बेंगलूरु/दक्षिण भारत श्रमण संघीय उपाध्यायश्री रवींद्रमुनिजी ने बुधवार को अपने प्रवचन में कहा कि भारतीय संस्कृति में दो छोटे-छोटे शब्द महत्वपूर्ण हैं, ये हैं योग और क्षेम। ये हमारे जीवन में मौन भाव से भूमिका अदा करते हैं। योग को कुछ विशिष्ट लोग सजगता से जीवन जीने का काम करते हैं। शरीर को स्वस्थ करने के लिए कुछ प्रक्रियाएं करना आज के लोगों की धारणा है जबकि वास्तव में अप्राप्त वस्तु का यानी भौतिक वस्तुओं का प्राप्त होना योग कहलाता है। पुनवानी से बहुमूल्य दुर्लभ मानव जीवन का मिलना योग है। मानव जीवन की महत्ता व समय के मूल्य को समझने की सीख देते हुए मुनिश्री ने कहा कि योग के उपयोग को समझकर चलना चाहिए। वहीं क्षेम का अभिप्राय प्राप्त वस्तु का सारसंभाल करना है। उपाध्यायश्री ने कहा कि बाहरी दुनियावी चकाचौंध की जगह अंतर आत्मा की ओर झांकना यानी आंतरिक रक्षा-सुरक्षा जो कि क्षेम कहलाती है उसकी रक्षा भी जरुरी है। उन्होंने कहा कि आत्मदृष्टि से चिंतन जरुरी है अपने भविष्य को संवारने के लिए अच्छे कर्म, अच्छा पुरुषार्थ करना जीवन में आवश्यक है, यही क्षेम है। एक श्राविका के निवास पर अपना प्रवचन देते हुए उन्होंने एक प्रसंग का बखान करते हुए कहा कि जिस प्रकार बच्चे के जन्म के बाद रक्षा, सुरक्षा व संरक्षण आवश्यक है उसी प्रकार इस मानव जीवन का संरक्षण भी आवश्यक है। मानसिक शांति के लिए धर्म और समाज जीवन में जरुरी है। संतश्री रमणीकमुनिजी ने भूमि अथवा स्थान विशेष (जगह) की पुनवानी का उल्लेख करते हुए भक्त और उसकी भक्ति को विस्तारित किया। मुनिश्री ने कहा कि एक भक्त में जब एकात्मकता, आत्मीयता, एकाग्रता व संपूर्ण समर्पण होता है तो उसका जादू चलता है। प्रेम को विस्तार से परिभाषित करते हुए संतश्री ॠषिमुनिजी ने कहा कि साधु का जीवन सृष्टि का संगीत होता है। उन्होंने कहा कि प्रेम, सौहार्द और सज्जनता का भाव व्यक्ति को परमात्मा से जो़डता है। इससे पूर्व चेन्नई के साधक निर्मल चोरि़डया ने भी विचार रखे।कार्यक्रम का संचालन यशवंतपुर संघ के मंत्री रमेश बोहरा ने किया। उन्होंने बताया कि मुनिवृंद १९ मई को यहां से विहार कर यशवंतपुर स्थानक पहुंचेंगे तथा २० मई को यशवंतपुर स्थित मेवा़ड भवन में वर्द्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ चिकपेट शाखा के तत्वावधान में संत-संघ समागम समारोह आयोजित होगा। इस अवसर पर चिकपेट शाखा के कार्याध्यक्ष प्रकाशचंद बंब, महामंत्री गौतमचंद धारीवाल सहित ब़डी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं मौजूद थे। सभी का आभार विकास जैन ने जताया।

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