वायरल होने की सनक

वे न तो स्थान देखते हैं, न समय देखते हैं

वायरल होने की सनक

बस, मोबाइल फोन निकालकर शुरू हो जाते हैं

भारत में कई लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो पोस्ट करने के लिए ऐसी हरकतें कर रहे हैं, जो किसी की जान पर भारी पड़ सकती हैं। ऐसे भी मामले आए हैं, जब वीडियो बनाने की कोशिश में वे खुद मुसीबत में पड़ गए या दूसरों को असुविधा हुई। बेंगलूरु में एक परिवार के सदस्य तो बुजुर्ग व्यक्ति को बोरे में डालकर कूरियर सेवा के दफ्तर पहुंच गए। वे त्योहारी सीजन में बस किराए का मुद्दा उठाने के लिए वीडियो बना रहे थे। बुजुर्ग व्यक्ति को बोरे में डालने से सांस लेने में दिक्कत हुई। अगर बोरा कुछ समय और बंद रह जाता तो गंभीर समस्या खड़ी हो सकती थी। पुलिस ने उन लोगों को चेतावनी दी है। सोशल मीडिया पर वायरल होने के लोभ में कोई व्यक्ति कब उल्टी-सीधी हरकत कर दे, कुछ कहा नहीं जा सकता। ऐसे लोगों में यह धारणा जड़ जमाती जा रही है कि 'हमें एक बार वायरल होना है, उसके बाद तो आगे बढ़ने के रास्ते अपनेआप खुलते जाएंगे।' इसके लिए वे न तो स्थान देखते हैं, न समय देखते हैं। बस, मोबाइल फोन निकालकर शुरू हो जाते हैं। हाल में दिल्ली मेट्रो में बैठी एक महिला यात्री अचानक जोर-जोर से हंसने लगी और अजीब हरकतें करने लगी। उसे देखकर कई यात्री घबरा गए। बाद में पता चला कि वह तो वीडियो बना रही थी। इन लोगों पर वायरल होने की सनक इस कदर सवार है कि ये अंजाम की भी परवाह नहीं करते। कुछ दिन पहले एक वीडियो देखने को मिला था, जिनमें युवक-युवती ने एक फिल्म से प्रेरित होकर ज्यादा गोलगप्पे खाने की शर्त लगाई थी। उन्होंने वीडियो बनाते हुए एक-दूसरे को पछाड़ने की कोशिश में इतने गोलगप्पे खा लिए कि तबीयत खराब हो गई।

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कई लोग बाइक चलाते हुए स्टंट करते हैं। साथ ही, वीडियो बनाते हैं। उन्हें लगता है कि 'अगर हम ऐसा करेंगे तो बहुत निडर और बलवान कहलाएंगे, लोग हमारी चर्चा करेंगे, हम फिल्मी हीरो समझे जाएंगे।' हालांकि यह कोरा भ्रम है। ऐसे लोगों की न तो कोई वाहवाही करता है, न वे हीरो कहलाते हैं। अक्सर खबरें आती हैं कि स्टंट करते हुए वीडियो बनाने वाले युवक दुर्घटना के शिकार हो गए। किसी का सिर फूटता है, कोई गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में भर्ती होता है तो कोई अपनी जान से ही हाथ धो बैठता है। ऐसे स्टंटबाज दूसरों की जान भी जोखिम में डालते हैं। कई लोगों को हथियारों के साथ वीडियो बनाने या सेल्फी लेने का बड़ा शौक होता है। वे हथियारों का प्रदर्शन कर यह संदेश देना चाहते हैं कि 'देखिए, हम इतने शक्तिशाली हैं।' हाल के वर्षों में ऐसी कई खबरें पढ़ने को मिलीं, जब किसी ने पिस्टल के साथ सेल्फी लेने की कोशिश में खुद को लहूलुहान कर लिया या जान गंवा दी। दरअसल भूलवश, मोबाइल फोन के बटन के साथ पिस्टल का ट्रिगर दब जाता है, जिसके बाद पछतावा ही बाकी रहता है। ट्रेन की पटरियों के पास अक्सर लोग सेल्फी लेते, वीडियो बनाते दिख जाते हैं। कुछ लोग नियमों की परवाह न करते हुए पटरियों के बीच में खड़े हो जाते हैं। वे फिल्मी गानों पर नृत्य करते हैं, वीडियो बनाते हैं। हमारा देश बहुत बड़ा है। यहां नृत्य करने के लिए लाखों सुरक्षित स्थान हैं। फिर भी ये लोग नाचने के लिए पटरियों की ओर क्यों दौड़ते हैं? क्या इससे वे माइकल जैक्सन बन जाएंगे? पटरियां ट्रेनों के आवागमन के लिए हैं। इन पर सेल्फी लेना, वीडियो बनाना, कोई खुराफात करना बहुत खतरनाक हो सकता है। ऐसी गतिविधियों से दूर रहें। अगर सोशल मीडिया के लिए वीडियो बनाना चाहते हैं तो खुद की और दूसरों की सुरक्षा का ध्यान रखें। ज्ञानवर्द्धक, शिक्षाप्रद और उपयोगी विषयों पर वीडियो बनाएं।

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