.. तो मोदी चलेंगे यह बड़ा दांव और पाक अधिकृत कश्मीर में भी बनेगी भाजपा सरकार!
.. तो मोदी चलेंगे यह बड़ा दांव और पाक अधिकृत कश्मीर में भी बनेगी भाजपा सरकार!
नई दिल्ली/दक्षिण भारत। लोकसभा चुनाव में भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करने वाली भाजपा अब देश के ऐसे हिस्सों में अपना विस्तार करने जा रही है जहां अभी तक उसका खास प्रभाव नहीं था। चूंकि आने वाले समय में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिनमें जम्मू-कश्मीर भी शामिल है। अभी जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन चल रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र और शांति की बहाली के लिए बड़ा दांव चल सकते हैं। इसमें पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) भी शामिल है।
यह पढ़कर आपको भी आश्चर्य हो सकता है, लेकिन केंद्र में मोदी के नेतृत्व में बनने वाली नई सरकार उन लोगों को भी लोकतंत्र में भागीदार बनाएगी जिनका ताल्लुक पीओके से है। एक रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा चुनाव आयोग से आग्रह कर सकती है कि वह पीओके की 24 रिजर्व सीटों में कम से कम आठ पर चुनाव कराए।यूं समझें सीटों का गणित
बता दें कि जम्मू-कश्मीर का पूरा इलाका 111 विधानसभा सीटों में आता है। इनमें से 24 सीटें उस इलाके में हैं जिन पर चीन और पाकिस्तान ने अवैध कब्जा कर रखा है। भारतीय चुनाव आयोग यहां चुनाव नहीं कराता। रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा चीन और पाक अधिकृत क्षेत्र की आठ सीटों पर चुनाव कराने का आग्रह कर सकती है।
ऐसे बढ़ेगी जनता की भागीदारी
पाक अधिकृत कश्मीर के एक तिहाई लोग इस ओर आ चुके हैं। चूंकि पाकिस्तान में हालात बेहद खराब हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भाजपा इन लोगों को भी लोकतंत्र का हिस्सा बनाना चाहती है। पूर्व में कश्मीरी पंडितों के लिए एम फॉर्म नामक व्यवस्था अपनाई गई थी, जिसके तहत वे देश के किसी भी भाग में रहते हुए मतदान कर सकते हैं।
इसी प्रकार जो लोग पीओके से निकलकर इधर आ गए हैं, उन्हें भी अपने विधानसभा क्षेत्र का नाम लिखते हुए चुनाव में शामिल होने की छूट दी जा सकती है। इसके लिए उन्हें पीओके में स्थित अपने विधानसभा क्षेत्र की जानकारी देने होगी। इसके बाद वे मतदान कर सकेंगे। इसके लिए एक विस्तृत फॉर्म भरना होगा और अपनी नागरिकता एवं निवास स्थान के बारे में प्रमाण सहित सूचना देगी होगी।
मजबूत होगा भारत का दावा
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान कश्मीर का राग अलापता रहता है, जबकि उसने खुद पीओके पर अवैध कब्जा कर रखा है। पाकिस्तान यहां आतंकवाद को भी भड़काता रहता है। अगर भारत की ओर से पीओके में स्थित विधानसभा सीटों पर भी चुनाव करवाकर उसके प्रतिनिधियों को विधानसभा भेजा गया तो इससे हमारा दावा और मजबूत होगा। साथ ही पीओके में पाकिस्तान के जुल्म और आतंकवाद के खिलाफ आवाज बुलंद करने का एक संवैधानिक मंच भी मिलेगा।
इतिहास के पन्नों से
साल 1947 में भारत-पाक विभाजन के बाद जम्मू-कश्मीर रियासत के तत्कालीन राजा हरिसिंह ने इसका भारत में विलय कर दिया था। हालांकि पाकिस्तान शुरू से ही इस इलाके पर अपनी नापाक नजरें टिकाए था। उसने उपद्रवियों के साथ अपनी फौज भेजी। इससे एक विशाल भूभाग पर उसने कब्जा कर लिया। बाद में उसका कुछ इलाका चीन को दे दिया। कालांतर में पीओके में पाकिस्तान की आतंकी हरकतों से परेशान लोग भारत की ओर आने लगे, लेकिन इन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया।
भाजपा का प्रदर्शन
जम्मू-कश्मीर में लोकसभा चुनाव में भाजपा का शानदार प्रदर्शन रहा है। यहां उसने छह में से तीन सीटें जीतीं। भाजपा को घाटी में भी बड़ी तादाद में वोट मिले। उसे सबसे ज्यादा त्राल विधानसभा क्षेत्र से वोट मिले। यह अनंतनाग लोकसभा क्षेत्र में आता है। यहां भाजपा की सोफी यूसुफ ने 10,225 वोट हासिल किए। इसी प्रकार बारामूला में मोहम्मद मकबूल को 7,894 और जम्मू में 8 लाख 58 हजार 66 वोट मिले। भाजपा प्रत्याशी जामयांग त्सेरिंग नामग्याल ने लद्दाख से 42,914, श्रीनगर से शेख खालिद जहांगीर ने 4,631 और उधमपुर से डॉ. जितेंद्र सिंह ने 7 लाख 24 हजार 311 वोट हासिल किए।
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