बेंगलूरु/दक्षिण भारतयहां विल्सन गार्डन स्थित शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आचार्यश्री कुमुदनंदीजी व मुनिश्री अर्पणसागरजी ने अपने प्रवचन में कहा कि शुभ कार्यों में प्रवृत्ति एवं अशुभ कार्यों में निवृत्ति मनुष्य का चारित्र है। उन्होंने कहा कि शुभ कार्य में मनुष्य के छह आवश्यक कर्त्तव्य हैं, इनमें देवपूजा, गुरुपास्ति, स्वाध्याय, संयम, तप व दान मुख्य हैं। आचार्यश्री ने कहा कि जब तक श्रावक शुभ कार्यों मंे लगा रहेगा तब तक नये कर्म नहीं बंधेंेगे और अशुभ कार्यों से निवृत्ति होगी। उन्होंने यह भी कहा कि काया, वचन और मन को सही दिशा में संभल कर रखने से शुभ और पुण्य का आश्रय होता है व कर्मों की निर्जरा होती है। इस अवसर पर ब़डी संख्या में श्रावक उपस्थित थे। आचार्यश्री की भक्ति व आरती कर आहार-चर्या संपन्न हुई।

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