क्या आपको नींद नहीं आती? आपकी रातें करवट बदलते हुए बीतती हैं या आप आंखें मूंदे रहने के बाद भी यह महसूस करते हैं कि आप सारी रात जागते रहते हैं और आपको सुबह उठने पर भी नींद से मिलने वाली ताजगी, स्फूर्ति की बजाय आलस्य, थकावट, सिरदर्द एवं भारीपन अनुभव होता है। यदि ऐसा है तो आपको निश्चय ही इस ओर सजग व सावधान होना प़डेगा।अनिद्रा का रोग वास्तव में भीषण एवं कष्टदायक रोग है। यदि यह अवस्था बहुत दिनों तक चलती रहे तो इससे आदमी पागल भी हो जाता है। आजकल इस रोग का अत्यधिक प्रसार है। नींद आने वाली करो़डों रुपए की गोलियों की संसार में खपत है। जो जितना भी सभ्य देश है वहां के निवासी उतना ही ज्यादा इस रोग से पीि़डत हैं। हो सकता है कि आप भी नींद लाने वाली गोलियों से इस पर विजय पा जाते हों पर यह तरीका निरापद नहीं हैं। सीरल स्कॉट के अनुसार ब़ढती हुई इन औषधियों की अत्यधिक मात्रा का प्रसार ही पुराने रोगों का प्रधान कारण है। नींद लाने वाली गोलियां प्रायः सभी जहरीली होती हैं। आप प्रायः प़ढते व सुनते होंगे कि अमुक ने इन गोलियों की अधिक मात्रा का प्रयोग कर अपने पास सदा-सदा के लिए नींद को बुला लिया।वास्तव में इन दवाओं से एक प्रकार की संज्ञाहीनता आ जाती है और वे निद्रा का अभाव पूरा करने वाली नहीं होती। इनके प्रयोग से स्वास्थ्य भी गिरने लगता है इसलिए हमें उन प्राकृतिक उपायों का सहारा लेना चाहिए जिनसे इस दिव्य निद्रा को निर्बाध रूप से सहज व स्वतः ही प्राप्त किया जा सके। खुली, शांत, हवादार जगह, साफ-सुथरा बिस्तर, उस पर हल्के कप़डे पहन कर सो जाइए। फिर देखिए कितनी अच्छी नींद आती है। केवल नींद के बारे में न सोचते रहिए कि पता नहीं नींद आएगी या नहीं वरन सब शंकाओं-कुशंकाओं को एक किनारे रख बदन ढीला कर सो जाइए। इससे प्रायः नींद आ जाती है। सोने का समय निश्चित कर लीजिए। निश्चित समय पर सोइए। सोने के समय से आधा घंटा पहले सभी तनावयुक्त विभाग पर बोझा डालने वाले कार्यों से छुट्टी ले लीजिए। देर रात तक उत्तेजक उपन्यासों का पठन, कामुक कल्पनाओं में निमग्न रहना, देर तक ताश, शतरंज खेलना आदि भी नींद को उ़डाने में सहायक होते हैं। इसलिए इनसे बचिए। रात को सोने से दो-तीन घंटे पहले भोजन कर लेना अच्छा रहता है। रात को भारी भोजन न करें। मादक द्रव्यों जैसे सिगरेट, कॉफी, चाय, शराब आदि के सेवन से बचिए। मिर्च-मसाले का उपयोग कम से कम करें। भोजन में फल-तरकारियों का इस्तेमाल ब़ढा दें। किसी भी प्रकार के पी़डादायक रोग, कष्टदायक दर्द भी नींद उ़डा सकते हैं। अतः उनके निवारण द्वारा ही नींद आएगी। पास-प़डोस के वातावरण के शोरगुल से भी नींद उ़ड जाती है। अतः जहां प्रायः शोरगुल रहता हो कभी शांत वातावरण प्राप्त न होता हो उस स्थान को छो़ड देना ही अच्छा रहता है।वास्तव में अनिद्रा के रोग को ज़ड से दूर करने के लिए युक्ताहार-विहार व तनावयुक्त जीवन द्वारा ही दूर किया जा सकता है। तत्काल नींद लाने के लिए जहरीली दवाएं न लेकर कुछ तात्कालिक निरापद उपाय भी किए जा सकते हैं। बिस्तर पर जाने से पहले पांच-दस मिनट गर्दन व कमर की हल्की कसरत करने अथवा गर्दन पर ठंडे पानी से भीगी पट्टी बांधने से सिर हल्का हो जाता है और नींद अच्छी आती है।सोने से पहले ऋतु के अनुसार गर्म अथवा ठंडे पानी से फुर्ती के साथ बदन व विशेष तौर पर री़ढ की मालिश करते हुए नहाना भी बहुत कारगर सिद्ध होता है। पाव भर गर्म पानी या दूध पीकर सोने से नींद आती देखी गई है। पेट में द्रव्य पहुंचते ही खून सिर से पेट की तरफ दौ़डने लगता है जिससे नींद अच्छी आती है। एक प्याला जल में एक चम्मच शहद डाल कर पीना भी लाभदायक हैं।शारीरिक श्रम के अभाव में भी निद्रा प्राप्त करने में कठिनाई होती है अतः सोने से पहले यदि एक-दो मील टहला जाए तो इससे नींद आने में सहायता मिलती है। तरह-तरह के विचारों को प्रश्रय देने से बचें। धीरे-धीरे गहरी सांस लेते हुए भी नींद आ जाती है। उपरोक्त उपायों को बरतिए। निश्चय ही प्रकृति की पुष्टतम खाद्य, ‘निद्रा’’ आंखों में लगेगी।

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