प्रदूषण पर मंशा बेनकाब

प्रदूषण पर मंशा बेनकाब

दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार प्रदूषण की गंभीर हो चुकी समस्या से सचमुच निपटना चाहती है, या इसके बहाने सियासी फायदा उठाना चाहती है? यह सवाल पहले से मौजूद था। लेकिन राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के निर्णय के बाद जिस तरह उसने आनन-फानन में ऑड-ईवन योजना को वापस ले लिया, उससे संभवतः उसका जवाब भी सामने आ गया है। अब ये साफ है कि इस योजना के जरिए दिल्ली सरकार महज अपनी प्रगतिशील एवं पर्यावरण के प्रति संवेदनशील छवि बनाना चाहती थी। जब उसे महसूस हुआ कि इस पर अमल से उसके वोट बैंक में नाराजगी फैल सकती है तब उसके हाथ-पांव ठंडे प़ड गए्। आम आदमी पार्टी के रणनीतिकार जानते हैं कि कार रखने वालों का ज्यादातर हिस्सा उनकी पार्टी का वोटर नहीं है। इसलिए इस वर्ग के लिए योजना लागू कर केजरीवाल सरकार संदेश देना चाहती थी कि प्रदूषण से निपटने के प्रति वह गंभीर है। लेकिन एनजीटी ने इसे दोपहिया वाहनों पर भी लागू करने का निर्देश दिया, तो केजरीवाल और उनके साथियों ने प्रदूषण की चिंता छो़ड दी। इसके लिए अजीब दलीलें दी गईं्।मसलन, दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि दिल्ली सरकार सोमवार को एनजीटी के पास जाएगी और बताएगी कि दिल्ली की परिवहन व्यवस्था अभी इसके लिए तैयार नहीं है। आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि कहा कि केजरीवाल सरकार महिलाओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं कर सकती। गहलोत से पूछा जाना चाहिए कि बिना तैयारी के इस योजना का ऐलान क्यों हुआ? वहीं, भारद्वाज से सवाल है कि क्या जो महिलाएं मेट्रो या बस जैसे सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करती हैं, वे सुरक्षित नहीं हैं? ऑड-ईवन जैसी योजना में अंतर्निहित है कि निजी वाहनों का उपयोग घटाया जाए और सबको सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए्। इस क्रम में सबको दिक्कत होगी और सबको सुविधा का कुछ त्याग करना होगा। यह ब़डा उद्देश्य और संदेश साथ रखा जाए, तभी ऐसी योजनाओं का कोई मतलब है। वरना सियासी फायदा और छवि निर्माण के अलावा कुछ और हासिल नहीं हो सकता। दुखद है कि केजरीवाल की पार्टी की निगाहें इस संकरे दायरे से नहीं निकल पाई हैं्। पिछले एक हफ़्ते से दिल्ली धूल और धुएं की चपेट में है। इसका एक ब़डा कारण स़डकों पर चलने वाली गाि़डयां हैं्। उनकी संख्या कम करना उचित उद्देश्य है। लेकिन केजरीवाल सरकार की मंशा गलत थी, जो अब बेनकाब हो गई है।

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