ईरान युद्ध से टूटे कई भ्रम

तीन हफ्तों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई है

ईरान युद्ध से टूटे कई भ्रम

किसी को भी इस भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि 'हमें दुनिया से कोई मतलब नहीं है'

ईरान के साथ अमेरिका-इज़राइल के युद्ध ने कई भ्रम तोड़ दिए हैं। इस युद्ध का नतीजा जो भी निकले, लेकिन इसने कई धारणाओं पर भारी प्रहार किया है। पहले, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर जैसे देशों को बहुत सुरक्षित माना जाता था। भारत के कई लोगों ने यहां निवेश कर रखा है। उनका मानना था कि ये देश हमेशा सुरक्षित रहेंगे। इनकी समृद्धि के सोशल मीडिया पर बड़े चर्चे थे। पिछले तीन हफ्तों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। अगर कोई देश अपनी सरहदों को सुरक्षित नहीं रख सकता तो उसकी समृद्धि खतरे में पड़ सकती है। ईरान के साथ अमेरिका-इज़राइल की जुबानी जंग वर्षों से चली आ रही थी। किसी ने नहीं सोचा होगा कि यह असल जंग में बदल जाएगी। ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता आयतुल्ला खामेनेई के सुरक्षा चक्र को तोड़ना लगभग असंभव माना जाता था। उनके हर सुरक्षाकर्मी पर खुफिया एजेंसियों की पैनी नज़र होती थी। हाल के वर्षों में ईरान के कई प्रमुख वैज्ञानिक और सैन्य अधिकारी मारे गए, लेकिन खामेनेई की सुरक्षा को लेकर किसी को संदेह नहीं था। जब युद्ध शुरू हुआ तो खामेनेई सबसे पहले चपेट में आए। उनका सुरक्षा घेरा बहुत कमजोर साबित हुआ। इस युद्ध ने इस्लामी देशों की एकता के दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है। यह माना जाता था कि जिस दिन इज़राइल, ईरान पर हमला करेगा, सारे इस्लामी देश एकजुट होकर 'दुश्मन' पर धावा बोल देंगे। हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ। ईरान ने इस्लामी देशों पर मिसाइल व ड्रोन से हमले किए, जिन्होंने तेहरान को खरी-खोटी सुनाई। पाकिस्तान, जो इज़राइल की निंदा करने में सबसे आगे रहता है, की सरकार व सेना ने गहरी चुप्पी साध रखी है।

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ईरान के बारे में एक और भ्रम था। कुछ विशेषज्ञ कहते थे कि इस देश ने परमाणु तकनीक हासिल करने के बाद गुप्त रूप से परमाणु हथियार विकसित कर लिए हैं। वहीं, यह दावा भी किया जाता था कि ईरान ने पहले ही पाकिस्तान से कुछ परमाणु हथियार लेकर अपने पास रख लिए हैं। बस, उसे सही मौके का इंतज़ार है। ये सारे दावे भ्रामक साबित हुए। भारत में कई लोगों का यह रवैया है कि 'दुनिया में कुछ होता है तो होता रहे, हमें उससे कोई मतलब नहीं है।' वे खबरें पढ़ने में कोई रुचि नहीं लेते। उन्हें लगता था कि 'बाहर की लड़ाई वहीं तक सीमित रहेगी। हमारा जीवन पहले की तरह चलता रहेगा।' जब से रसोई गैस का सिलेंडर लेने में दिक्कत शुरू हुई है, वे होर्मुज जलडमरूमध्य के बारे में खबरें पढ़ने लगे हैं। आज देशों की एक-दूसरे पर निर्भरता बहुत बढ़ गई है। अगर हजारों किमी दूर कोई घटना होगी तो उसका असर हमारी जेब पर पड़ सकता है। किसी को भी इस भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि 'हमें दुनिया से कोई मतलब नहीं है।' मजबूत सेना किसी देश की बहुत बड़ी ताकत होती है। पहले, यह आम धारणा थी कि संख्या बल में बड़ी सेना होगी तो युद्ध के नतीजे पक्ष में आएंगे। हालांकि अब युद्ध के तौर-तरीके तेजी से बदल रहे हैं। मजबूत सेना की जरूरत हमेशा रहेगी, लेकिन युद्ध का नतीजा तकनीक पर निर्भर करेगा। ईरानी सैनिक बहादुरी, जोश और जज्बे में अमेरिकी-इज़राइली सैनिकों से कम नहीं हैं। बस, वे तकनीक के मामले में पिछड़ गए। ईरान ने मिसाइल तकनीक में कुछ उन्नति जरूर की है, लेकिन अमेरिकी-इज़राइली तकनीक से उसका कोई मुकाबला नहीं है। अगर ईरान के पास बेहतर तकनीक होती तो वह इज़राइल को भयंकर नुकसान पहुंचा सकता था। भविष्य में मिसाइलों, ड्रोनों और वायु रक्षा प्रणालियों का महत्त्व बढ़ना तय है। जो देश तकनीक में मजबूत होगा, उसकी सुरक्षा भी मजबूत होगी।

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