शार्टकट रास्ते से पुरस्कार पाने के इच्छुक रहें सावधान

फर्जी "कर्नाटक पुरस्कार-2026" के संबंध में जनता को किया जागरूक

शार्टकट रास्ते से पुरस्कार पाने के इच्छुक रहें सावधान

लोकभवन ने पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के दिए निर्देश

बेगलूरु। इन दिनों “कर्नाटक अवार्ड्स-2026” नामक एक पुरस्कार के संबंध में जनता के बीच विभिन्न माध्यमों से प्रचार किया जा रहा है और कथित अवार्ड पाने के इच्छुक लोगों को आमंत्रित किया जा रहा है । यह भी जानकारी मिली है कि यह अवार्ड देने के बदले अभ्यर्थियों से धन वसूली की जा रही है। मज़े की बात यह कि इस अवॉर्ड प्रदान करने के कार्यक्रम में कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गेहलोत की उपस्थिति का ज़िक्र किया गया है जबकि लोकभवन की एक विज्ञप्ति के अनुसार राज्यपाल को इस अवार्ड वितरण के संबंध में न तो कोई जानकारी है और न ही उनसे किसी प्रकार की अनुमति ली गई है।

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 विज्ञप्ति में स्पष्ट कहा गया है कि यह निमंत्रण फर्जी और अनधिकृत हैं और माननीय राज्यपाल या लोक भवन की जानकारी या सहमति के बिना प्रसारित किए गए हैं। लोक भवन ने "कर्नाटक पुरस्कार-2026" नामक किसी भी कार्यक्रम का समर्थन नहीं किया है और न ही उससे कोई संबंध रखता है। हमें यह भी पता चला है कि कुछ व्यक्ति जनता से संपर्क कर पुरस्कार देने का वादा करके पैसे भी वसूल रहे हैं। इस संबंध में बेगलूरु के विधान सौधा पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज कराई गई है और एफआईआर दर्ज करने सहित आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है।”

लोकभवन के पत्र अनुसार जनता को सतर्क रहने और इस तरह के फर्जी संदेशों का जवाब न देने की सलाह दी गई है। राज्यपाल के विशेष सचिव आर. प्रभुशंकर ने एक बयान में कहा कि यदि ऐसे कोई मामले सामने आते हैं, और किसी से पुरस्कार के संबंध में संपर्क किया जाता है तो उसकी सूचना पुलिस को दी जा सकती है।

दरअसल दक्षिण भारत राष्ट्रमत पूर्व में भी ऐसे पुरस्कार बांटने वालों से जनता को समय समय पर जागरूक करता रहा है लेकिन जो लोग पुरस्कार पाने का शार्टकट ढूंढते रहते हैं वैसे लोग या तो सब कुछ जानते हुए भी ऐसी कथित फर्जी संस्थाओं से कुछ हजार या लाख रुपये देकर पुरस्कार लेने के लिए आगे आते हैं या कुछ लोग बड़े बड़े विशिष्ट अतिथियों के नाम देखकर पुरस्कार को महत्वपूर्ण मानते हुए पुरस्कार पाने को लालायित हो जाते हैं और इसके लिए मोटी राशि देने को भी तैयार हो जाते हैं। लोकभवन द्वारा जागरूक करने के बावजूद यदि लोग ऐसी संस्थाओं के चक्कर में पड़ते हैं और लालचवश ऐसा पुरस्कार पाने की लाइन में लगते हैं तो यह उनके विवेक पर निर्भर है।

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