खाटू नगरी पर आईएसआई की कुदृष्टि!

आईएसआई को भारत में अमन-चैन बिल्कुल नहीं सुहाता

खाटू नगरी पर आईएसआई की कुदृष्टि!

क्या आईएसआई यहां दहशत फैलाना चाहती है?

गाजियाबाद पुलिस ने पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में कई लोगों को गिरफ्तार कर एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। आरोपियों के मोबाइल फोन से खाटू श्यामजी मंदिर की लोकेशन, फोटो समेत कई धार्मिक स्थलों की जानकारी मिलना इस मामले को और गंभीर बनाता है। पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई को भारत में अमन-चैन बिल्कुल नहीं सुहाता है। वह पहले भी कई मंदिरों को निशाना बनाने की कोशिश कर चुकी है। अब खाटू नगरी पर उसकी कुदृष्टि है! यहां स्थित श्याम मंदिर में रोजाना ही भारी भीड़ रहती है। एकादशी और फाल्गुन मेले पर तो लाखों भक्त श्याम प्रभु के दरबार में शीश झुकाते हैं। क्या आईएसआई यहां दहशत फैलाना चाहती है? क्या मुनीर-मलिक (पाकिस्तानी सेना प्रमुख व आईएसआई प्रमुख) की शैतानी जोड़ी हिंदुस्तान का सद्भाव बिगाड़ना चाहती है? क्या पहलगाम हमले के लगभग एक साल बाद किसी और वारदात को अंजाम देने की तैयारी थी? पाकिस्तान के हुक्मरानों की इन्हीं हरकतों ने उनके हाथ में भीख का कटोरा थमा दिया। इनके पास अपनी भूखी-प्यासी जनता की भलाई के लिए पैसे नहीं हैं, लेकिन ये कर्ज लेकर भी जासूसी कराते हैं और आतंकवाद फैलाते हैं। मुनीर-मलिक कान खोलकर सुन लें, यह हिंदुस्तान की धरती है, जहां करोड़ों श्यामभक्त रहते हैं। ये न किसी की धमकी से डरते हैं, न किसी की दहशत से झुकते हैं। मुनीर-मलिक को महाभारत का अध्ययन करना चाहिए। करोड़ों श्यामभक्त उस महावीर की पूजा करते हैं, जिसने शीश का दान किया था। साहस, शक्ति और बलिदान इनकी भक्ति के अनिवार्य अंग हैं। पाकिस्तानी हुक्मरान भाड़े के जासूस और हनीट्रैप गिरोह चलाकर किसे चुनौती देने निकले हैं?

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इतिहास साक्षी है, ऐसे कुत्सित प्रयास करने वालों का एक दिन नाश होता ही है। ये न तो अपने लोगों का भला कर सकते हैं, न कोई उपलब्धि प्राप्त कर सकते हैं। इनका काम वैसा ही है, जैसे प्राचीन काल में कई राक्षस यज्ञ में विघ्न डालने आते थे। वे इसी बात से खुश हो जाते थे कि 'आज तो हमने यज्ञ कुंड में हड्डियां डालकर ऋषियों को परेशान कर दिया।' जब उन दुष्टों के पाप का घड़ा भर गया तो भगवान ने उनको दंड दिया। युग बदल गया, लेकिन उनकी आदत नहीं बदली। आज मुनीर-मलिक वैसा ही कुकृत्य कर रहे हैं। कठोर दंड पाने की तीव्र इच्छा उन्हें ऐसा करने के लिए विवश कर रही है। खाटू श्यामजी वह क्षेत्र है, जो अपनी शांति और सद्भाव के लिए जाना जाता है। यहां देशभर से भक्त आते हैं। फाल्गुन मेला, जो हाल में संपन्न हुआ है, में हर साल लाखों की भीड़ उमड़ती है। उसमें दूर-दूर से श्यामभक्त पैदल ही निशान लेकर आते हैं। यहां सुरक्षा को लेकर कभी समस्या नहीं रही। श्यामभक्तों की ओर से सरकारों से कोई विशेष मांग भी नहीं रही। सारी व्यवस्थाएं जनसहयोग से होती हैं। क्या इस क्षेत्र की शांति आईएसआई को बुरी तरह खटक रही है? केंद्र व राज्य सरकार, पुलिस एवं एजेंसियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। खाटू श्यामजी में सीसीटीवी कैमरों के जरिए संदिग्धों पर कड़ी नजर रखी जाए। खाटू श्यामजी की सीमा में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति का डिजिटल रिकॉर्ड होना चाहिए। इसके लिए आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों की अनिवार्यता पर विचार किया जा सकता है। धर्मशालाओं और होटलों में कमरा देते समय लोगों का सत्यापन होना चाहिए। संदिग्ध वस्तुओं की जांच-पड़ताल के लिए पुलिसकर्मियों के पास अत्याधुनिक यंत्र होने चाहिएं। पुलिस, एजेंसियों, श्यामभक्तों और स्थानीय लोगों में समन्वय होना चाहिए, ताकि कोई व्यक्ति गलत इरादों के साथ यहां आने का दुस्साहस ही न कर पाए।

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