ज्ञानवापी मामला: सर्वे रिपोर्ट जमा कराने के लिए 2 दिन का समय मिला, कोर्ट कमिश्नर को हटाया

ज्ञानवापी मामला: सर्वे रिपोर्ट जमा कराने के लिए 2 दिन का समय मिला, कोर्ट कमिश्नर को हटाया

मस्जिद कमेटी की ओर से उच्चतम न्यायालय में दायर की गई याचिका पर भी सुनवाई हुई


वाराणसी/दक्षिण भारत/भाषा। ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे कार्य पूरा होने के बाद मंगलवार को वाराणसी की अदालत में सुनवाई हुई। कोर्ट कमिश्नर ने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें रिपोर्ट जमा करने के लिए दो दिन का वक्त दिया जाए। अदालत ने यह अनुरोध स्वीकार कर लिया है। कोर्ट कमिश्नर अजय मिश्रा को हटाया गया है। वहीं, मस्जिद कमेटी की ओर से उच्चतम न्यायालय में दायर की गई याचिका पर सुनवाई हुई। इसमें मुस्लिम पक्ष ने सर्वे के आदेश को अनुचित साबित करने की दलील दी।

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उच्चतम न्यायालय ने ज्ञानवापी मामले की सुनवाई 19 मई तक के लिए स्थगित कर दी है। इस दौरान न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि हम आदेश जारी करेंगे कि जिला मस्जिट्रेट उस जगह की सुरक्षा करें जहां शिवलिंग मिला है, लेकिन यह लोगों के नमाज अदा करने के रास्ते में नहीं आना चाहिए।

उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि नमाजियों पर रोक लगाना उचित नहीं है। स्थानीय प्रशासन तय करे कि किस तरह इसे संचालित किया जा सकता है।

बता दें कि इससे पहले ख़बर आई थी कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के वीडियोग्राफी-सर्वे कार्य के लिए नियुक्त आयोग इससे जुड़ी रिपोर्ट पेश करने के लिए अदालत से दो-तीन दिन का अतिरिक्त समय मांगेगा। सहायक अधिवक्ता आयुक्त अजय प्रताप सिंह ने यह जानकारी दी थी।

सिंह ने कहा, अदालत के आदेश के अनुसार, 14 से 16 मई के बीच सुबह आठ बजे से दोपहर 12 बजे तक ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का वीडियोग्राफी-सर्वे कार्य किया गया। 17 मई को सर्वे से संबंधित रिपोर्ट अदालत में पेश की जानी थी।

हालांकि, उन्होंने आगे कहा, हम आज (मंगलवार) अदालत में रिपोर्ट नहीं जमा कर रहे हैं, क्योंकि यह तैयार नहीं है। हम अदालत से दो-तीन दिन का अतिरिक्त समय मांगेंगे। अदालत जो भी समय देगी, हम उसमें रिपोर्ट पेश करेंगे।

इससे पहले, हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों ने सोमवार को दावा किया था कि अदालत द्वारा अनिवार्य वीडियोग्राफी-सर्वे कार्य के दौरान मस्जिद परिसर में एक शिवलिंग पाया गया है।

एक स्थानीय अदालत ने सोमवार को हिंदू पक्ष की ओर से दायर अर्जी पर सुनवाई करते हुए ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के उस हिस्से को सील करने का आदेश दिया था, जहां कथित तौर पर शिवलिंग मिलने का दावा किया गया है।

उधर, ज्ञानवापी मस्जिद का प्रबंधन करने वाली कमेटी के एक सदस्य ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा था, मुगल काल की मस्जिदों में वजू खाने के अंदर फव्वारा लगाए जाने की परंपरा रही है। उसी का एक पत्थर आज सर्वे में मिला है, जिसे शिवलिंग बताया जा रहा है।

अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव सैयद मोहम्मद यासीन ने आरोप लगाया था कि सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर द्वारा आदेश जारी करने से पहले मस्जिद प्रबंधन का पक्ष नहीं सुना गया।

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