स्मार्टफोन: विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा दें

लोगों को हमेशा स्मार्टफोन के साथ व्यस्त नहीं रहना चाहिए

स्मार्टफोन: विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा दें

क्या बेटों को भी स्मार्टफोन चलाने से रोकेंगे?

राजस्थान में जालोर जिले के कई गांवों में एक समाज के बड़े-बुजुर्गों द्वारा बहू-बेटियों के स्मार्टफोन इस्तेमाल पर लगाए गए प्रतिबंध की चौतरफा आलोचना हो रही है। यह स्वाभाविक है। इंटरनेट के इस दौर में नारी शक्ति को स्मार्टफोन से दूर करने के कई नुकसान होंगे। हालांकि उक्त फैसले की कोई कानूनी मान्यता नहीं है और इसे वापस भी ले लिया गया है। इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि स्मार्टफोन के आने से जीवन में कई समस्याएं भी आई हैं। यह घरों में कलह की वजह बन रहा है। कई परिवार जो पहले शांति से गुजारा कर रहे थे, वहां स्मार्टफोन आने के बाद अशांति ने बसेरा कर लिया है। अगर इन हालात पर गौर करेंगे तो पाएंगे कि इनके लिए स्मार्टफोन नहीं, बल्कि उसका अविवेकपूर्ण उपयोग जिम्मेदार है। लोगों को हमेशा स्मार्टफोन के साथ व्यस्त नहीं रहना चाहिए। देश-दुनिया में क्या हो रहा है, सोशल मीडिया पर क्या चर्चा में है, ज्वलंत मुद्दे कौनसे हैं - यह जानने के लिए एक घंटा स्मार्टफोन चलाना काफी है। उसके बाद अपने अन्य काम कर सकते हैं। सिर्फ बहू-बेटियों को स्मार्टफोन चलाने से रोकना समस्याएं कम नहीं करेगा। क्या बेटों को भी स्मार्टफोन चलाने से रोकेंगे? कई किशोर और युवा दिनभर फोन चलाते हैं। उन्हें पढ़ाई-लिखाई और कोई जरूरी काम करने के लिए कहें तो वे 'सिर्फ पांच मिनट और' का बहाना बनाते हैं या झगड़ा करने लगते हैं। कई लड़के कुसंगति में पड़ने के कारण स्मार्टफोन पर आपत्तिजनक और अभद्र सामग्री देखते हैं। वे दैनिक बोलचाल में अशालीन शब्दों का प्रयोग करते हैं। वास्तव में, स्मार्टफोन न तो अच्छा है और न ही बुरा है। यह एक उपकरण है। अगर इसका इस्तेमाल अच्छे काम के लिए करेंगे तो अच्छे नतीजे मिलेंगे, अगर बुरे काम के लिए करेंगे तो बुरे नतीजे मिलेंगे।

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आज कई शिक्षक स्मार्टफोन पर पढ़ा रहे हैं। उनसे हजारों बच्चों को गुणवत्तापूर्ण सामग्री मिल रही है। पहले, कोटा, दिल्ली, जयपुर, सीकर जैसे शहरों में कोचिंग करने पर लाखों रुपए खर्च करने पड़ते थे। अब वही सामग्री स्मार्टफोन पर बहुत कम खर्चे पर मिल जाती है। योगाभ्यास में बहुत रुचि रखने वाली एक युवती स्मार्टफोन के जरिए सैकड़ों लोगों को स्वस्थ रहने के तरीके सिखा रही है। इससे उसे आमदनी भी हो रही है। सोचिए, अगर उसके पास स्मार्टफोन नहीं होता तो क्या वह इतना आगे बढ़ पाती? एक छोटे कस्बे में रहने वाली युवती को मेहंदी लगाने में महारत हासिल है। उसने स्मार्टफोन चलाना सीखा और सोशल मीडिया पर अपना अकाउंट बनाया। आज उसके हुनर को कई देशों में सराहा जा रहा है। राजस्थान के गांव में रहने वाली एक महिला को परंपरागत पकवान बनाने बहुत पसंद हैं। पहले, वह अपने परिवार को पकवान बनाकर खिलाती थी। इससे उसे संतुष्टि मिलती थी। जब से उसने स्मार्टफोन लेकर यूट्यूब पर चैनल बनाया है, संतुष्टि के साथ रुपए भी मिलने लगे हैं। जब पहली बार उसके बैंक खाते में रुपए आए तो उसे आश्चर्य हुआ कि उसका हुनर इतना मायने रखता है! इस कमाई से उसके परिवार को बहुत सहारा मिला है। कुछ साल पहले पढ़ाई के लिए अमेरिका गई एक भारतीय युवती ने स्मार्टफोन को अपनी ताकत बनाया। वह उस पर अंग्रेजी के शब्दों की सही जानकारी देती है। इसके अलावा अमेरिका आने पर किन नियमों का ध्यान रखना चाहिए, किन चीजों से बचना चाहिए, कौनसी चीज कहां सस्ती मिलेगी - जैसी बातें बताती है। इससे युवाओं को फायदा हो रहा है। वहीं, उस युवती को अच्छी कमाई हो रही है। ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं, जिनसे पता चलता है कि स्मार्टफोन के सही इस्तेमाल से महिलाओं और उनके परिवारों का जीवन स्तर बेहतर होता है। इस सिलसिले को आगे बढ़ाना चाहिए। इसकी एक मर्यादा जरूर होनी चाहिए। वह सिर्फ महिलाओं के लिए नहीं, सबके लिए होनी चाहिए।

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