2025 की उपलब्धियां, नई साल के लिए उम्मीदें ... 'मन की बात' में यह बोले प्रधानमंत्री
'मन की बात' की 129वीं कड़ी
Photo: narendramodi FB Page
नई दिल्ली/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 'मन की बात' कार्यक्रम में देशवासियों के समक्ष अपने विचार प्रकट किए। उन्होंने कहा कि साल 2025 ने हमें ऐसे कई पल दिए जिन पर हर भारतीय को गर्व हुआ। देश की सुरक्षा से लेकर खेल के मैदान तक, विज्ञान की प्रयोगशालाओं से लेकर दुनिया के बड़े मंचों तक, भारत ने हर जगह अपनी मजबूत छाप छोड़ी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पुरुष क्रिकेट टीम ने आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जीती, महिला क्रिकेट टीम ने पहली बार विश्व कप अपने नाम किया, भारत की बेटियों ने महिला ब्लाइंड टी20 विश्व कपजीतकर इतिहास रचा, एशिया कप टी20 में तिरंगा शान से लहराया। विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत ने बड़ी छलांग लगाई। शुभांशु शुक्ला पहले भारतीय बने, जो अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचे।प्रधानमंत्री ने कहा कि साल 2025 में आस्था, संस्कृति और भारत की अद्वितीय विरासत सब एक साथ दिखाई दीं। साल के शुरुआत में प्रयागराज महाकुंभ के आयोजन ने पूरी दुनिया को चकित किया। साल के अंत में अयोध्या में राम मंदिर पर ध्वजारोहण के कार्यक्रम ने हर भारतीय को गर्व से भर दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के युवाओं में हमेशा कुछ नया करने का जुनून है और वे उतने ही जागरूक भी हैं। 'स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2025' का समापन इसी महीने हुआ है। इस हैकाथॉन के दौरान 80 से अधिक सरकारी विभागों की 270 से ज्यादा समस्याओं पर छात्रों ने काम किया। छात्रों ने ऐसे समाधान दिए, जो वास्तविक जीवन की चुनौतियों से जुड़े थे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुबई में रहने वाले कन्नड़ा परिवारों ने खुद से एक जरूरी सवाल पूछा- हमारे बच्चे टेक वर्ल्ड में आगे तो बढ़ रहे हैं, लेकिन कहीं वे अपनी भाषा से दूर तो नहीं हो रहे हैं? यहीं से जन्म हुआ 'कन्नड़ा पाठशाले' का ... एक ऐसा प्रयास, जहां बच्चों को 'कन्नड़ा' पढ़ना, सीखना, लिखना और बोलना सिखाया जाता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 'जहां चाह, वहां राह'... इस कहावत को सच कर दिखाया है मणिपुर के एक युवा मोइरांगथेम सेठ ने। उनकी उम्र 40 साल से भी कम है। वे मणिपुर के जिस दूर-सुदूर क्षेत्र में रहते थे वहां बिजली की बड़ी समस्या थी। इस चुनौती से निपटने के लिए उन्होंने स्थानीय समाधान पर जोर दिया और उन्हें यह मिला सौर ऊर्जा में।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के बारामूला में, जेहनपोरा नाम की एक जगह है। वहां लोग बरसों से कुछ ऊंचे-ऊंचे टीले देखते आ रहे थे। साधारण से टीले किसी को नहीं पता था कि ये क्या है? इन टीलों का वैज्ञानिक अध्ययन शुरू किया गया। और फिर कुछ हैरान करने वाली बातें सामने आने लगी। पता चला ये टीले प्राकृतिक नहीं हैं। ये इंसान द्वारा बनाई गई किसी बड़ी इमारत के अवशेष हैं। इसी दौरान एक और दिलचस्प कड़ी जुड़ी। कश्मीर से हजारों किलोमीटर दूर, फ्रांस के एक संग्रहालय के अभिलेखागार में एक पुराना, धुंधला सा चित्र मिला। बारामूला के उस चित्र में तीन बौद्ध स्तूप नजर आ रहे थे। यहीं से समय ने करवट ली और कश्मीर का एक गौरवशाली अतीत हमारे सामने आया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि फिजी में भारतीय भाषा और संस्कृति के प्रसार के लिए एक सराहनीय पहल हो रही है। वहां की नई पीढ़ी को तमिल भाषा से जोड़ने के लिए कई स्तरों पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ओडिशा की पार्वती गिरि... जनवरी 2026 में उनकी जन्म-शताब्दी मनाई जाएगी। उन्होंने 16 वर्ष की आयु में 'भारत छोड़ो आंदोलन' में हिस्सा लिया था। आजादी के आंदोलन के बाद पार्वती गिरि ने अपना जीवन समाज सेवा और जनजातीय कल्याण को समर्पित कर दिया था। उन्होंने कई अनाथालयों की स्थापना की थी। उनका प्रेरक जीवन हर पीढ़ी का मार्गदर्शन करता रहेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें बताया गया है कि निमोनिया और यूटीआई जैसी कई बीमारियों के खिलाफ एंटीबायोटिक दवाएं कमजोर साबित हो रही हैं। हम सभी के लिए यह बहुत ही चिंताजनक है। रिपोर्ट के मुताबिक इसका एक बड़ा कारण लोगों द्वारा बिना सोचे-समझे एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन है। ये ऐसी दवाएं नहीं हैं, जिन्हें यूं ही ले लिया जाए। इनका इस्तेमाल चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आंध्र प्रदेश के नारसापुरम जिले की लेस क्राफ्ट की चर्चा अब पूरे देश में बढ़ रही है। यह कई पीढ़ियों से महिलाओं के हाथों में रही है। बहुत धैर्य और बारीकी के साथ देश की नारी-शक्ति ने इसका संरक्षण किया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मणिपुर के चुराचांदपुर में मार्गरेट रामथार्सिएम के प्रयास ऐसे ही हैं। उन्होंने मणिपुर के पारंपरिक उत्पादों को, वहां के हस्तशिल्प को, बांस और लकड़ी से बनी चीजों को, एक बड़े विजन के साथ देखा और इसी के कारण, वे एक हस्तशिल्प कलाकार से लोगों के जीवन को बदलने का माध्यम बन गईं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मणिपुर से ही एक और उदाहरण सेनापति जिले की रहने वाली चोखोने क्रिचेना जी का है। उनका पूरा परिवार परंपरागत खेती से जुड़ा रहा है। क्रिचेना ने इस पारंपरिक अनुभव को एक और विस्तार दिया। उन्होंने फूलों की खेती को अपना पैसन बनाया। आज वे इस काम से अलग-अलग बाजारों को जोड़ रही हैं और अपने इलाके के समुदायों को भी सशक्त कर रही हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ठंड का यह मौसम व्यायाम के लिए बहुत उपयुक्त होता है, व्यायाम जरूर करें। आप सभी को साल 2026 की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।


