लड़ने का अवसर दिया और 27 अप्रैल, 2006 को पहली बार पटना पश्चिम क्षेत्र से निर्वाचित होकर मैंने सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन की शुरुआत की।’

उन्होंने कहा, ‘पिछले 20 वर्षों में पिताजी दिवंगत नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा द्वारा बनाए गए इस क्षेत्र को पारिवारिक भाव से सींचने, संवारने और विकास के पटल पर आगे ले जाने का निरंतर प्रयास किया है।’

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा, ‘मैंने सदैव अपने क्षेत्र और बिहार के विकास के लिए समर्पित भाव से कार्य किया। इसी का प्रतिफल है कि यहां की देवतुल्य जनता ने मुझे लगातार पांच बार सदन में अपना प्रतिनिधि चुनकर सेवा का सौभाग्य प्रदान किया। सदन के अंदर हो या सदन के बाहर, दोनों ही स्थानों का उपयोग मैंने अपने क्षेत्र और बिहार की जनता की आवाज उठाने और उनकी समस्याओं के समाधान का मार्ग निकालने के लिए किया।’

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