प. बंगाल में बदलेंगे सियासी समीकरण? हुमायूं कबीर के साथ इस नेता ने की मुलाकात
संभावित गठबंधन को लेकर अटकलें तेज
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कोलकाता/दक्षिण भारत। सीपीआई (एम) की पश्चिम बंगाल इकाई के सचिव मोहम्मद सलीम ने नवगठित जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर के साथ बैठक की। इस बैठक से आगामी विधानसभा चुनावों से पहले दोनों दलों के बीच संभावित गठबंधन को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
सलीम ने कहा कि आगामी चुनावों में सीटों के बंटवारे के प्रस्ताव पर सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे के भीतर चर्चा की जाएगी।उन्होंने कबीर के साथ करीब एक घंटे तक बैठक की। कबीर पूर्व तृणमूल कांग्रेस विधायक हैं, जो हाल में मुर्शिदाबाद ज़िले में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर एक मस्जिद की आधारशिला रखने को लेकर विवादों में आए थे।
सलीम ने कहा, ‘हम इस प्रस्ताव पर वाम मोर्चे में चर्चा करेंगे। उसके बाद मोर्चे से बाहर की वामपंथी पार्टियों के साथ और फिर आईएसएफ के साथ चर्चा करेंगे।’
माकपा के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे ने पश्चिम बंगाल में 2021 का विधानसभा चुनाव इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के साथ गठबंधन में लड़ा था, लेकिन पार्टी चुनाव में अपना खाता भी नहीं खोल सकी।
आईएसएफ नेता नौशाद सिद्दीकी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अलावा एकमात्र विपक्षी विधायक बन गए हैं।
कबीर के साथ अपनी मुलाकात को उनके इरादों को समझने का प्रयास बताते हुए माकपा नेता ने कहा कि कई पार्टियां ऐसी हैं जिन्होंने अब तक विधानसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे की व्यवस्था पर कोई फैसला नहीं लिया है।
गठबंधन की चर्चा से इनकार करते हुए सलीम ने कहा, ‘मैं उनसे जानना चाहता था कि वह क्या करना चाहते हैं और उनका उद्देश्य क्या है।’
तृणमूल कांग्रेस द्वारा निलंबित कबीर ने इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया लेकिन कहा कि विधानसभा चुनाव के लिए संभावित गठबंधन पर चर्चा हुई थी।
अक्सर अपनी बेबाक टिप्पणियों के कारण विवादों में घिरे रहने वाले कबीर ने कहा, ‘मैंने सलीम साहब से आग्रह किया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि गठबंधन गठन की प्रक्रिया 15 फरवरी तक पूरी हो जाए।’


