लालू के जेल जाने के बाद पहली बार तेजस्वी के साथ राजद नेताओं की बैठक

लालू के जेल जाने के बाद पहली बार तेजस्वी के साथ राजद नेताओं की बैठक

पटना। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के चारा घोटाले के एक मामले में जेल जाने के बाद मंगलवार को पहली बार पार्टी के नेताओं की हुई बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती राब़डी देवी के यहां दस सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास पर बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव समेत कई वरिष्ठ नेताओं की लगभग दो घंटे तक हुई बैठक में गहन मंथन किया गया। बैठक में यह तय किया गया कि छह जनवरी को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की फिर से बैठक होगी जिसमें प्रखंड स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर के नेताओं को शामिल होने को कहा गया है। रांची की केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अदालत ने यादव को चारा घोटाले के एक मामले में दोषी करार दिया है और अब तीन जनवरी को उन्हें सजा सुनाई जाएगी। बैठक के बाद प्रतिपक्ष के नेता यादव ने कहा कि राजद के अध्यक्ष लालू यादव के जेल चले जाने से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस गलतफहमी में नहीं रहे कि राजद कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि राजद अध्यक्ष को एक साजिश के तहत चारा घोटाले के मामले में सजा दिलवाकर जेल भिजवाया गया है ताकि उनकी पार्टी कमजोर हो जाए। इस तरह की साजिश से राजद कमजोर होने वाला नहीं है और जो लोग ऐसा सोच रहे हैं वे गलतफहमी के शिकार हैं। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता इस साजिश को समझ रही है और अब वह सामाजिक न्याय के लिए खुद ल़डाई ल़डने को तैयार है।पूर्व उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री कुमार भ्रष्टाचार के प्रति संवेदनशील होने का दावा करते हैं, लेकिन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के पुत्र जय शाह की कंपनी का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में हुए १६ हजार गुणा मुनाफे की बात नहीं करते। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि शायद गुजरात के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में कुमार की मुलाकात शाह से होगी और वह उनके पुत्र को भी इस मामले में जनता के सामने सफाई देने की बात कहेंगे। यादव ने कहा कि राजद अध्यक्ष के जेल जाने पर भले ही मुख्यमंत्री कुमार और भाजपा चैन की सांस ले रही है लेकिन उनका ’’काल’’ जन्म ले लिया है। उन्होंने कहा कि पिछले बिहार विधानसभा के चुनाव में राजद, जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और कांग्रेस से बने महागठबंधन को जनादेश मिला था और भाजपा को करारी हार मिली थी लेकिन मुख्यमंत्री ने पाला बदल कर भाजपा से हाथ मिला लिया जो जनादेश का अपमान है। उन्होंने कहा कि चारा घोटाला वर्ष १९७७ से ही चला आ रहा था जबकि राजद अध्यक्ष यादव वर्ष १९९० में मुख्यमंत्री बने थे। यादव ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने राजद अध्यक्ष को और पूर्व मुख्यमंत्री राब़डी देवी को आय से अधिक संपत्ति के मामले में बरी कर दिया है। उच्चतम न्यायालय ने साफ किया था कि उनलोगों के पास आय से अधिक संपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि यादव के आदेश पर ही चारा घोटाले की जांच शुरु की गई और कई प्राथमिकियां दर्ज हुई थी। इसी मामले में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्रा को बरी कर दिया गया जबकि जांच के आदेश देने वाले यादव को दोषी करार दिया गया।

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