योगेश्वर श्रीकृष्ण ने अत्याचार और दुराचार के खात्मे का संदेश दिया था

यह योगेश्वर श्रीकृष्ण का 5251वां जन्मोत्सव है

योगेश्वर श्रीकृष्ण ने अत्याचार और दुराचार के खात्मे का संदेश दिया था

योगेश्वर श्री कृष्ण का पूरा जीवन हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है

.. बाल मुकुंद ओझा ..

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हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव 26 अगस्त को देशभर में हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है| यह योगेश्वर श्रीकृष्ण का 5251वां जन्मोत्सव है| योगेश्वर श्रीकृष्ण ने महाभारत में द्रौपदी की इज्जत बचाई थी| आज न जाने कितनी द्रौपदियों की लाज खतरे में पड़ी है| आताताई किसी भी तरह अपने कुकर्मों से बाज नहीं आ रहे है| गीता में श्रीकृष्ण ने यही संदेश दिया था कि अत्याचारी और अन्यायी कितना ही बड़ा और सगा क्यों न हो उसे समाप्त करने में ही समाज और राष्ट्र की भलाई है| आज भी हमारी पावन पवित्र धरा अन्याय और अत्याचार से मुक्त नहीं हुई है| हम ऐसे वातावरण में जन्माष्टमी मनाने जा रहे है जब समाज विषाक्त हो रहा है और जहरीला नाग हमें डसने को बेताब है| भाई भाई का दुश्मन हो रहा है तथा घृणा और नफरत के बीज बोकर हमें बॉंटने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है| ऐसे में श्रीकृष्ण की सीख और आदर्श आज ज्यादा प्रासंगिक हो रहे है| उन्होंने अन्यायियों के सामने न तो खुद घुटने टेके और न दूसरों को टेकने दिए| 

समाज में एकता, बराबरी, प्रेम महोब्बत और भाईचारे की भावना स्थापित करने में श्रीकृष्ण की अहम भूमिका को आज भी सम्पूर्ण संसार स्वीकार करता है| उनकी शिक्षा का यह महत्वपूर्ण और सबसे बड़ा कारक है कि समाज को दुष्ट और राक्षसी प्रवृत्ति के लोगों से मुक्त किया जाये| यदि हमारा एक अंग विकृत हो गया है तो उसे उखाड़ फेंकने में देरी नहीं की जाये| हमारा भाई यदि सदमार्ग से विचलित हो गया है तो पहले समझाइस करों न माने तो बुराई का अंत करो, मगर अन्याय को सहन नहीं करो| श्रीकृष्ण के इन आदर्शों को आत्मसात कर हमें समाज और देश से अन्याय, अत्याचार और दुराचार को समाप्त करने का संकल्प लेना ही होगा तभी बराबरी और सामाजिक सद्भावना का सन्देश जन जन में प्रवाहित होगा|

योगेश्वर श्री कृष्ण का पूरा जीवन हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है| उनके जीवन की हर एक घटना एक महत्वपूर्ण सन्देश देती है, चाहे बचपन की रास लीला हो या गीता का ज्ञान या फिर महाभारत का युद्ध, भगवान श्री कृष्ण के जीवन का हर एक पल मानव जाति के लिए एक शिक्षा है| यह त्योहार श्री कृष्ण के मानव कल्याण के लिए किये गये कार्यों और आदर्शों को समर्पित है| भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण का जन्मदिन देश विदेश में पारम्परिक हर्षोल्लास और धूमधाम से मनाया जाता है| धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक योगेश्वर श्री कृष्ण ने भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अवतार लिया था| इस कारण इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाने लगा| इस त्योहार को भारत में पूरी आस्था, श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाते हैं| इसलिए इस दिन मथुरा में काफी हर्षोउल्लास से जन्माष्टमी मनाई जाती है| 

इस अवसर पर भगवान श्री कृष्ण के मंदिरों को सजाया जाता है और झांकियां के साथ रासलीला का आयोजन भी किया जाता है| मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर भगवान के जन्मोत्सव के विभिन्न कार्यक्रम शनिवार से ही शुरु हो गए जो गुरुवार तक चलेंगे| कृष्ण जन्मभूमि पर देश विदेश से लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है और पूरे दिन व्रत रखकर नर-नारी तथा बच्चे रात्रि १२ बजे मन्दिरों में अभिषेक होने पर पंचामृत ग्रहण कर व्रत खोलते हैं| कृष्ण जन्मभूमि के अलावा द्वारकाधीश, बिहारीजी एवं अन्य सभी मन्दिरों में इसका भव्य आयोजन होता है| कहीं रंगों की होली होती है तो कहीं फूलों और इत्र की सुगंन्ध का उत्सव होता तो कहीं दही हांडी फोड़ने का जोश और कहीं इस मौके पर भगवान कृष्ण के जीवन की मोहक छवियां देखने को मिलती हैं| मंदिरों को विशेष रुप से सजाया जाता है| 

भक्त इस अवसर पर व्रत एवं उपवास का पालन करते हैं इस दिन मंदिरों में झांकियां सजाई जाती हैं भगवान कृष्ण को झूला झुलाया जाता है तथा कृष्ण रासलीलाओं का आयोजन होता है सनातन धर्म को मानने वाले लोग इस दिन श्रद्धा एवं प्रेम से व्रत रखते हैं| घर में साफ-सफाई करके धूप-दीप से सजाते हैं| गांव में लोग कुछ दिन पहले से ही पकवान बनाने प्रारंभ कर देते हैं| मंदिरों को खूब सजाया जाता है| मंदिरों में सारा दिन भजन कीर्तन होता रहता है| भिन्न-भिन्न प्रकार की झांकियां दिखाई जाती हैं| अर्धरात्रि पर चंद्रमा के दर्शन करके सनातनी लोग अपना व्रत समाप्त करते हैं| दूध, फलाहार एवं मिष्ठान लेते हैं| जन्माष्टमी पर कृष्ण मंदिरों में भव्य समारोह किये जाते हैं|

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