फल, सब्जी के जूस की जगह सब्जी का सूप भी उपयेाग किया जा सकता है। जूस की अपेक्षा सब्जी का सूप कम लाभदायक होता है क्योंकि सूप उबालकर उपयोग किया जाता है। उबालने से पोषक तत्व कम हो जाते हैं। फिर भी जहां फल, सब्जी न मिलें, क्रय-शक्ति का अभाव हो या नमकीन पेय की इच्छा हो तो सूप से भी काम चलाया जा सकता है।सूप बनाने की विधि:- सब्जी को धोकर, महीन-महीन काटकर, जितनी सब्जी हो, उससे चौथाई पानी डालकर, सब्जी की भांति उबालें। जब पानी आधा रह जाये तो उसी बर्तन में मसल दें। इसके बाद ठंडी हो जाने पर किसी कपड़े में रखकर निचो़डचकर निकाल लें। इस प्रकार सूप तैयार हो गया। विशेष:- किसी भी हरी सब्जी का सूप ही उपयोगी होता है। हरी सब्जी के साथ हरा धनिया, आवश्यकता अनुसार अदरक, प्याज आदि डालकर सब्जी बनाने के बाद उतार कर तब उसमें कटे टमाटर डालकर ढंक दें। किसी बारीक कपड़े में या छलनी से छान लें। सूप तैयार है। सूप ब़डा गुणकारी तथा स्वादिष्ट होता है। कई सब्जियों को एक साथ उबाल कर सूप बना सकते हैं। रोगियों को तो दवा का काम करता है।सूप लेने की विधि:- सूप को गिलास या प्याले में लेकर छोटी चम्मच से धीरे-धीरे पीयें। इच्छानुसार नींबू का रस भी डाल सकते हैं। यदि कोई रोग न हो तो हल्का नमक या जीरा भी मिला सकते हैं। एक बार में २००-३०० मि.ली. की मात्रा ले सकते हैं। ध्यान रखने योग्य बातें:- १. सूप बनाने के १-२ घंटे के अंदर ही सूप का उपयोग कर लेना चाहिए। अधिक देर तक रखा सूप खराब हो जाता है। सूप को तामचीनी, शीशे या स्टील के बर्तनों में ही रखें। २. दस्त लगने पर सूप लेना बंद कर देना चाहिए।

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