अन्नाद्रमुक की अंदरुनी कलह के कारण निकाय चुनाव में हो रही देरी

अन्नाद्रमुक की अंदरुनी कलह के कारण निकाय चुनाव में हो रही देरी

चेन्नई। सत्तारुढ अखिल भारतीय अन्ना द्रवि़ड मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) द्वारा भले ही यह कहा जा रहा है कि स्थानीय निकाय चुनाव इसलिए नहीं हो रहा है कि इससे संबंधित मामला अदालत में लंबित है लेकिन विपक्षी पार्टियों का कहना है कि सत्तारुढ पार्टी की अंदरुनी कलह के कारण स्थानीय निकाय चुनाव नहीं हो रहा है। मौजूदा समय में अन्नाद्रमुक के दो ध़डों में पार्टी के पुराने चुनाव चिन्ह दो पत्तियों के निशान को प्राप्त करने के लिए ल़डाई हो रही है। शनिवार को राज्य सरकार ने स्थानीय निकायों के प्रशासनिक कार्यों के लिए नियुक्त किए गए विशेष अधिकारियों का कार्यकाल इस वर्ष दिसंबर तक बढा दिया। हालांकि इसका विरोध करते हुए मुख्य विपक्षी पार्टी द्रवि़ड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और इसके घटक दल विधानसभा से बर्हिगमन कर गए।विपक्षी पार्टियों के विधायकों का कहना है कि सरकार को विशेष अधिकारियों के कार्यकाल का विस्तार करने के बदले स्थानीय निकाय चुनाव कराना चाहिए। सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम के बाद एक बार फिर से अगले छह महीनों तक के लिए राज्य के १३,२०० स्थानीय निकाय के प्रमुख का पद रिक्त रहेगा। स्टालिन ने इस संबंध में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि राज्य मेंें स्थानीय निकायों में १.३२ लाख पद रिक्त हैंै और इन रिक्त पदों को भरना आवश्यक है। इन पदों के रिक्त रहने के कारण नगर निगमों और नगरपालिकाओं में होने वाले आवश्यक कार्यों को समुचित ढंग से नहीं किया जा सकेगा।स्टालिन ने कहा कि मुख्यमंत्री इडाप्पाडी के पलानीसामी सरकार को इस बात का डर सता रहा है कि यदि मौजूदा हालातों में स्थानीय निकाय चुनाव कराया जाता है तो सत्तारुढ पार्टी को हार का सामना करना प़ड सकता है। स्थानीय निकाय चुनाव इस बात को भी प्रदर्शित करेगा कि राज्य के मतदाताओं का मिजाज कैसा है। स्टालिन ने यहां पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि निर्वाचन आयोग ने २५ अप्रैल को मद्रास उच्च न्यायालय को यह जानकारी दी थी कि आयोग स्थानीय निकाय चुनाव कराने के लिए तैयार है लेकिन सरकार की ओर से निकाय चुनाव करवाने के बारे में कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।तमिलनाडु प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एस तिरुनावुक्कारसार ने भी स्थानीय निकाय चुनाव कराने में टाल मटोल करने के लिए राज्य की सत्तारुढ पार्टी पर निशाना साधा है। तिरुनावुक्कारसार ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री जयलललिता के निधन के बाद सत्तारुढ दल विभाजित हो चुका है और यही स्थानीय निकाय चुनाव में देरी होने का मुख्य कारण है। उन्होंने याद दिलाया कि मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा बार-बार आयोग को निकाय चुनाव कराने के लिए निर्देश जारी कर चुका है इसके बावजूद सरकार चुनाव नहीं कराना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पलानीसामी पूर्व मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम ध़डे के साथ विलय करने का इंतजार कर रहे हैं। द्रमुक और कांग्रेस के साथ ही वाम पार्टियों, विदतलै चिरुतैगल कच्चि के अध्यक्ष थोल थिरुमावलावन और मरुमलरची द्रवि़ड मुनेत्र कषगम के नेता वाइको ने भी सत्तारुढ दल की आलोचना की है। सोमवार को इस संबंध में पूछे जाने पर थिरुमावलावन ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लोकतांत्रिक ढांचे के अनुरुप कार्य नहीं किया जा रहा है। राज्य के सभी नगर निगमों, नगपालिकाओं, टाउन पंचायतों और ग्राम पंचायतों को इस बात का अधिकार है कि वह अपने प्रतिनिधि का चयन करें जबकि सरकार उन पर जबरन स्वयं द्वारा नियुक्त किए गए विशेष प्रशासनिक अधिकारियों को थोपने का कार्य कर रही है। इस परिणाम सत्तारुढ दल को उस समय भुगतना होगा जब राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव होंगे।द्रमुक नेता एमके स्टालिन ने कहा कि मुख्यमंत्री इडाप्पाडी के पलानीसामी सरकार को इस बात का डर सता रहा है कि यदि मौजूदा हालातों में स्थानीय निकाय चुनाव कराया जाता है तो सत्तारुढ पार्टी को हार का सामना करना पड़ सकता है।

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