आईआरजीसी ने क्षेत्र में अमेरिका से जुड़ीं तेल सुविधाओं पर जवाबी हमला किया
'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4' की 63वीं लहर पूरी ताकत के साथ चलाई गई
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तेहरान/दक्षिण भारत। इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कहा कि उसने इस क्षेत्र में अमेरिका से जुड़ीं तेल सुविधाओं पर जवाबी हमला किया है।
बता दें कि आईआरजीसी ने एक बयान में घोषणा की कि इस क्षेत्र में अमेरिका से जुड़ीं तेल सुविधाओं के खिलाफ 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4' की 63वीं लहर पूरी ताकत के साथ चलाई गई और इस उपलब्धि को ईरान के दिवंगत खुफिया मंत्री तथा खुफिया समुदाय के अन्य शहीदों को समर्पित किया गया।बयान के अनुसार, आईआरजीसी बलों ने धोखेबाज़ और झूठे दुश्मन को जवाब दिया, जिसने इस्लामिक गणराज्य ईरान की कुछ ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाया था। इसमें कहा गया कि ईरान के खिलाफ़ आक्रामकता का यह शत्रुतापूर्ण कृत्य उन लोगों की आवाज़ दबाने के लिए किया गया था, जो पिछले 16 रातों से हालिया आक्रामकता के खिलाफ़ सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, और ईरानी राष्ट्र से बदला लेने के लिए किया गया था।
बयान में कहा गया है, 'इस्लामी गणतंत्र ईरान का संघर्ष को तेल प्रतिष्ठानों तक ले जाने का कोई इरादा नहीं था, और न ही वह पड़ोसी मित्र देशों की अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान पहुंचाना चाहता था। हालांकि, ऊर्जा बुनियादी ढांचे के खिलाफ दुश्मन की आक्रामकता के बाद, स्थिति प्रभावी रूप से युद्ध के एक नए चरण में प्रवेश कर गई है। ईरान के बुनियादी ढांचे की रक्षा की आवश्यकता ने आईआरजीसी को अमेरिका और अमेरिकी हितधारकों से जुड़े ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के लिए विवश कर दिया है।'
आईआरजीसी ने बताया कि उसकी यह जवाबी कार्रवाई दुश्मन की दुर्भावना के जवाब में की गई थी। साथ ही, उसने यह भी कहा कि इस क्षेत्र में अमेरिका के हितों से जुड़ीं कई तेल सुविधाओं में, ईरान को पहुंचाए गए नुकसान के अनुपात में ही आग लगा दी गई।
आईआरजीसी ने चेतावनी दी कि यदि ऐसी हरकतें दोहराई गईं, तो दुश्मन के ऊर्जा ढांचों और उनके सहयोगियों पर हमले तब तक बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगे, जब तक कि वे पूरी तरह नष्ट न हो जाएं। साथ ही, उसने इस बात पर ज़ोर दिया कि ईरान की जवाबी कार्रवाई बुधवार रात की कार्रवाई से कहीं अधिक गंभीर होगी।


