सियासी जमीन खिसकने से चिंता में ममता, ‘मंझधार’ में साथ छोड़ने वालों की करेंगी पहचान
सियासी जमीन खिसकने से चिंता में ममता, ‘मंझधार’ में साथ छोड़ने वालों की करेंगी पहचान
कोलकाता/दक्षिण भारत। पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की सियासी जमीन खिसकने से पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी लगातार समीक्षा कर रही हैं। इस बार भाजपा ने जिस तरह प. बंगाल में बढ़त हासिल की, उसने सबसे ज्यादा तृणमूल कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया। यही वजह है कि पार्टी के खराब प्रदर्शन ने ममता बनर्जी की चिंता बढ़ा दी है।
अगर आंकड़ों पर गौर करें तो भाजपा 129 विधानसभा क्षेत्रों में लीड हासिल करने के बाद तृणमूल के कई किले ढहाने में सफल रही। देशभर में चुनाव नतीजों पर हो रही चर्चा में बंगाल का जिक्र खासतौर से हो रहा है। अब तृणमूल कांग्रेस को दोबारा मजबूत करने के लिए ममता बनर्जी संगठन से जुड़े ऐसे लोगों की पहचान कर रही हैं जिन्होंने ‘मंझधार’ में साथ नहीं दिया।.. तो विधानसभा चुनाव में भाजपा देगी टक्कर
तृणमूल इस बात से भी चिंतित है कि भाजपा जिन 60 विधानसभा क्षेत्रों में हारी है, वहां वोट का अंतर बहुत कम (सिर्फ 4,000 तक) रहा। ऐसे में तय माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में भी भाजपा और तृणमूल कांग्रेस में जोरदार भिड़ंत होगी।
जानकारी के अनुसार, ममता बनर्जी ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को कहा है कि वे ब्लॉक स्तर के उन नेताओं की पहचान करें जिन्होंने भाजपा की ओर तृणमूल और सीपीएम का वोट पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं, तृणमूल के एक आंतरिक सर्वे के आधार पर प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि उसे जंगल महल और उत्तर बंगाल के उन इलाकों से वोट नहीं मिले जहां गरीबी ज्यादा है। इन इलाकों में आदिवासी मतदाता काफी तादाद में है।
कर्मचारियों में नाराजगी
इसके अलावा भाजपा सरकारी कर्मचारियों के वोट में सेंध लगाने में भी सफल रही। राज्य में सातवें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों में तृणमूल सरकार के प्रति नाराजगी दिखी। इनमें से काफी वोट तृणमूल के बजाय भाजपा को चले गए। हालांकि तृणमूल नेता दावा करते हैं कि उनकी पार्टी को शहरी और अर्द्ध शहरी मतदाता का समर्थन कायम रहा है। तृणमूल नेता कहते हैं कि अब ममता बनर्जी संगठन की मजबूती पर ज्यादा ध्यान देंगी।
राष्ट्रवाद का नारा सफल
लोकसभा चुनाव नतीजों की समीक्षा के बाद एक वरिष्ठ नेता ने माना कि भाजपा के ‘राष्ट्रवाद’ का मतदाताओं पर गहरा असर हुआ। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों का असर चुनाव नतीजों में नहीं दिखा, बल्कि जो मतदाता उनके साथ वर्षों से जुड़े थे, वे अचानक ‘देशभक्त’ बन गए और भाजपा को वोट दे दिया।
भाजपा ने बिगाड़े सबके समीकरण
हालांकि अब तृणमूल कांग्रेस अपने विधायकों के साथ ऐसे स्थानीय नेताओं की पहचान में जुटी है जिनकी वजह से मतदाता पार्टी से दूर जा रहे हैं। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है। प. बंगाल में भाजपा की जीत की एक वजह उन नेताओं और मतदाताओं को भी माना जा रहा है जो सीपीएम से जुड़े रहे हैं। इससे भाजपा के वोटों में उछाल आया। तृणमूल नेता आरोप लगाते हैं कि सीपीएम नेता और उनका समर्थक वोटबैंक नहीं चाहता कि ममता बनर्जी केंद्र में प्रभावशाली भूमिका में आएं। लिहाजा उन्होंने भाजपा को मजबूत कर ममता की राह मुश्किल कर दी।
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