उद्धव को संतों की नसीहत: ‘दर्शन-पूजन अच्छी बात, पर अयोध्या को न बनाएं सियासत का अखाड़ा’

उद्धव को संतों की नसीहत: ‘दर्शन-पूजन अच्छी बात, पर अयोध्या को न बनाएं सियासत का अखाड़ा’

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे

लखनऊ/दक्षिण भारत। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे रविवार को अयोध्या गए और अपने 18 सांसदों के साथ रामलला के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए आवाज उठाते हुए मोदी सरकार को घेरा। वहीं ठाकरे के दौरे पर संत समाज ने नसीहत दी है कि वे दर्शन-पूजन के उद्देश्य से अयोध्या आएं तो ठीक है, लेकिन इसे सियासत का अखाड़ा न बनाएं।

इस संबंध में हनुमान गढ़ी के महंत राजू दास ने कहा कि उद्धव ठाकरे आए हैं तो अच्छी बात है, उनका स्वागत है। वे एक भक्त बनकर आएं तो अच्छा है। उन्होंने कहा कि रामलला परिसर को राजनीति के अखाड़े से दूर रखना चाहिए। साथ ही अच्छी संख्या में शिवसेना के सांसद जीतकर आने पर कहा कि संसद में इस मुद्दे को उठाना चाहिए।

संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैयादास रामायणी ने कहा कि राम मंदिर के मुद्दे से राजनीति को दूर रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान के दर्शन-पूजन के लिए कोई भी आए, मनाही नहीं है। राम मंदिर निर्माण पर उन्होंने कहा कि अब देरी बर्दाश्त नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि श्रीराम को कांग्रेस ने 35 साल तक जेल में बंद रखा और आज भी उसकी मानसिकता बदली नहीं है। जब राम मंदिर बनेगा, तभी हमें धार्मिक स्वतंत्रता मिलेगी।

वहीं, मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी कमल नयन दास ने देश में चीन की तरह समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कही। उन्होंने कहा कि जो इसे स्वीकार न करे, उसकी नागरिकता समाप्त कर दी जानी चाहिए। उन्होंने रूस के इतिहास का उल्लेख किया और कहा कि उसने इस पर गौर नहीं किया और टुकड़ों में बंट गया। उद्धव ठाकरे के अयोध्या आगमन पर उन्होंने कहा कि रामजी के दर्शन के लिए जो भी भक्त आए, अच्छी बात है।

दूसरी ओर, राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में पक्षकार इकबाल अंसारी ने उद्धव के अयोध्या आगमन को राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि इस मामले में दोनों पक्षों को अदालत के फैसले का इंतजार करना चाहिए। हालांकि सरयू स्नान, हनुमानगढ़ी और रामलला के दर्शन के लिए उन्होंने कहा कि यह अच्छी बात है। अंसारी ने शिवसेना प्रमुख के साथ उनके 18 सांसदों के आगमन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह धर्म का काम नहीं, बल्कि राजनीति है। उन्होंने कहा कि ठाकरे यहां राजनीति न करें तो बेहतर है।

इसके अलावा बाबरी एक्शन कमेटी संयोजक जफरयाब जिलानी ने कहा कि महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होने हैं, लिहाजा ठाकरे यहां आए हैं। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के अध्यक्ष मतीन खान ने सवाल उठाया कि मामला जब उच्चतम न्यायालय में है तो इस पर राजनीति क्यों की जा रही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसी गतिविधियों को रोका जाना चाहिए।

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