पोस्टमार्टम की हो रही थी तैयारी, ‘ज़िंदा’ हो गया शख्स!

पोस्टमार्टम की हो रही थी तैयारी, ‘ज़िंदा’ हो गया शख्स!

पोस्टमार्टम की हो रही थी तैयारी, ‘ज़िंदा’ हो गया शख्स!

प्रतीकात्मक चित्र। फोटो स्रोत: PixaBay

बेंगलूरु/दक्षिण भारत। कर्नाटक के बागलकोट जिले से एक विचित्र घटना सामने आई है। सड़क दुर्घटना के बाद शनिवार को 27 साल के एक व्यक्ति को डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित कर दिया था। लेकिन जब डॉक्टर पोस्टमॉर्टम करने लगे तभी वह जिंदा हो उठा।

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बागलकोट के महालिंगपुर के एक युवक शंकर शंखमुख को सड़क दुर्घटना में सिर पर गंभीर रूप से चोट लगी। उसे तुरंत बेलगावी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया और उसका इलाज किया गया। हालांकि, डॉक्टरों ने कहा कि अगर उसे वेंटिलेटर से बाहर ले जाया गया तो वह जीवित नहीं रहेगा, और सुझाव दिया कि उसे घर ले जाया जाए।

इसके बाद, परिजन उसे रविवार को पोस्टमॉर्टम के लिए महालिंगपुर के सरकारी अस्पताल में ले गए और परिवार ने पहले ही सभी दोस्तों और संबंधियों को सूचना दे दी थी कि वह मर चुका है। डॉ. एसएस गलगली को शंकर के रिश्तेदारों ने पोस्टमॉर्टम करने के लिए बुलाया था। डॉ. गलगली ने कहा कि जब मैं महालिंगपुर पहुंचा, तो मरीज का शरीर अभी तक आया नहीं था। जब मैंने परिवार को फोन किया और पूछा कि क्या शंकर सांस ले रहा है, तो उन्होंने कहा कि वे नहीं जानते। और सांस लेने में मदद करने के लिए अंबु बैग (कृत्रिम श्वसन के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला वाल्व मास्क) का उपयोग कर रहे थे। जब उसे ले जाने वाली एम्बुलेंस पहुंची तो लगभग 2,000 की भीड़ जमा हो गई थी और उन्होंने डॉक्टरों को शंकर के पास जाने भी नहीं दिया।

उन्होंने आगे कहा कि ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर भी शंकर की ठीक से जांच नहीं कर सके और पल्स ऑक्सीमीटर ने कुछ नहीं बताया। यह देखकर बेकाबू भीड़ उसे पोस्टमॉर्टम रूम में ले गई। मैं फिर पोस्टमार्टम रूम में गया। वहां मैंने डॉक्टर से अंबु बैग को हटाने के लिए कहा कि क्या वह मृत है। थोड़ी देर बाद वह अपने आप सांस लेने लगा और उसने अपने हाथ हिलाना शुरू कर दिया। इसके बाद डॉक्टर ने शंकर को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होने के लिए कहा।

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