केवल लेटर पैड पर चलने वाले लॉ कालेजों को किया जाए बंद

केवल लेटर पैड पर चलने वाले लॉ कालेजों को किया जाए बंद

चेन्नई। मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के बाद ८५ प्रतिशत लॉ कॉलेजों पर ताला लग सकता है। उच्च न्यायालय ने देश में केवल लेटर पैड से संचालित होने वाले लॉ कॉलेजों को बंद करने का आदेश दिया है। यह आदेश कोर्ट ने वकालत की प़ढाई करवा रहे कॉलेज की गुणवत्ता बरकरार रखने के लिए दिया है। इस संबंध में बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष गोपाल सुब्रह्मण्यम ने न्यायालय से कहा कि राज्य में लेटर पैड वाले लॉ कॉलेज ध़डल्ले से चल रहे हैं। यहां वकालत के पेशे में आने वाले नए नौजवानों को इस पेशे की पवित्रता और इसकी महत्ता समझाने की जगह केवल डिग्री दी जा रही है। इससे हजारों की संख्या में युवा स्नातक तो कर रहे हैं लेकिन उनको वकालत के पेशे के बारे में सही जानकारी नहीं मिल रही है। लेटर पैड वाले लॉ कॉलेज को बंद करने का आदेश को देते हुए न्यायमूर्ति एन किरुबाकरण ने कहा कि यह दुखद है कि लोग लॉ की डिग्री खरीद कर इस पेशे से जु़ड रहे हैं।उन्होंने कहा कि हाल में श्रीपेरूम्पुदुर स्थित अनाई मेडिकल कॉलेज में जमीन विवाद को लेकर वकीलों के दो समूहों में संघर्र्ष हुआ था। इस तरह की घटना इस पेशे से जु़डे लोगों को शोभा नहीं देती। उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में कानून की डिग्रियां बेची जा रही हैं। न्यायालय ने कहा कि फर्जी डिग्रियों को खरीदने वाले अदालत में अभ्यास नहीं करते हैं। ऐसे लोग नागरिक विवादों को सुलझाने की आ़ड में ’’कट्टा पंचायत ’’ में शामिल होना पसंद करते हैं। देश में काफी संख्या में ऐसे लॉ कॉलेज चल रहे हैं जहां डिग्री बिक रही है। ज्ञातव्य है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया(बीसीआई) द्वारा वर्ष २०१४ में जारी आंक़डे के अनुसार बीसीआई हर तीसरे दिन बार काउंसलि ऑफ इंडिया एक नए लॉ कॉलेज की अनुमति दे रहा है।

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