कर्पूरी ठाकुर को ‘भारत रत्न’ देने की घोषणा पर मोदी और नीतीश ने क्या कहा?

कर्पूरी ठाकुर को ‘जननायक’ के नाम से जाना जाता है

कर्पूरी ठाकुर को ‘भारत रत्न’ देने की घोषणा पर मोदी और नीतीश ने क्या कहा?

उन्होंने वंचितों और पिछड़े समुदायों के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया था

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रपति भवन ने मंगलवार को इस संबंध में घोषणा की।

कर्पूरी ठाकुर को ‘जननायक’ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने वंचितों और पिछड़े समुदायों के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया था।

कर्पूरी ठाकुर का जन्म 24 जनवरी, 1924 को बिहार के समस्तीपुर में हुआ था। उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया और जेल गए थे। उन्होंने साल 1952 में अपना पहला चुनाव जीता था। 

कर्पूरी ठाकुर दिसंबर 1970 से जून 1971 और दिसंबर 1977 से अप्रैल 1979 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे थे। उनका निधन 17 फरवरी, 1988 को हुआ था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘मुझे खुशी है कि भारत सरकार ने सामाजिक न्याय के प्रतीक महान जननायक कर्पूरी ठाकुरजी को भारत रत्न से सम्मानित करने का निर्णय लिया है और वह भी ऐसे समय में, जब हम उनकी जन्मशती मना रहे हैं।’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘यह प्रतिष्ठित सम्मान हाशिए पर पड़े लोगों के लिए एक चैंपियन और समानता तथा सशक्तीकरण के समर्थक के रूप में उनके स्थायी प्रयासों का एक प्रमाण है।’

उन्होंने कहा, ‘दलितों के उत्थान के लिए उनकी अटूट प्रतिबद्धता और उनके दूरदर्शी नेतृत्व ने भारत के सामाजिक-राजनीतिक ताने-बाने पर एक अमिट छाप छोड़ी है। यह पुरस्कार न केवल उनके उल्लेखनीय योगदान का सम्मान करता है, बल्कि हमें एक अधिक न्यायपूर्ण और न्यायसंगत समाज बनाने के उनके मिशन को जारी रखने के लिए भी प्रेरित करता है।’

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने फेसबुक पोस्ट में कहा, ‘पूर्व मुख्यमंत्री और महान समाजवादी नेता स्व. कर्पूरी ठाकुरजी को देश का सर्वाेच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ दिया जाना हार्दिक प्रसन्नता का विषय है। केंद्र सरकार का यह अच्छा निर्णय है।’

उन्होंने कहा, ‘स्व. कर्पूरी ठाकुर को उनकी 100वीं जयंती पर दिया जाने वाला यह सर्वाेच्च सम्मान दलितों, वंचितों और उपेक्षित तबकों के बीच सकारात्मक भाव पैदा करेगा। हम हमेशा से ही स्व. कर्पूरी ठाकुर को ‘भारत रत्न’ देने की मांग करते रहे हैं। वर्षों की पुरानी मांग आज पूरी हुई है।’

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