राजस्थान: जारी रहेगी सरकार बदलने की परंपरा या फिर खिलेगा मरुधरा में कमल?

राजस्थान: जारी रहेगी सरकार बदलने की परंपरा या फिर खिलेगा मरुधरा में कमल?

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नई दिल्ली/जयपुर। छत्तीसगढ़ से शुरू हुआ पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का सिलसिला शुक्रवार को राजस्थान और तेलंगाना में समाप्त हो गया। इस बार राजस्थान में चुनावी मुकाबला बेहद कड़ा रहा। अब सबको 11 दिसंबर का इंतजार है जब मतगणना होगी। इस बीच अलग-अलग एग्जिट पोल आने शुरू हो गए हैं जो संभावना जता रहे हैं कि इस बार प्रदेश राजस्थान में किसकी सरकार बनने के आसार हैं।

अगर टाइम्स नाउ और सीएनएक्स का एग्जिट पोल देखा जाए तो यहां कांग्रेस को बढ़त मिल रही है। इसके मुताबिक, प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बन सकती है। दूसरे सर्वे भी कांग्रेस की स्थिति मजबूत बता रहे हैं। उनके मुताबिक, प्रदेश में कांग्रेस को बहुमत मिलेगा और वह सरकार बना लेगी।

टाइम्स नाउ और सीएनएक्स का एग्जिट पोल कहता है कि राजस्थान में कांग्रेस को 105 तक सीटें मिल सकती हैं। अगर भाजपा की बात करें तो यहां 85 सीटों पर कमल खिल सकता है। इस सर्वे में भाजपा और कांग्रेस के बीच बहुत ज्यादा अंतर दिखाई नहीं दे रहा। वहीं इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया का एग्जिट पोल भी कांग्रेस की जीत बता रहा है। इसके अनुसार, राजस्थान में कांग्रेस 119-141 सीटें जीत सकती है। इसी एग्जिट पोल में भाजपा के लिए 55 से 72 सीटें बताई जा रही हैं।

इस बार चुनावों में निर्दलीय और अन्य पार्टियों ने भी जीत के खूब दावे किए। ये कितना हकीकत में तब्दील हो पाएंगे, इस पर एग्जिट पोल कहते हैं कि कुछ सीटें इनके खाते में भी जा सकती हैं। टाइम्स नाउ-सीएनएक्स के मुताबिक, अन्य को 9 सीटें मिल सकती हैं। दूसरी ओर इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया का एग्जिट पोल इन्हें 4 से 11 तक सीटें दे रहा है। जन की बात का एग्जिट पोल भाजपा को 83 से 103, कांग्रेस को 81 से 101 सीटें दे रहा है। इसमें अन्य के लिए दूसरे एग्जिट पोल से ज्यादा 15 सीटों का अनुमान लगाया गया है। न्यूज नेशन के एग्जिट पोल के मुताबिक, भाजपा को 89 से 93, कांग्रेस को 99 से 103 और अन्य को 5 से 9 सीटें मिल सकती है।

इस प्रकार प्रदेश में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही रहने के आसार हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 830 उम्मीदवारों ने ​बतौर निर्दलीय पर्चा भरा था। 50 सीटों पर बागियों ने खेल बिगाड़ने की पूरी कोशिश की थी। भाजपा और कांग्रेस नेतृत्व ने यहां चुनाव प्रचार में खूब ताकत झोंकी। कांग्रेस ने अपनी सहयोगी पार्टियों के लिए पांच सीटें छोड़ी थीं। माना जा रहा है कि यह महागठबंधन की दिशा में एक छोटा-सा प्रयोग था, जिसकी ताकत को कांग्रेस परखना चाहती है।

राजस्थान में पिछले दो दशकों में लगातार सरकार बदलने की परंपरा रही है। अगर इस बार कांग्रेस सरकार बना पाई तो प्रदेश में एक बार फिर इसी परंपरा की पुनरावृत्ति हो जाएगी। अगर एग्जिट पोल गलत साबित हुए और भाजपा ने सत्ता में वापसी की तो यकीनन परंपरा टूट जाएगी। चूंकि एग्जिट पोल कई बार खरे साबित नहीं हुए हैं।

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