राहुल के बदले अंदाज से कांग्रेस में जोश

राहुल के बदले अंदाज से कांग्रेस में जोश

बेंगलूरु/दक्षिण भारतकर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान में जुटे कांग्रेस के कुछ नेता करीब ६ महीने पहले राहुल गांधी का मजाक उ़डाया करते थे। उनका कहना था कि मौका मिले तो वह राहुल से बेहतर कैंपेनर साबित होंगे। आज वही नेता खुले तौर पर राहुल गांधी की तारीफ करते हैं। उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष की कैंपेनिंग और रणनीति पार्टी के लिए फायदेमंद दिख रही है। अब स्थानीय कांग्रेस नेताओं का मानना है कि पार्टी को राहुल गांधी की सबसे ज्यादा जरूरत है क्योंकि राहुल पार्टी कैडर में जोश और उम्मीद जगा रहे हैं। वह बदले-बदले से नजर आ रहे हैं। ऐसा खासकर गुजरात चुनाव के बाद हुआ है। पिछले साल हुए गुजरात चुनाव में भले ही भाजपा को जीत मिली हो, लेकिन उसे कांग्रेस से क़डी टक्कर मिली थी। चुनावी रण में कांग्रेस का नेतृत्व राहुल गांधी कर रहे थे। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि इस चुनाव के बाद से राहुल गांधी और ज्यादा उत्साह से भर गए। वे कांग्रेस के लिए अब पहले से ज्यादा मेहनत कर रहे हैं। राहुल गांधी ने कर्नाटक चुनाव के लिए जनवरी के आखिरी हफ्ते में बल्लारी जिले से कांग्रेस के कैंपेनिंग की शुरुआत की थी। तब से उन्हें हर रैली और रोड शो में बेहतर रिस्पॉन्स मिल रहा है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के मुकाबले राहुल स्पेशल बस से यात्रा करते हैं और आसानी से स्थानीय लोगों से घुल-मिल जाते हैं। पहले चुनावी कैंपेनिंग के लिए उन्होंने बल्लारी से गुलबर्गा तक बस की सवारी की थी। इस दौरान राहुल ने ४०० किलोमीटर तक का सफर तय किया और कई जगहों पर रैली की। कर्नाटक चुनाव को लेकर राहुल का पहला कदम कामयाब रहा। पार्टी आगे इसी फॉर्मूले पर काम कर रही है। फरवरी में राहुल गांधी ने कर्नाटक के लिंगायत मंदिरों और इलाकों का दौरा किया। इस बार भी उन्होंने अपने दौरे के लिए हेलिकॉप्टर नहीं, बल्कि बस को ही चुना। ये दौरा भी सफल रहा। तीसरे, चौथे और पांचवें दौरे पर भी राहुल गांधी को बेहतर रिस्पॉन्स मिला। कर्नाटक कांग्रेस कमिटी के कार्यकारी अध्यक्ष दिनेश गुंडूराव के मुताबिक, राहुल गांधी ने कर्नाटक का २००० किलोमीटर का इलाका कवर कर लिया है। वह जोश से भरे हुए हैं्। उनके पास कभी खत्म न होने वाली एनर्जी है। वह पार्टी कैडर को भी प्रेरित करते हैं और कांग्रेस नेताओं को भी प्रोत्साहित करते हैं्। राहुल अब आगे ब़ढकर पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं्। पिछले दो महीने में जहां-जहां उन्होंने प्रचार किया है, वहां से पार्टी को बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला है।€द्भय् द्धद्मष्ठख्य् द्यय्उुर्‍द्भ ्यद्य·र्ैंय्स्रठ्ठश्च?कर्नाटक में कांग्रेस नेताओं का दावा है कि राहुल गांधी पहले ही राज्य के २५ जिलों की यात्रा कर चुके हैं्। हाल के दिनों में कांग्रेस का कोई भी अध्यक्ष इतने जिलों में नहीं गया है। शनिवार और रविवार को उन्होंने तीन और जिलों का दौरा किया। आने वाले दिनों में उनका उत्तर कन्ऩड और कोडगु का दौरा भी प्रस्तावित है। यानी, राहुल गांधी कर्नाटक के सभी ३० जिलों को कवर कर लेंगें यह एक राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष का रिकॉर्ड होगा।ट्टष्ठ्रझ्ध् द्यद्म द्नर्‍ ्यब्ट्टराहुल गांधी का टेंपल रन (मंदिर दर्शन) भी हिट साबित हो रहा है। वह अब तक एक दर्जन से ज्यादा मंदिरों और मठों के दर्शन कर चुके हैं कांग्रेस के एक सीनियर नेता का कहना है, बीजेपी ऐसी अफवाह फैला रही है कि राहुल गांधी आलसी से हैं। वह क़डी मेहनत नहीं कर सकते। राहुल हिंदू भी नहीं हैं। लेकिन, उन्होंने अपने विरोधियों को गलत साबित किया है। राज्य में राहुल गांधी को जिस तरह से लोगों का प्यार मिल रहा है, उससे भाजपा परेशान हो गई है। वहीं, पहले की तुलना में राहुल अब ज्यादा टेक्नोलॉजी फ्रेंडली हो गए हैं्। वह लोगों से जु़डने के लिए हाई-एंड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बखूबी कर रहे हैं। हाल में हुई राहुल गांधी की सभी रैलियां फेसबुक और ट्विटर पर लाइव की गई थीं। हिंदी में दिए गए उनके भाषणों को कन्ऩड में ट्रांसलेट किया गया।कन्नड एक्टिविस्ट और सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल अरुण जवगल कहते हैं कि हमने वाकई भाजपा और कांग्रेस को ट्रांसलेटर के लिए मजबूर किया है। इसके पहले वे हिंदी में बोलते थे और कर्नाटक के ज्यादातर लोग उनकी बात समझ नहीं पाते थे। ऐसे में ये पार्टियां हमें हल्के में लेती थी। कांग्रेस के अपनी गलती का एहसास हुआ है। अब राहुल गांधी के सभी भाषणों को कन्ऩड में ट्रांसलेट किया जा रहा है। यहां तक कि कई जगहों पर अमित शाह के भाषण भी कन्ऩड में ट्रांसलेट हुए हैं लेकिन, पीएम मोदी के भाषणों के साथ फिलहाल ऐसा नहीं हुआ।्यज्ध्य् ृक्द्भूय्ह्र ·र्ैंह् फ्द्बद्वय्य्त्रष्ठ ब्स्र झ्य्ट्टर्‍श्च ·र्ैंर्‍ द्यह्लय्द्मर्‍्यत्रकांग्रेस के एक जिला अध्यक्ष के मुताबिक, राहुल गांधी ब्लॉक कांग्रेस और हर जिले के अध्यक्षों से भी मुलाकात कर रहे हैं्। उन्हें पार्टी की रणनीति के बारे में समझा रहे हैं। वह पार्टी कैडर के साथ मिलकर काम कर रहे हैं्। ऐसा इसके पहले कभी नहीं हुआ। हम इससे खुश हैं्। वह हमारी बात भी सुनते हैं और खुद फैसले लेते हैं्। बहरहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राहुल गांधी को मिल रहा समर्थन वोट में बदलेगा या फिर इतिहास में कुछ और दर्ज होना है।

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