श्रवणबेलगोला। कहते हैं कि किसी भी ब़डे कार्यक्रम की सफलता के लिए उस कार्यक्रम में भोजन व्यवस्था का सुचारु होना भी अति आवश्यक होता है। श्रवणबेलगोला के गोम्मटेश्वर भगवान बाहुबली महामस्तकाभिषेक महामहोत्सव का आयोजन भी ऐसा ही भव्य था। गत ७ फरवरी से २६ फरवरी तक चले इस महामहोत्सव में प्रतिदिन लगभग १.५ लाख लोगों ने यहां भोजन रूपी प्रसाद ग्रहण किया। इस महोत्सव में भोजन व्यवस्था समिति की पूरी जिम्मेदारी संभाल रहे कमेटी चेयरमैन विनोद बाकलीवाल ने बताया कि इस महोत्सव में भोजन व्यवस्था के लिए १८ ब़डी विशालकाय भोजनशालाएं बनाई गई थीं जिनमें भोजन नगर में ६, पंचकल्याणक नगर में १, त्यागीनगर में २, कलशनगर में २, वीआईपी नगर, वीवीआईपी नगर, कलशनगर नं. ३, पुलिस नगर (पुरुष), पुलिस नगर (महिला), मीडियानगर, यात्री नगर एवं बाहुबली इंजीनियरिंग नगर में १-१ भोजनशाला की व्यवस्था की गई थी। उन्होंने बताया कि श्रवणबेलगोला के स्वास्तिश्री चारुकीर्तिभट्टारक स्वामीजी का सपना था कि महामस्तकाभिषेक में जो भी श्रद्धालु शामिल हों उनमें से कोई भी महाप्रसाद (भोजन) लिए बिना वापस न जाए और उनका सपना साकार हुआ। मैसूरु निवासी विनोद बाकलीवाल ने बताया कि महामहोत्सव के बाद भी तय समय तक श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए आवश्यकतानुसार यह भोजन व्यवस्था १० मार्च तक चालू रखी जाएगी। विनोद बाकलीवाल ने बताया कि लाखों लोगों के भोजन की इतनी ब़डी जिम्मेदारी उनके जीवनकाल की सबसे ब़डी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि यह एक सपने जैसा है जो साकार हो चुका है। बाकलीवाल ने कहा कि इस महामहोत्सव में भोजन व्यवस्था पूर्ण रुप से सुचारु तरीके से चली और कहीं भी किसी प्रकार की अव्यवस्था नहीं हुई। उन्होंने बताया कि इतनी ब़डी संख्या में लोगों को भोजन कराना और उन्हें संतुष्ट करना भी एक ईश्वरीय आशीर्वाद है । बाकलीवाल ने कहा कि भगवान बाहुबली का आशीर्वाद, स्वास्तिश्री चारुकीर्तिभट्टारक स्वामीजी का विश्वास तथा उनकी भोजन समिति की टीम द्वारा एकजुट मेहनत ही उनकी सफलता का मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि चारुकीर्ति जी के दिन-प्रतिदिन नेतृत्व ने उन्हें कभी भी थकान महसूस नहीं होने दी और उनकी टीम ने हमेशा उनमें जोश बनाए रखा जिसका ही परिणाम है कि इस २० दिवसीय महामहोत्सव में लोगों ने भरपेट प्रसाद ग्रहण किया। बाकलीवाल ने बताया कि भोजन व्यवस्था के लिए सामग्री एकत्रित करने के लिए लगभग एक वर्ष पूर्व से ही कार्य करना प्रारंभ कर दिया गया था। उदारमना श्रद्धालुओं ने देश भर से दानस्वरुप खाद्य सामग्री भेजकर उनके हाथ मजबूत किए। सांगली निवासी तथा महामहोत्सव समिति के सचिव सुरेश पाटिल, टुमकूर के पार्श्वनाथ, बेलगावी के ब्रजकुमार ने हमेशा उन्हें हौसला दिया तथा कंधे से कंधा मिलाकर भोजन व्यवस्था में सहयोग किया। साथ ही सुरेन्द्र बाकलीवाल, राजेन्द्र पांड्या, नरेन्द्र सोगाणी, अमित ठोलिया और अनेक युवाओं ने बेंगलूरु और आसपास से सामग्री क्रय करने में पूरा साथ दिया। बाकलीवाल ने बताया कि महामहोत्सव में इन १८ भोजनशालाओं में ८ भोजनशाला तो २० हजार वर्गफीट की तथा अन्य छोटी भोजनशालाएं थीं। सभी भोजनशालाओं में अलग अलग केटरर्स की व्यवस्था की गई थी तथा हर एक केटरर्स के साथ करीब १२५-१५० कर्मचारी कार्यरत थे। उन्होंने बताया कि हर भोजनशाला में प्रतिदिन नाश्ता, सुबह के भोजन व शाम के भोजन का मीनू अलग अलग था। बाकलीवाल ने बताया कि श्रद्धालुओं के स्वाद का पूरा ध्यान रखते हुए भोजननगर में नेल्लूर, मंड्या, टुमकूर, चित्रदुर्गा, दावणगेरे, उत्तरभारतीय, राजस्थानी क्षेत्र के व्यंजनों के लिए अलग व्यवस्था के अनुसार भोजनशाला का वर्गीकरण किया गया था। मार्बल व गे्रनाइट के व्यवसायी विनोद बाकलीवाल ने बताया कि भोजन बनाने में भी स्वच्छता व शुद्धता का पूरा ख्याल रखा गया है। उन्होंने बताया कि यह उनके जीवन की सबसे ब़डी उपलब्धि है और वे अपने आप को धन्य मानते हैं कि श्रवणबेलगोला पावनतीर्थ में उन्हें १२ वर्ष में एक बार आने वाले महामस्तकाभिषेक महोत्सव में ंलोगों की सेवा करने का मौका मिला।

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