अब घुसपैठियों से मुक्त हो प. बंगाल

नई सरकार को सबसे पहले इस मुद्दे पर काम करना चाहिए

अब घुसपैठियों से मुक्त हो प. बंगाल

भारत के संसाधनों पर भारतीयों का अधिकार है

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। यूं तो केरल, असम, तमिलनाडु और पुड्डुचेरी में भी विधानसभा चुनाव हुए हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल के नतीजे कई मायनों में खास हैं। भाजपा बंगाल जीतने के लिए वर्षों से जोर लगा रही थी। उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं की मेहनत अब रंग लाई है। यह राज्य हमारे देश की सुरक्षा एवं अखंडता की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। यहां बांग्लादेशियों की घुसपैठ और अवैध बसावट का मुद्दा बहुत चर्चा में रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपनी जनसभाओं में इसे जोर-शोर से उठाते रहे हैं। अब प. बंगाल में भाजपा सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है। कुछ दिनों में शपथ-ग्रहण समारोह हो जाएगा। उसके बाद नई सरकार को सबसे पहले इस मुद्दे पर काम करना चाहिए। अब भाजपा के पास यह कहने का मौका नहीं होगा कि राज्य में हमारी सरकार नहीं है, अन्यथा हम एक-एक घुसपैठिए को निकाल बाहर करते। केंद्र में पहले ही से राजग सरकार है। असम में फिर एक बार भाजपा को जनादेश मिला है। तीनों जगह तालमेल रहने की हर संभव गुंजाइश है। अब प. बंगाल घुसपैठियों से मुक्त होना ही चाहिए। भारत के संसाधनों पर भारतीयों का अधिकार है। अवैध बांग्लादेशियों के लिए यहां कोई जगह नहीं होनी चाहिए। तृणकां ने डेढ़ दशक के शासन में तुष्टीकरण की सारी हदें पार कर दी थीं। संदेशखाली मामले में इस पार्टी की चौतरफा निंदा हुई थी। वहां महिलाएं असुरक्षित महसूस कर रही थीं। पुलिस भी तृणकां नेताओं के इशारे पर काम करती थी। बांग्लादेशी घुसपैठियों की मौज थी। वे मनमर्जी से झुग्गियां बनाते, सरकारी सुविधाओं का पूरा लाभ उठाते थे। अब यह सब बंद होना चाहिए।

Dakshin Bharat at Google News
याद करें, जब पश्चिम बंगाल में एसआईआर हो रहा था, तब बांग्लादेशियों के झुंड के झुंड किस तरह भागे जा रहे थे! तृणकां ने उस प्रक्रिया को रुकवाने, दुष्प्रचार करने के लिए हर संभव कोशिश की, लेकिन वह नाकाम रही थी। अब भाजपा की जिम्मेदारी है कि वह अगले पांच वर्षों में इन सभी समस्याओं का ठोस समाधान करे। किसी ज़माने में प. बंगाल औद्योगिक गतिविधियों के लिए जाना जाता था। पिछले लगभग पांच दशकों में यह राज्य अपनी शक्ति एवं सामर्थ्य का पूरा उपयोग करने से वंचित रहा है। भरपूर प्राकृतिक संसाधन, मानव संसाधन, उपजाऊ जमीन और समुद्र तट होने के बावजूद यहां व्यापार के लिए अनुकूल माहौल नहीं बन पाया। राजनीतिक दलों ने सिर्फ अपना वोटबैंक पक्का करने की परवाह की। हड़ताल, जुलूस, तालाबंदी और हिंसा के कारण कारखानों को ताले लगते गए। आम बंगाली को नौकरी के लिए अन्य राज्यों में पलायन करना पड़ा। अब प. बंगाल में माहौल सुधरना चाहिए। राज्य में कारखाने खोले जाएं, लोगों को रोजगार दिया जाए। इस बात का खास ध्यान रखा जाए कि रोजगार भारतीय नागरिकों को ही मिले। कहीं उनके वेश में बांग्लादेशी घुसपैठिए मलाई खाने न लग जाएं। प. बंगाल में राजनीतिक हिंसा बहुत होती थी। तृणकां के शासन में ऐसे कई मामले सामने आए थे। जब लोग पुलिस के पास जाते थे तो कोई सुनवाई नहीं होती थी। अपराधी बेखौफ थे। कई इलाकों में हालात ऐसे हो गए थे कि लोग अपनी पसंदीदा पार्टी का झंडा लगाने और मतदान के लिए जाने से डरते थे। अब ऐसे अपराधियों पर कड़ा नियंत्रण होना चाहिए। राजनीतिक हिंसा के पुराने मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अपराधियों तक यह संदेश जाना चाहिए कि अब उनकी दाल नहीं गलेगी। बंगाल स्वामी विवेकानंद, रामकृष्ण परमहंस, महर्षि अरविंद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे महान संतों और स्वतंत्रता सेनानियों की भूमि है। इसका वैभव लौटना चाहिए, जो पिछले वर्षों में कहीं गुम हो गया था।

About The Author

Dakshin Bharat Android App Download
Dakshin Bharat iOS App Download