शिक्षा के साथ संस्कार भी दें

जब शिक्षा के साथ संस्कार नहीं दिए जाते तो व्यक्ति गुमराह होता है

शिक्षा के साथ संस्कार भी दें

रोजी-रोटी के लिए चरित्र को कलंकित नहीं करना है

देश में गंभीर अपराधों में उच्च शिक्षित लोगों की बढ़ती भूमिका चिंता का विषय है। हाल के वर्षों में ऐसे कई लोग बड़े अपराधों में लिप्त पाए गए हैं, जो या तो उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे थे या उनके पास कोई डिग्री थी। शिक्षा तो बुराइयों से मुक्त करती है। पहले, जब कोई व्यक्ति किसी गंभीर अपराध में लिप्त पाया जाता था तो यह तर्क दिया जाता था कि शिक्षा के अभाव के कारण वह गलत रास्ते पर चला गया। अब देश में शिक्षा का स्तर काफी बेहतर हो गया है। हर हाथ में मोबाइल फोन है, जिस पर दुनियाभर की जानकारी उपलब्ध है, लेकिन अपराध घटने के बजाय बढ़ ही रहे हैं। बल्कि अपराधों के तौर-तरीके बदल रहे हैं। जब शिक्षा के साथ संस्कार नहीं दिए जाते तो व्यक्ति इसी तरह गुमराह होता है। दिल्ली में सिविल सेवा परीक्षा के एक अभ्यर्थी का खौफनाक हत्याकांड रोंगटे खड़े कर देता है। उसकी लिव-इन पार्टनर पर अपराध को अंजाम देने का आरोप है, जो फोरेंसिक विज्ञान की छात्रा है। उसने अपराध करने से पहले अपने ज्ञान का इस्तेमाल किया, कई वेब सीरीज भी देखीं। युवती ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर उक्त हत्याकांड को हादसे की तरह दिखाने की पूरी कोशिश की, लेकिन पुलिस की तफ्तीश में सच सामने आ ही गया। इन युवक-युवती के बारे में एक और बात हैरान करने वाली है। युवती का आरोप है कि युवक के पास उसके निजी वीडियो थे, जिन्हें वह डिलीट नहीं कर रहा था। ध्यान रहे, ये दोनों अभी 'पढ़ाई' कर रहे थे। जो उम्र ज्ञान प्राप्त करने और चरित्र का निर्माण करने की होती है, उसमें ये क्या गुल खिला रहे थे? यह घोर नैतिक पतन है, जिसकी ओर सरकारों, परिवारों और शिक्षकों को ध्यान देना चाहिए।

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शिक्षा का उद्देश्य बेहतर इन्सान बनाना है। अगर किताबें पढ़ने, परीक्षाएं उत्तीर्ण करने, डिग्रियां लेने के बावजूद ऐसे कांड होंगे तो संपूर्ण व्यवस्था पर प्रश्न चिह्न लगना स्वाभाविक है। नोएडा में पुलिस ने एक युवक को डेढ़ करोड़ रुपए मूल्य की चरस के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपी बीसीए उत्तीर्ण है। हाल में झारखंड के एक युवक का ऑडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में रहा था, जो बीटेक उत्तीर्ण कर चुका है और ऑनलाइन ठगी करता है। वह अपने तकनीकी ज्ञान का इस्तेमाल लोगों को धोखा देने के लिए करता है। इसी तरह, दिल्ली का एक युवक बहुत अच्छी अंग्रेजी बोलता है। वह बातचीत करने में महारत रखता है। उसकी विनम्रता देखकर कई लोगों को भ्रम हो सकता है। उस युवक पर सोशल मीडिया पर झूठा प्रोफाइल बनाकर कई युवतियों को शादी का झांसा देने और उनसे लाखों रुपए ठगने का आरोप है। ऐसे अनगिनत उदाहरण मिल जाएंगे, जिनसे एक ही संकेत मिलता है- शिक्षा में संस्कारों को शामिल करने की जरूरत है। विद्यार्थियों को सिखाना होगा कि पढ़ाई-लिखाई सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं है। पेट तो पशु भी भर लेता है। हम इन्सान हैं। हम में नैतिकता, मानवता, दया और करुणा की भावना होनी चाहिए। स्कूली बच्चों को बार-बार इस बात का बोध कराना चाहिए कि आपको दी जा रही शिक्षा सिर्फ रोजगार हासिल करने के लिए नहीं है। आपको चरित्रवान भी बनना है, बुराइयों से दूर रहना है। रोजी-रोटी जीवन की जरूरत है। इसके लिए चरित्र को कलंकित नहीं करना है। अगर मानवता और नैतिकता को गंवाकर कुछ हासिल कर भी लिया तो इसमें बहुत बड़ा नुकसान है। ऐसी सफलता ज्यादा दिनों तक साथ नहीं देगी, बल्कि ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देगी, जहां अंधेरे के अलावा कुछ नजर नहीं आएगा।

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